
ज्योतिष इंद्रमोहन डंडरियाल
*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞*
*⛅दिनांक – 02 जुलाई 2026*
*⛅दिन – गुरुवार*
*⛅विक्रम संवत् – 2083*
*⛅अयन – उत्तरायण*
*⛅ऋतु – वर्षा*
*🌤️ अमांत – 18 गते आषाढ़ मास प्रविष्टि*
*🌤️ राष्ट्रीय तिथि – 11 आषाढ़ मास*
*⛅मास – आषाढ़*
*⛅पक्ष – कृष्ण*
*⛅तिथि – द्वितीया सुबह 09:37 तक तत्पश्चात् तृतीया*
*⛅नक्षत्र – उत्तराषाढा सुबह 09:27 तक तत्पश्चात् श्रवण*
*⛅योग – वैधृति शाम 04:39 तक तत्पश्चात् विष्कम्भ*
*⛅राहुकाल – दोपहर 02:05 से दोपहर 03:49 तक (हरिद्वार मानक समयानुसार)*
*⛅सूर्योदय – 05:20*
*⛅सूर्यास्त – 07:22 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त हरिद्वार मानक समयानुसार)*
*⛅दिशा शूल – दक्षिण दिशा में*
*⛅ब्रह्ममुहूर्त – प्रातः 04:21 से प्रातः 05:03 तक (हरिद्वार मानक समयानुसार)*
*⛅अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:04 से दोपहर 12:58 तक (हरिद्वार मानक समयानुसार)*
*⛅निशिता मुहूर्त – मध्यरात्रि 12:10 से मध्यरात्रि 12:52 तक (हरिद्वार मानक समयानुसार)*
*🌥️ व्रत पर्व विवरण – विद्यालाभ योग (सुबह 04:21 से सुबह 09:27 तक)*
*🌥️ विशेष – तृतीया को परवल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
🚩~*सनातन पंचांग* ~🚩
🌷 *विघ्नों और मुसीबते दूर करने के लिए* 🌷
👉 *03 जुलाई 2026 शुक्रवार को संकष्ट चतुर्थी (चन्द्रोदय रात्रि 10:01)*
🙏🏻 *शिव पुराण में आता हैं कि हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी ( पूनम के बाद की ) के दिन सुबह में गणपतिजी का पूजन करें और रात को चन्द्रमा में गणपतिजी की भावना करके अर्घ्य दें और ये मंत्र बोलें :*
🌷 *ॐ गं गणपते नमः ।*
🌷 *ॐ सोमाय नमः ।*
🚩 *~ सनातन पंचांग ~* 🚩
🌷 *चतुर्थी तिथि विशेष* 🌷
🙏🏻 *चतुर्थी तिथि के स्वामी भगवान गणेशजी हैं।*
📆 *हिन्दू कैलेण्डर में प्रत्येक मास में दो चतुर्थी होती हैं।*
🙏🏻 *पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्ट चतुर्थी कहते हैं।अमावस्या के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं।*
🙏🏻 *शिवपुराण के अनुसार “महागणपतेः पूजा चतुर्थ्यां कृष्णपक्षके। पक्षपापक्षयकरी पक्षभोगफलप्रदा ॥*
➡ *“ अर्थात प्रत्येक मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि को की हुई महागणपति की पूजा एक पक्ष के पापों का नाश करनेवाली और एक पक्षतक उत्तम भोगरूपी फल देनेवाली होती है ।*🚩 *~ सनातन पंचांग ~* 🚩
🌷 *कोई कष्ट हो तो* 🌷
🙏🏻 *हमारे जीवन में बहुत समस्याएँ आती रहती हैं, मिटती नहीं हैं ।, कभी कोई कष्ट, कभी कोई समस्या | ऐसे लोग शिवपुराण में बताया हुआ एक प्रयोग कर सकते हैं कि, कृष्ण पक्ष की चतुर्थी (मतलब पुर्णिमा के बाद की चतुर्थी ) आती है | उस दिन सुबह छः मंत्र बोलते हुये गणपतिजी को प्रणाम करें कि हमारे घर में ये बार-बार कष्ट और समस्याएं आ रही हैं वो नष्ट हों |*
👉🏻 *छः मंत्र इस प्रकार हैं –*
🌷 *ॐ सुमुखाय नम: : सुंदर मुख वाले; हमारे मुख पर भी सच्ची भक्ति प्रदान सुंदरता रहे ।*
🌷 *ॐ दुर्मुखाय नम: : मतलब भक्त को जब कोई आसुरी प्रवृत्ति वाला सताता है तो… भैरव देख दुष्ट घबराये ।*
🌷 *ॐ मोदाय नम: : मुदित रहने वाले, प्रसन्न रहने वाले । उनका सुमिरन करने वाले भी प्रसन्न हो जायें ।*
🌷 *ॐ प्रमोदाय नम: : प्रमोदाय; दूसरों को भी आनंदित करते हैं । भक्त भी प्रमोदी होता है और अभक्त प्रमादी होता है, आलसी । आलसी आदमी को लक्ष्मी छोड़ कर चली जाती है । और जो प्रमादी न हो, लक्ष्मी स्थायी होती है ।
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🌷 *ॐ अविघ्नाय नम:*
🌷 *ॐ विघ्नकरत्र्येय नम:*

