
ज्योतिष इंद्रमोहन डंडरियाल
🚩 *~ सनातन पंचांग ~* 🚩
🌤️ *दिनांक – 31 अक्टूबर 2026*
🌤️ *दिन – शनिवार*
🌤️ *विक्रम संवत 2083*
🌤️ *शक संवत -1948*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – हेमंत ॠतु*
⛅ *अमांत – 15 गते कार्तिक मास प्रविष्टि*
⛅ *राष्ट्रीय तिथि – 9 कार्तिक मास*
🌤️ *मास – कार्तिक*
🌤️ *पक्ष – कृष्ण*
🌤️ *तिथि – षष्ठी शाम 04:57 तक तत्पश्चात सप्तमी*
🌤️ *नक्षत्र – आर्द्रा सुबह 07:12 तक तत्पश्चात पुनर्वसु*
🌤️ *योग – सिद्ध शाम 05:31 तक तत्पश्चात साध्य*
🌤️*राहुकाल – सुबह 09:17 से सुबह 10:39 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 06:27*
🌤️ *सूर्यास्त – 06:34*
👉 *दिशाशूल – पूर्व दिशा मे*
🚩*व्रत पर्व विवरण* – 🚩
*विशेष- *षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
💥 *चतुर्मास के दिनों में ताँबे व काँसे के पात्रों का उपयोग न करके अन्य धातुओं के पात्रों का उपयोग करना चाहिए।(स्कन्द पुराण)*
💥 *चतुर्मास में पलाश के पत्तों की पत्तल पर भोजन करना पापनाशक है।*
🚩~*सनातन पंचांग* ~🚩
👉🏻 *केवल एक लोटा जल से चमक उठेगी किस्मत! दिन-प्रतिदिन तेजी से बढ़ेगी तरक्की, खुलेंगे उन्नति और खुशहाली के नए रास्ते, चूकना मत*
🌷 *घातक रोगों से मुक्ति पाने का उपाय* 🌷
👉🏻 *01 नवम्बर 2026 रविवार को (सूर्योदय से दोपहर 02:51) रविवारी सप्तमी है।*
🙏🏻 *रविवार सप्तमी के दिन बिना नमक का भोजन करें। बड़ दादा के १०८ फेरे लें । सूर्य भगवान का पूजन करें, अर्घ्य दें व भोग दिखाएँ, दान करें । तिल के तेल का दिया सूर्य भगवान को दिखाएँ ये मंत्र बोलें :-*
🌷 *”जपा कुसुम संकाशं काश्य पेयम महा द्युतिम । तमो अरिम सर्व पापघ्नं प्रणतोस्मी दिवाकर ।।”*,
💥 *नोट : घर में कोई बीमार रहता हो या घातक बीमारी हो तो परिवार का सदस्य ये विधि करें तो बीमारी दूर होगी ।*
🚩 *~ सनातन पंचांग ~* 🚩
👉🏻 *इन कार्यो को करने से बचे होता है नुकसान*
🌷 *मंत्र जप एवं शुभ संकल्प हेतु विशेष तिथि*
🙏🏻 *सोमवती अमावस्या, रविवारी सप्तमी, मंगलवारी चतुर्थी, बुधवारी अष्टमी – ये चार तिथियाँ सूर्यग्रहण के बराबर कही गयी हैं।*
🌷 *इनमें किया गया जप-ध्यान, स्नान , दान व श्राद्ध अक्षय होता है।*
🙏🏻 *(शिव पुराण, विद्येश्वर संहिताः अध्याया (10)*
🚩 *~ सनातन पंचांग ~* 🚩
🌷 *कैसे बदले दुर्भाग्य को सौभाग्य में* 🌷
➡️*01 नवम्बर 2026 रविवार को सूर्योदय से 02 नवम्बर प्रात: 04:30 तक रविपुष्यामृत योग है।*
🌳 *बरगद के पत्ते पर गुरुपुष्य या रविपुष्य योग में हल्दी से स्वस्तिक बनाकर घर में रखें |*
🚩 *~ सनातन पंचांग ~* 🚩
🌷 *रविपुष्यामृत योग* 🌷
🙏🏻 *‘शिव पुराण’ में पुष्य नक्षत्र को भगवान शिव की विभूति बताया गया है | पुष्य नक्षत्र के प्रभाव से अनिष्ट-से-अनिष्टकर दोष भी समाप्त और निष्फल-से हो जाते हैं, वे हमारे लिए पुष्य नक्षत्र के पूरक बनकर अनुकूल फलदायी हो जाते हैं | ‘सर्वसिद्धिकर: पुष्य: |’ इस शास्त्रवचन के अनुसार पुष्य नक्षत्र सर्वसिद्धिकर है | पुष्य नक्षत्र में किये गए श्राद्ध से पितरों को अक्षय तृप्ति होती है तथा कर्ता को धन, पुत्रादि की प्राप्ति होती है |*
🙏🏻 *इस योग में किया गया जप, ध्यान, दान, पुण्य महाफलदायी होता है परंतु पुष्य में विवाह व उससे संबधित सभी मांगलिक कार्य वर्जित हैं | (शिव पुराण, विद्येश्वर संहिताः अध्याय 10)*
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