
पहाड़ का सच देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में शहरी आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण तथा जीआईएस आधारित जल-निकासी योजना के लिए कुल 1967 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है।
मुख्यमंत्री द्वारा प्रदेश के विभिन्न जनपदों में जीआईएस आधारित जल-निकासी योजना के अंतर्गत शामिल 15 योजनाओं हेतु ₹1960 करोड़ की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।
जनपद चम्पावत के अन्तर्गत टनकपुर में शारदा नदी के दाहिने किनारे पर स्थित खेत खेड़ा गाँव की सुरक्षा के लिए बाढ़ सुरक्षा योजना हेतु ₹6.82 करोड, की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है। उधमसिंहनगर के जिलाधिकारी कार्यालय में स्थित चकबंदी कार्यालय के सामने इंटर लॉकिंग टाईल्स द्वारा स्टाफ कार पार्किंग निर्माण हेतु कुल लागत ₹70.21 लाख के सापेक्ष प्रथम किश्त के रूप में ₹42.12 लाख, की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं आधुनिक आधारभूत संरचना के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी स्वीकृत योजनाओं का कार्य निर्धारित समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया जाए, जिससे आमजन को इन योजनाओं का लाभ शीघ्र प्राप्त हो सके।
GIS आधारित जल निकासी (GIS-based drainage) योजना एक आधुनिक तकनीक है जो भौगोलिक मानचित्रण (Mapping) और डेटा विश्लेषण का उपयोग करके शहरों और गांवों में जल भराव, बाढ़ और सीवरेज की समस्या का समाधान करती है। यह प्रणाली सैटेलाइट तस्वीरों और स्थानिक डेटा (Spatial Data) का उपयोग करके आपके क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति (जैसे ऊंचाई, ढलान, मिट्टी का प्रकार और भूमि उपयोग) का डिजिटल नक्शा तैयार करती है।
इसके आधार पर पानी के प्राकृतिक बहाव और नालियों के निर्माण की योजना बनाई जाती है। .सर्वेक्षण कर डिजिटल एलिवेशन मॉडल (DEM) का उपयोग करके यह पता लगाया जाता है कि पानी किस दिशा में बहेगा। शहर की सभी मौजूदा नालियों, सीवर लाइनों और जल निकायों को डिजिटल रूप से मैप किया जाता है। उन क्षेत्रों की पहचान की जाती है जहाँ बारिश में अक्सर पानी भर जाता है।
पानी के निकास के लिए सबसे छोटे और सबसे प्रभावी रास्तों की योजना बनाई जाती है। भारी बारिश के दौरान पानी जमा होने से पहले ही संभावित भराव क्षेत्रों की पहचान हो जाती है। नई नालियों या पाइपलाइनों को बिछाने के लिए सटीक खुदाई और लागत का अनुमान लगाया जाता है, जिससे समय और धन दोनों की बचत होती है। नगर निगम (ULBs) के लिए अपनी भूमिगत और खुली जल निकासी संपत्तियों (Drainage assets) का डिजिटल रिकॉर्ड रखना आसान हो जाता है।भारत सरकार द्वारा अमृत (AMRUT) और राष्ट्रीय जल सूचना प्रणाली (India-WRIS) जैसी योजनाओं में इस तकनीक का व्यापक स्तर पर उपयोग किया जा रहा है

