सात सितंबर को कांग्रेस का सीएम आवास घेराव का ऐलान, जबाव में 19 मंडलों में भाजपा देगी धरना
कांग्रेस की मुद्दों को हवा देने की भरसक कोशिश, भाजपा के सामने कांग्रेस के आन्दोलन की धार को कुंद करने की चुनौती
हरीश जोशी/पहाड़ का सच देहरादून।
हल्द्वानी में हुए मंच शुद्धिकरण के बाद उपजे राजनीतिक हालात और घटनाक्रम ने सत्तारूढ़ दल भाजपा और कांग्रेस को उत्तराखंड सहित पूरे देश में एक दूसरे को चुनाव से पहले ही जंग के मैदान में खड़ा कर दिया है। इससे सामाजिक व राजनीतिक ध्रुवीकरण तेज होने के आसार है।

देहरादून में सोमवार 7 सितंबर 2026 को कांग्रेस द्वारा प्रस्तावित मुख्यमंत्री आवास घेराव राज्य की सियासत में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील मोड़ पर हो रहा है। हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद किए गए कथित ‘शुद्धीकरण’ विवाद और उसके बाद राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर (FIR) को लेकर कांग्रेस का यह हल्ला बोल आयोजित किया जा रहा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल सहित कांग्रेस के शीर्ष नेताओं का मानना है कि यह घेराव केवल एक प्रदर्शन नहीं बल्कि राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने वाला कदम है।
उत्तराखंड में अगले साल (2027) विधानसभा चुनाव होने हैं. कांग्रेस इस ‘शुद्धीकरण विवाद’ के बहाने दलित और सामाजिक सम्मान के मुद्दे को मुख्यधारा में लाकर चुनाव से पहले एक मजबूत नैरेटिव स्थापित करना चाहती है। कांग्रेस इसे चुनावी मुद्दा बनाकर सत्तारूढ़ भाजपा को सामाजिक रूप से घेरने की कोशिश कर रही है।
राहुल गांधी पर उत्तराखंड में दर्ज हुई एफआईआर के विरोध में कॉन्ग्रेस इस प्रदर्शन के जरिए देश भर के कार्यकर्ताओं के लिए एक संदेश देना चाहती है. कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा उत्तराखंड में डेरा डाले हुए हैं। इस बड़े आंदोलन के जरिए कांग्रेस यह दिखाना चाहती है कि पार्टी अपने राष्ट्रीय नेतृत्व के खिलाफ किसी भी कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं करेगी और राज्य इकाइयां केंद्रीय नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़ी हैं. उत्तराखंड कांग्रेस अक्सर गुटबाजी और अंतर्कलह से जूझती नजर आती है. ऐसे में, इस घेराव को सफल बनाने के लिए पार्टी ने प्रदेशभर में ब्लॉक और जिला स्तर पर संगठन को सक्रिय किया है।
पीसीसी अध्यक्ष गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व अध्यक्ष प्रीतम सिंह,करन माहरा व हरक सिंह सहित कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं का एक मंच पर आकर आंदोलन को आगे बढ़ाने का मकसद ये है कि पूरे देश में कांग्रेस कार्यकर्ताओं तक ये संदेश जाए कि कांग्रेस अपने राष्ट्रीय नेताओं का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगी और सत्तारूढ़ दल की गलत नीतियों का मुंहतोड़ जबाव देने को भी तैयार हैं।
दोनों दलों ने सोमवार 7 सितंबर के लिए अपनी रणनीति तैयार की है. एक तरफ कांग्रेस इसे “लोकतंत्र और सामाजिक सम्मान की रक्षा का संघर्ष” बता रही है, वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और उनकी पार्टी के अनुसूचित जाति (SC) मोर्चा ने उसी दिन सभी 19 संगठनात्मक जिला मुख्यालयों पर धरने का एलान किया है। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस राजनीतिक लाभ के लिए “सामाजिक विद्वेष” फैला रही है, और भाजपा खुद को “सामाजिक समरसता” के रक्षक के रूप में पेश कर रही है। इस प्रकार यह घेराव राज्य में सामाजिक और राजनीतिक ध्रुवीकरण को और तीव्र करेगा।
कांग्रेस का दावा है कि राज्य की जनता मौजूदा भाजपा सरकार की नीतियों से बेहद नाराज है. इस आक्रामक आंदोलन के जरिए कांग्रेस राज्य के युवाओं, बेरोजगारों और आम जनता के बीच सरकार विरोधी भावनाओं को हवा देना चाहती है। वहीं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार के सामने इस कानून-व्यवस्था की चुनौती से निपटने और कांग्रेस के आरोपों की धार को कुंद करने की दोहरी चुनौती होगी।
सात सितंबर का मुख्यमंत्री आवास घेराव उत्तराखंड की राजनीति में एक ‘अघोषित चुनावी शंखनाद’ है. यदि कांग्रेस घेराव कार्यक्रम में संख्याबल ( भीड़) जुटाने में सफल रहती है, तो यह 2027 के चुनावों के लिए विपक्षी खेमे में भारी आत्मविश्वास पैदा करेगा, और यदि भाजपा काउंटर-रणनीति से इसे दबा देती है, तो कांग्रेस के चुनावी अभियान को इससे झटका लगेगा।

मंडल स्तर पर बीजेपी का धरना: भाजपा एससी मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष बलबीर घुनियाल ने देवभूमि के सामाजिक सौहार्द के लिए कल मंडल स्तर पर होने वाले धरने को बहुत अहम बताया है
उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की एकता और सामाजिक सौहार्द के लिए एकजुट सद्भाव ही हमारी शक्ति है और समरसता ही हमारी पहचान है. देवभूमि उत्तराखण्ड केवल हिमालय, नदियों और तीर्थों की भूमि नहीं, बल्कि भाईचारे, आपसी सम्मान और सामाजिक समरसता की पवित्र धरती है. सदियों से यहां हर वर्ग, हर समुदाय और हर व्यक्ति ने मिल-जुलकर उत्तराखण्ड की संस्कृति और पहचान को मजबूत किया है.
आज राजनीतिक स्वार्थ और समाज को बांटने वाली मानसिकता के कारण हमारे सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करने के प्रयास किए जा रहे हैं. ऐसे समय में हमारा दायित्व है कि हम किसी भी प्रकार के जातिवाद, वैमनस्य और विभाजनकारी सोच को उत्तराखण्ड की पावन धरती पर स्थान न दें।
भारतीय जनता पार्टी का स्पष्ट विश्वास है कि समाज की शक्ति उसकी एकता में है, विभाजन में नहीं। हम “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के मूल मंत्र के साथ प्रत्येक नागरिक को साथ लेकर चलने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
इसी संकल्प के साथ भारतीय जनता पार्टी, अनुसूचित जाति मोर्चा उत्तराखंड द्वारा “सामाजिक सौहार्द संकल्प धरना” आयोजित किया जा रहा है।
सभी सामाजिक संगठनों, युवाओं, मातृशक्ति और देवभूमि के प्रत्येक जागरूक नागरिक से भाजपा का आग्रह है कि इस अभियान का हिस्सा बनें और पूरी दृढ़ता के साथ संदेश दें कि हम उत्तराखण्ड को जाति के नाम पर बंटने नहीं देंग।
.हम नफरत को बढ़ने नहीं देंगे। हम भाईचारे और सामाजिक समरसता को कमजोर नहीं होने देंगे. आइए, हम सब मिलकर संकल्प लें कि देवभूमि उत्तराखण्ड की पहचान आपसी प्रेम, भाईचारे, सम्मान और सामाजिक समरसता से ही बनी रहेगी।

