
जनसुनवाई में लोगों की आप बीती सुनना, गरीब बच्चों की पढ़ाई, लोन माफ, फीस जमा करवाने जैसे फैसलों से बनाई अलग पहचान
पहाड़ का सच देहरादून। राजधानी के जिलाधिकारी के रूप में आईएएस अधिकारी सविन बंसल को अपने कार्यकाल में जनकेंद्रित प्रशासन और संवेदनशील कार्यशैली के लिए लंबे समय तक याद किया जाएगा। वे राज्य की ब्यूरोक्रेसी में एक भलमानुष के रूप में उभरे। उनके तबादला से कई लोग क्षुब्ध भी हैं। उन्होंने अपनी कार्यप्रणाली से जनता के अधिकारी के रूप में पहचान बनाई।

आपदा प्रबंधन के दौरान सविन बंसल की सक्रियता सबसे अधिक चर्चा में रही। आपदा प्रभावित दुर्गम गांवों का जायजा लेने के लिए वे खुद 12 किलोमीटर पैदल चलकर मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों के सामने खाद्य संकट की स्थिति देखते ही उन्होंने देहरादून लौटकर हेलीकॉप्टर के जरिये राहत सामग्री और राशन एयरड्रॉप करवाया। प्रशासनिक नवाचार के तहत उन्होंने पहली बार फंड का उपयोग सामाजिक कल्याण में किया। शस्त्र लाइसेंस जैसी प्रक्रियाओं से जुटने वाले फंड को जरूरतमंद बुजुर्गों, दिव्यांगों और निर्धन बेटियों की शिक्षा में लगाया गया।
समाज के कमजोर वर्गों के बीच एक संवेदनशील प्रशासक की बनाई पहचान
उनकी इस पहल ने उन्हें समाज के कमजोर वर्गों के बीच एक संवेदनशील प्रशासक की पहचान दिलाई। सख्त प्रशासनिक रुख के लिए भी बंसल जाने गए। उन्होंने करोड़ों रुपये के सरकारी बकाएदारों के खिलाफ कार्रवाई की। आंगनबाड़ी केंद्रों में खराब राशन की शिकायत पर रुड़की के केंद्रीय गोदाम में छापेमारी कर बाल श्रमिकों और संदिग्ध एक्सपायरी सामान मिलने पर मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए। आबकारी विभाग के साथ सीधे टकराव की भी नौबत आई पर विवादों के बीच भी सविन बंसल ने संयम और गरिमा बनाए रखी।
बच्चों से प्रताड़ित बुजुर्ग हों या भूमाफियाओं के सताए हुए लोग, आर्थिक तंगी के चलते पढ़ाई छोड़ने वाली बेटियां हों या फिर दिव्यांगजन, इन सबके लिए देहरादून के डीएम सबसे बड़े मददगार बने। बंसल ने देहरादून में एक नई मुहिम शुरू करते हुए रायफल क्लब फंड का भी उपयोग किया और जरूरतमंदों को इस फंड से सहायता दिलवाई।
शराब की दुकान पर ओवररेटिंग ठोका जुर्माना
सितंबर 2024 को देहरादून जिलाधिकारी का पद संभालने के बाद आईएएस सविन बंसल ने स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लेने के लिए सबसे पहले कोरोनेशन अस्पताल की पड़ताल की। उन्होंने अस्पताल की लाइन में लगकर पर्ची बनवाई। अस्पताल में व्यवस्थाओं का मुआयना किया। जब अस्पताल प्रशासन को डीएम के छापेमारी का पता चला, तब तक डीएम पूरे अस्पताल को खंगाल चुके थे। इसके बाद एक दिन वे एकाएक शराब के ठेके पर पहुंचे और ग्राहक बन कर शराब खरीदी। जहां सेल्समैन ने निर्धारित रेट से 20 रुपये ज्यादा वसूले तो डीएम ने ओवररेटिंग के मामले में अनुज्ञापी पर 50 हजार का जुर्माना ठोंक दिया।
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के कारण आए थे चर्चाओं में
डीएम बंसल कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के कारण चर्चाओं में आए तो वहीं इससे पहले लोकसभा स्पीकर को रिसीव करने नहीं जाने और फोन न उठाने के मामले में भी सुर्खियों में रहे। हालांकि, जनता के बीच लोकप्रिय छवि होने के कारण इन मामलों ने ज्यादा तूल नहीं पकड़ा। इसी बीच जिलाधिकारी सविन बसंल ने एक और नई मुहिम शुरू की। डीएम ने राइफल क्लब फंड का उपयोग निर्धन, असहाय और जरूरतमंद लोगों के लिए शुरू किया। इस फंड का उपयोग, शस्त्र लाइसेंस जैसे लक्जरी लेन-देन के लिए किया जाता है, लेकिन डीएम की पहल पर ऐसा पहली बार हुआ कि इस फंड का उपयोग गरीब और कमजोर वर्ग के उत्थान के लिए किया गया। इसके तहत चिकित्सा, मकान मरम्मत और स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।
किसी को घर की मरम्मत के लिए तो किसी को मास्टर डिग्री की पढ़ाई के लिए, किसी को उपचार के लिए तो किसी को स्वरोजगार शुरू करने और दुर्घटना में आंख खोने पर कृत्रिम आंख लगाने के लिए इस फंड से मदद मिली। डीएम बंसल ने इस फंड का उपयोग सीएसआर के रूप में किया। जिलाधिकारी की सख्ती के चलते बकाए की वसूली भी तेजी से की गई।
2009 बैच के आईएएस सविन बंसल मूल रूप से हरियाणा के रहने वाले हैं। उन्होंने वर्ष 2008 में यूपीएससी परीक्षा क्लियर की। सविन की रैंक 34वीं थी। सविन बंसल को उत्तराखंड कैडर अलॉट किया गया। सविन बंसल उत्तराखंड के अल्मोड़ा और नैनीताल के डीएम भी रह चुके हैं। इन जिलों में भी उनके कार्यों की सराहना हुई। यूनाइटेड किंगडम कॉमनवेल्ड स्कॉलरशिप धारक सविन बंसल ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कुरुक्षेत्र से बीटेक किया है। उन्होंने एनआईटी कुरुक्षेत्र से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है।
उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन से रिस्क डिजास्टर में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। वर्ष 2021 में यूनाइटेड किंगडम कॉमनवेल्ड स्कॉलरशिप के लिए भी चुने गए। यूके की स्कॉलरशिप के लिए चुना गया। दरअसल, यूनाइटेड किंगडम की ओर से कॉमनवेल्थ स्कॉलरशिप दी जाती है। यह स्कॉलरशिप ब्रिटेन की अलग-अलग यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए दी जाती है।

