
हरीश जोशी राज्य सरकार के कार्यकाल के चार वर्ष पूरे होने पर ”
पहाड़ का सच” ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से विशेष बातचीत की। मुख्यमंत्री ने इन चार सालों की यात्रा को राज्य के विकास के लिए मील का पत्थर बताया।
वर्ष 2022 से 2026 तक राज्य ने अर्थव्यवस्था, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और कृषि आदि विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। देवभूमि उत्तराखण्ड ने पिछले चार वर्षों में विकास की एक नई कहानी लिखी है। वर्ष 2022 से 2026 तक, चार वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। राज्य की जीएसडीपी में तेजी से बढ़ोतरी हुई है और प्रति व्यक्ति आय में लगभग 41 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

राज्य के बजट का आकार भी 60 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 1 लाख 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। निवेश, उद्योग और पर्यटन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। राज्य गठन के समय अर्थव्यवस्था का आकार 14 हजार 501 करोड़ रुपए का था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 3 लाख 81 हजार 889 करोड़ रुपये हुआ। राज्य गठन के समय हमारी प्रति व्यक्ति आय सिर्फ 15 हजार 285 रुपए थी, जो अब बढ़कर 2 लाख 73 हजार 921 रुपए हो गई है। इस प्रकार राज्य की अर्थव्यवस्था का आकार 26 गुना और प्रति व्यक्ति आय 17 गुना बढ़ी है।
विकास में तेजी आने से बजट में बीस गुना से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। प्रदेश की आर्थिक विकास दर वर्ष 2022 में 4.71 प्रतिशत थी, जो व 2025 में 7.23 प्रतिशत हो गई है. वर्ष 2026-27 में विकास दर 8.2 प्रतिशत अनुमानित है। नीति आयोग द्वार जारी (एसडीजी इंडेक्स) में उत्तराखण्ड वर्ष 2023-24 में देश में प्रथम स्थान पर रहा जबकि वर्ष 2021-21 में चौथे स्थान पर था
वर्ष 2026-27 में राज्य का बजट का आकार 1 लाख 11 हजार करोड़ से अधिक रुपये है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत अधिक है। यह बजट केवल आय-व्यय का दस्तावेज नहीं है, बल्कि राज्य के सवा करोड़ लोगों की आकांक्षाओं और उम्मीदों का प्रतिबिंब है। वर्ष 2024-25 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) ₹ 3.82 लाख रहा, जो वर्ष 2021-22 में 2.54 लाख करोड़ रुपए था। इस प्रकार राज्य की जीएसडीपी में वर्ष 2021-22 की तुलना में डेढ़ गुना से ज्यादा हो गई है। वर्ष 2022 में राज्य में प्रति व्यक्ति आय ₹ 1,94,670 थी, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर ₹ 2,73,921 हो गई.
