
हरिद्वार। गंगा घाट के किनारों पर ऑनलाइन एप्स के माध्यम से नानवेज आइटम डिलीवर किए जा रहे हैं। ये चौंकाने वाला दावा श्री अखंड परशुराम अखाड़े के संतों ने एक स्टिंग ऑपरेशन के जरिए किया है। संतों ने खुद मोबाइल एप से बटर चिकन और चिकन बिरयानी ऑर्डर की, जिसकी डिलीवरी महज 17 मिनट में घाट किनारे पहुँच गई।
अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने बताया कि उन्हें लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स का सहारा लेकर हरिद्वार की धार्मिक शुचिता को खंडित किया जा रहा है। इसकी पुष्टि के लिए अखाड़े के पदाधिकारियों ने रात करीब 9 बजे ओम पुल के पास स्थित सिंचाई विभाग के गेस्ट हाउस (गंगा किनारे) की लोकेशन डालकर ऑनलाइन ऑर्डर किया। ऑर्डर की कीमत लगभग 670 रुपये थी।
हैरानी की बात यह रही कि फूड आइटम तैयार होने के बाद रैपिडो के जरिए इसे बुक किया गया और मात्र 17 मिनट के भीतर डिलीवरी बॉय पार्सल लेकर निर्धारित घाट पर पहुँच गया। संतों ने इस पूरी प्रक्रिया का वीडियो भी बनाया है, जिसे प्रशासन को सौंपने की तैयारी है। संतों का कहना है कि यह प्रयोग इस बात का सबूत है कि प्रतिबंधित क्षेत्र में बिना किसी रोक-टोक के मांस की सप्लाई हो रही है।
इस खुलासे के बाद संत समाज ने वर्ष 1916 के म्यूनिसिपल बायलॉज का हवाला देते हुए नाराजगी जताई है। इन नियमों के अनुसार, हर की पौड़ी और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में मांस, मछली और मदिरा की बिक्री व सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध है। कथा व्यास पंडित पवन कृष्ण आचार्य ने इसे चिंता का विषय बताते हुए कहा कि प्रशासन की ढिलाई के कारण नगर निगम के नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है।
दूसरी ओर, पार्सल लेकर पहुँचे डिलीवरी बॉय ने सफाई देते हुए कहा कि उसे पार्सल के अंदर की सामग्री के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। उसका काम केवल एप पर मिली बुकिंग के आधार पर सामान पहुँचाना है। फिलहाल, इस स्टिंग ऑपरेशन के बाद धार्मिक संगठनों ने ऑनलाइन डिलीवरी कंपनियों पर सख्त निगरानी और दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।

