
रायवाला में ग्रामीणों की खुली बैठक, पेयजल बिलों को लेकर आर-पार की लड़ाई का ऐलान
ग्राम सभा रायवाला को ‘अर्धनगरीय पेयजल योजना में शामिल किए जाने से आक्रोशित हैं ग्रामीण
वर्ष 2019 में पारित इस योजना में उल्लेखित नहीं है रायवाला ग्राम सभा का नाम
पहाड़ का सच रायवाला। ग्राम पंचायत रायवाला के ग्रामीण बढ़े हुए पेयजल बिलों को लेकर अब मुखर हो गए हैं। रायवाला ग्राम सभा के लिए शासन द्वारा इस योजना का चयन न किये जाने के बावजूद जल संस्थान द्वारा अर्धनगरीय पेयजल योजना में रायवाला को शामिल कर बढ़े हुए बिल जबरन थोपे जाने से ग्रामीणों का गुस्सा न केवल आंदोलन का रूप लेने लगा है अपितु इस मामले में ग्रामीणों ने अब न्यायालय की शरण जाने का भी निर्णय लिया है। इस मामले में रविवार को ग्रामीणों की एक महत्वपूर्ण खुली बैठक आयोजित की गई।

बैठक की अध्यक्षता ग्राम प्रधान सागर गिरी ने की। बैठक में सैकड़ों की संख्या में महिलाओं, युवाओं, वरिष्ठ नागरिकों, पंचायत प्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों ने भाग लिया और पेयजल बिलों की समस्या को लेकर एकमत से महत्वपूर्ण निर्णय पारित किये।
ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से कहा कि ‘अर्द्धनगरीय पेयजल योजना, के नाम पर रायवाला ग्राम सभा में भेजे जा रहे भारी-भरकम बिल किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किए जाएंगे। ग्रामीणों की मांग है कि पेयजल कनेक्शनों में आवश्यक संशोधन कर ग्रामीण क्षेत्र के अनुरूप बिल निर्धारित किए जाएं तथा प्रत्येक उपभोक्ता को एकमुश्त भारी बिल के स्थान पर ग्रामीण स्तर पर निर्धारित एवं उचित मासिक फिक्स बिल के अनुसार ही बिल उपलब्ध कराया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2019 में तत्कालीन सरकार द्वारा योजना का गठन करते समय श्यामपुर न्याय पंचायत के अंतर्गत केवल पांच ग्राम सभाओं ऋषिकेश ग्रामीण, खदरी-खड़कमाफ, गुमानीवाला, हरिपुर कला और ग्राम सभा प्रतीतनगर को ही इस योजना में शामिल किया गया था लेकिन बाद में जल संस्थान ने रायवाला ग्राम सभा में भी इस योजना को जबरन लागू कर दिया। अब अर्द्धनगरीय दरों के आधार पर पेयजल बिल भेजे जाने से ग्रामीणों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
बैठक में ग्रामीणों ने एकमत से निर्णय लिया कि यदि जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों द्वारा एक सप्ताह के भीतर इस समस्या का उचित समाधान नहीं किया गया तथा ग्रामीणों की मांग के अनुरूप पेयजल बिल निर्धारित नहीं किए गए तो ग्रामीणों द्वारा गठित कोर कमेटी इस मामले को आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाएगी। आवश्यकता पड़ने पर ग्रामीण इस मामले को लेकर न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएंगे।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि यदि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया तो समस्त ग्राम सभा रायवाला के ग्रामीण विधानसभा चुनाव के पूर्ण बहिष्कार का निर्णय लेने के लिए बाध्य होंगे। जल संस्थान के खिलाफ बैठक में भारी विरोध देखने को मिला। ग्राम प्रधान व सभी पंचायत सदस्यों की मौजूदगी में ग्रामीणों ने तय किया कि जब तक रायवाला ग्राम सभा को अर्धनगरीय पेयजल योजना से बाहर नहीं किया जाता, तब तक कोई भी ग्रामीण पानी का बिल जमा नहीं करेगा। आवश्यकता पड़ी तो ग्राम सभा रायवाला स्तिथ विभाग के नलकूप में तालाबंदी भी की जायेगी।
ग्रामीणों ने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल के विरुद्ध नहीं, बल्कि अपने अधिकारों और उचित पेयजल व्यवस्था व ग्राम सभा क्षेत्र के अनुसार पेयजल बिल लागू किये जाने का संघर्ष है।
ग्रामीण व सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश पांडे के संचालन में आयोजित इस बैठक में ग्राम प्रधान सागर गिरी, उप प्रधान गौरव चौहान, नागेंद्र चौहान, मीनाक्षी चौहान, रश्मि उनियाल, किरन पांडेय, दिव्या थापा, आशा रतूड़ी, मीना रावत, प्रमिला देवी आदि पंचायत सदस्यों सहित दीपक बडोला, वीरेन्द्र नौटियाल, श्यामलाल कंडवाल, विनोद पोखरियाल के अलावा सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
ग्रामीणों ने स्पष्ट संदेश दिया कि जब तक पेयजल बिलों की समस्या का न्यायसंगत समाधान नहीं होता, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।