बहु आयामी गरीबी सूचकांक जो वर्ष 2021-22 में 9.7 प्रतिशत था, वर्ष 2024-25 में घटकर 6.92 प्रतिशत पर आ गया है. लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट वर्ष 2021-22 में 60.1 प्रतिशत था, वर्ष 2024-25 में 64.4 प्रतिशत है जो रोजगार के क्षेत्र में 4.3 प्रतिशत की बढोत्तरी को दर्शाता है. राज्य में वर्ष 2021-22 में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) की कुल संख्या 59,798 थी, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 79,394 हो गई है। एमएसएमई के अंतर्गत रोजगार पाने वालों की संख्या वर्ष 2022 में 3.43,922 थी जो वर्ष 2025 में बढ़कर 4,56,605 हो गई है।
राज्य में वर्ष 2021-22 तक लार्ज इंडस्ट्री की संख्या 107 थी, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 128 हो गई है. वर्ष 2017 तक स्टार्टअप की संख्या शून्य थी, जो वर्ष 2021-22 में 702 तथा वर्ष 2024-25 में बढ़कर 1,750 हो गई है। राज्य में सड़कों की कुल लम्बाई वर्ष 2021-22 में 50393 किमी थी, जो 2024-25 में बढ़कर 51278 किमी हो गई है. 2022 तक 2 हेलीपोर्ट थे, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 7 हो गए हैं. हेलीपैड की संख्या वर्ष 2021-22 में 60 थी, जो वर्ष 2024-25 में 118 हो गई है।
प्राइमरी विद्यालयों में ड्रॉपआउट का अनुपात वर्ष 2021-22 में 1.64 प्रतिशत था, जो वर्ष 2024-25 में 1.41 प्रतिशत हो गया है, जबकि माध्यमिक विद्यालयों में यह अनुपात वर्ष 2021-22 में 7.65 प्रतिशत था, जो वर्ष 2024-25 में घटकर 4.59 प्रतिशत हो गया है. शासकीय एवं अशासकीय डिग्री कॉलेजों की संख्या वर्ष 2021-22 में 124 थी, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 139 हो गई है. सरकारी एवं निजी इंजीनियरिंग कॉलेज की संख्या वर्ष 2021-22 में 20 थी, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 52 हो गई है. राज्य में वर्ष 2021-22 में कुल 5,157 मिलियन यूनिट का विद्युत उत्पादन होता था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 16,500 मिलियन यूनिट हो गया है।
वर्ष 2022 में बिजली की खपत 12,518 मिलियन यूनिट थी, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 17,192 मिलियन यूनिट हो गई है. सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी राज्य में अभूतपूर्व कार्य हुआ है. वर्ष 2021-22 में सौर ऊर्जा के माध्यम से 439 मेगावाट उत्पादन होता था, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 1,027 मेगावाट हो गया है।
राज्य में शिशु मृत्यु दर वर्ष 2021-22 में 22 थी, जो वर्ष 2024-25 में घटकर 20 पर आ गयी है। मातृ मृत्यु दर वर्ष 2021-22 में 103 थी, जो वर्ष 2024-25 में घटकर 91 पर आ गयी है. राज्य में जीवन प्रत्याशा 71.7 वर्ष से बढ़कर 73 वर्ष हो गई है।
राज्य में वर्ष 2021-22 में 97 प्रतिशत घरों में शौचालय की सुविधा थी जो अब शत प्रतिशत हो गई है. राज्य में धान और गेहूं उत्पादन में भी बढ़ोतरी हुई. गेहूं, चावल वर्ष 2021-22 में 28.23 कुंतल प्रति हेक्टेयर था जो अब बढ़कर 32.47 कुंतल प्रति हेक्टेयर पहुंच गया है।
वर्ष 2021-22 में औषधियां और सगन्ध खेती का क्षेत्र कुल 900 हेक्टेयर था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 10 हजार हेक्टेयर पहुंच गया है. वर्ष 2021-22 तक 50.92 लाख लीटर प्रतिदिन दुग्ध उत्पादन होता था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 54.59 लाख लीटर प्रतिदिन हो गया है. मत्स्य उत्पादन में काफी बढ़ोतरी हुई है। मत्स्य उत्पादन वर्ष 2021-22 में कुल 7,325 टन प्रति साल होता था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 10,487 टन प्रति वर्ष हो गया है. राज्य में वर्ष 2021-22 में 8,225 होटल थे, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 10,509 हो गए हैं. वर्ष 2021-22 में 3,935 होम स्टे थे, जिनकी संख्या वर्ष 2024-25 में बढ़कर 6,161 पहुंच गई है।
राज्य में जीएसडीपी, प्रति व्यक्ति आय, एमएसएमई, स्टार्टअप और पर्यटन सहित विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति यह दर्शाती है कि उत्तराखण्ड तेजी से विकास के पथ पर अग्रसर है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में रोजगार सृजन, निवेश प्रोत्साहन और जनकल्याण को केंद्र में रखकर उत्तराखण्ड को आत्मनिर्भर और समृद्ध राज्य बनाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है।

