
ज्योतिष इंद्रमोहन डंडरियाल
🚩 *~ सनातन पंचांग ~* 🚩
🌤️ *दिनांक – 03 जून 2026*
🌤️ *दिन – बुधवार*
🌤️ *विक्रम संवत 2083 (गुजरात अनुसार 2082)*
🌤️ *शक संवत -1948*
🌤️ *अयन – उत्तरायण*
🌤️ *ऋतु – ग्रीष्म ॠतु*
🌤️ *अमांत – 20 गते ज्येष्ठ मास प्रविष्टि*
🌤️ *राष्ट्रीय तिथि – 13 ज्येष्ठ मास*
🌤️ *मास – अधिक ज्येष्ठ*
🌤️ *पक्ष – कृष्ण*
🌤️ *तिथि – तृतीया रात्रि 09:21 तक तत्पश्चात चतुर्थी*
🌤️ *नक्षत्र – पूर्वाषाढा रात्रि 12:59 तक तत्पश्चात उत्तराषाढा*
🌤️ *योग – शुभ सुबह 08:12 तक तत्पश्चात शुक्ल*
🌤️*राहुकाल – दोपहर 12:15 से दोपहर 01:59 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 05:17*
🌤️ *सूर्यास्त – 07:15*
👉 *दिशाशूल – उत्तर दिशा मे*
🚩 *व्रत पर्व विवरण- संकष्ट चतुर्थी (चन्द्रोदय: रात्रि 09:51)*
💥*विशेष- तृतीया को पर्वल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
🚩~*सनातन पंचांग* ~🚩
🌷*विभुवन संकष्टी चतुर्थी* 🌷
*हिंदू धर्मशास्त्रों और पुराणों में अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) में पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी का बेहद विशेष और दुर्लभ महत्व बताया गया है। इस विशिष्ट चतुर्थी को “विभुवन संकष्टी चतुर्थी” कहा जाता है। चूंकि अधिक मास हर तीन साल में एक बार आता है, इसलिए यह व्रत भी तीन साल में एक ही बार रखने का सौभाग्य भक्तों को मिलता है।*
*तो इस बार संकष्ट चतुर्थी 03 जून 2026 बुधवार को है और चंद्रोदय रात्रि 09:51 पर)*
*तो अधिक मास के स्वामी स्वयं भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) हैं। शास्त्रों में वर्णित है कि इस पूरे महीने में किए गए किसी भी जप, तप, दान या व्रत का फल सामान्य दिनों की तुलना में अनंत गुना (कई गुना अधिक) मिलता है। जब इस परम पवित्र महीने में विघ्नहर्ता भगवान गणेश की संकष्टी चतुर्थी का संयोग बनता है, तो व्रत करने वाले के जीवन से बड़े से बड़े संकट भी चुटकियों में दूर हो जाते हैं।*
*धर्म ग्रंथों के अनुसार, इस व्रत की महिमा स्वयं महर्षि वेदव्यास जी ने द्वापर युग में राजा युधिष्ठिर और माता द्रौपदी को सुनाई थी*
*जब पांडव जुए में अपना सब कुछ हारकर जंगलों में कष्ट भोग रहे थे, तब महर्षि वेदव्यास और मार्कंडेय ऋषि ने युधिष्ठिर को अपने दुखों और शत्रुओं से मुक्ति पाने के लिए अधिक मास की संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने की सलाह दी थी। इस व्रत के प्रभाव से पांडवों के मार्ग की सभी बाधाएं दूर हुईं और उन्होंने महाभारत के युद्ध में विजय प्राप्त कर अपना खोया हुआ राज्य और वैभव पुनः प्राप्त किया।*
*संकष्टी’ का अर्थ ही है संकटों को हरने वाली। यह व्रत कुंडली के राहु-केतु दोष और जीवन में आ रही अचानक अड़चनों को खत्म करता है।*
*यदि व्यापार में लगातार घाटा हो रहा हो या सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल हो रही हो, तो अधिक मास पुरुषोत्तम मास की विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत उसे दोबारा बहाल करता है।*
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क्रमश:…………

