
ज्योतिष इंद्रमोहन डंडरियाल
🚩 *~ सनातन पंचांग ~* 🚩
🌤️ *दिनांक – 25 जून 2026*
🌤️ *दिन – गुरूवार*
🌤️ *विक्रम संवत 2083 (गुजरात अनुसार 2082)*
🌤️ *शक संवत -1948*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – वर्षा ॠतु*
🌤️ *अमांत – 11 गते आषाढ़ मास प्रविष्टि*
🌤️ *राष्ट्रीय तिथि – 4 आषाढ़ मास*
🌤️ *मास – ज्येष्ठ*
🌤️ *पक्ष – शुक्ल*
🌤️ *तिथि – एकादशी रात्रि 08:09 तक तत्पश्चात द्वादशी*
🌤️ *नक्षत्र – स्वाती शाम 04:29 तक तत्पश्चात विशाखा*
🌤️ *योग – शिव सुबह 10:54 तक तत्पश्चात सिद्ध*
🌤️*राहुकाल – दोपहर 02:04 से शाम 03:48 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 05:17*
🌤️ *सूर्यास्त – 07:22*
👉 *दिशाशूल – दक्षिण दिशा मे*
🚩*व्रत पर्व विवरण- निर्जला-भीम एकादशी*
💥*विशेष- *हर एकादशी को श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख शांति बनी रहती है l राम रामेति रामेति । रमे रामे मनोरमे ।। सहस्त्र नाम त तुल्यं । राम नाम वरानने ।।*
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25 जून, 2026, गुरुवार
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आज और कल का दिन खास
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25 जून 2026 : निर्जला एकादशी व्रत आज।
25 जून 2026 : गायत्री जयंती आज।
25 जून 2026 नमाणी एकादशी आज।
25 जून 2026 : रुकमणी विवाह आज।
25 जून 2026 : भीम एकादशी आज।
26 जून 2026 : चम्पक द्वादशी कल।
26 जून 2026 : भटिंडा में बरहे मेला कल।
26 जून 2026 : नशा निषेध दिवस कल।
26 जून 2026 : वटसावित्री व्रत प्रारम्भ – (पूर्णिमा पक्ष वालों का।)
💥 *आज एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से विष्णु सहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l*
💥 *एकादशी के दिन बाल नहीं कटवाने चाहिए।*
💥 *एकादशी को चावल व साबूदाना खाना वर्जित है | एकादशी को शिम्बी (सेम) ना खाएं अन्यथा पुत्र का नाश होता है।*
💥 *जो दोनों पक्षों की एकादशियों को आँवले के रस का प्रयोग कर स्नान करते हैं, उनके पाप नष्ट हो जाते हैं।*
🚩~*सनातन पंचांग* ~🚩
👉🏻 *निर्जला एकादशी पर समृद्धिदायक उपाय*⤵️
🌷 *निर्जला एकादशी* 🌷
➡️ *25 जून 2026 गुरुवार को निर्जला एकादशी है।*
🙏🏻 *निर्जला एकादशी व्रत से अधिक मास सहित २६ एकादशियों के व्रत का फल प्राप्त होता है । इस दिन किया गया स्नान, दान जप, होम आदि अक्षय होता है ।*
🚩 *~ सनातन पंचांग ~* 🚩
👉🏻 *26 एकादशियो का पुण्य सिर्फ निर्जला एकादशी व्रत से*
🌷 *बहूपयोगी औषधि – सोंठ* 🌷
👉🏻 *जब अदरक सूख जाता है तब उसकी सोंठ बनती है | सोंठ पाचनतंत्र के लिए अत्यंत उपयोगी है | यह सारे शरीर के संगठन को सुधारती है, मनुष्य की जीवनशक्ति और रोगप्रतिरोधक शक्ति बढ़ाती है | यह आम, कफ व वात नाशक है | गठिया, दमा, खाँसी, कब्जियत, उल्टी, सूजन, ह्रदयरोग, पेट के रोग और वातरोगों को दूर करती है |*
💊 *औषधीय प्रयोग* 💊
➡ *वातनाशक गोलियाँ : सोंठ के चूर्ण में समभाग गुड़ और थोडा – सा घी डाल के २- २ ग्राम की गोलियाँ बना लें | १ -२ गोली सुबह लेने से वायु और वर्षाकालीन जुकाम से रक्षा होती है | बारिश में सतत भीगते – भीगते काम करनेवाले किसानों और खेती के काम में लगे मजदूरों के लिए यह अत्यंत लाभदायक है | इससे शारीरिक शक्ति व फूर्ती बनी रहती है |*
➡ *सिरदर्द : सोंठ को पानी के साथ घिसलें | इसका लेप माथे पर करने से कफजन्य सिरदर्द में राहत मिलती है |*
➡ *मन्दाग्नि : सोंठ का आधा चम्मच चूर्ण थोड़े – से गुड़ में मिलाकर कुछ दिन प्रात:काल लेने से जठराग्नि तेज हो जाती है और मन्दाग्नि दूर होती है |*
➡ *कमर दर्द व गठिया : सोंठ को मोटा कूट लें | १ चम्मच सोंठ २ कप पानी में डाल के उबालें | जब आधा कप पानी बचे तो उतार के छान लें | इसमें २ चम्मच अरंडी – तेल डाल के सुबह पियें | दर्द में राहत होने तक हफ्तें में २ -३ दिन यह प्रयोग करें |*
🌷 *पुराना जुकाम* 🌷
😤 *१) ५ ग्राम सोंठ १ लीटर पानी में उबालें | दिन में ३ बार यह गुनगुना करके पीने से पुराने जुकाम में लाभ होता है |*
😤 *२) पीने के पानी में सोंठ का टुकड़ा डालकर वह पानी पीते रहने से पुराना जुकाम ठीक होता है | ( सोंठ के टुकड़े को प्रतिदिन बदलते रहें | )*
😤 *सर्दी – जुकाम : ५ ग्राम सोंठ चूर्ण, १० ग्राम गुड़ और १ चम्मच घी को मिलालें | इसमें थोडा -सा पानी डालके आग पर रखके रबड़ी जैसा बना लें | प्रतिदिन सुबह लेने से ३ दिन में ही सर्दी – जुकाम मिट जाता है |*
💥 *सावधानी – रक्तपित्त की व्याधि में तथा पित्त प्रकृतिवाले ग्रीष्म व शरद ऋतु में सोंठ का उपयोग न करें |*🙏🚩☘️🌴🌸🌹🌷💐🌺🪷🕉️🙏

