
– अंकिता हत्याकांड वर्सेज जेनी प्रकरण, क्या केवल राजनीतिक मोहरे ?
पहाड़ का सच/अशोक डंडरियाल ।
देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में अंकिता भंडारी हत्याकांड और हाल ही में फिर से चर्चा में आए ‘जेनी प्रकरण’ का आपस में गहरा राजनीतिक संबंध जुड़ा हुआ है। नवंबर 2026 की ताजा घटनाओं के अनुसार, ये दोनों मामले राज्य में एक-दूसरे के विरोध और राजनीतिक बयानबाजी का केंद्र बने हुए हैं।
अंकिता हत्याकांड 2022
19 वर्षीय अंकिता भंडारी ऋषिकेश के पास गंगा-भोगपुर स्थित वनंतरा रिज़ॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। 18 सितंबर 2022 को उनकी हत्या कर दी गई थी और 24 सितंबर को उनका शव चिल्ला नहर बैराज से बरामद हुआ था।
कोटद्वार की अदालत ने 29-30 मई 2025 को रिसॉर्ट मालिक पुलकित आर्य, प्रबंधक सौरभ भास्कर और सहायक प्रबंधक अंकित गुप्ता को हत्या (धारा 302), महिला की गरिमा को ठेस पहुँचाने (धारा 354) और आपराधिक साजिश (धारा 120B) के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई है। पुलकित आर्य का संबंध पूर्व भाजपा नेता विनोद आर्य से था, जिसके बाद उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया था। अंकिता मामले में सीबीआई जांच अभी चल रही है।

जेनी प्रकरण 2003 का मामला
जेनी प्रकरण साल 2003 के एक पुराने मामले से जुड़ा है। पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने आरोप लगाया है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड से जनता का ध्यान भटकाने के लिए सत्ताधारी दल (भाजपा) ने सुनियोजित तरीके से 23 साल पुराने ‘जेनी प्रकरण’ को दोबारा उछाला है। हरक सिंह रावत का कहना है कि इस मामले में सीबीआई और डीएनए जांच के बाद अदालत से उन्हें पहले ही क्लीन चिट मिल चुकी है और वह इसके खिलाफ मानहानि का मुकदमा करेंगे।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और सत्ता पक्ष का कहना है कि उनकी सरकार ने अंकिता के दोषियों को सजा दिलाई है, जबकि कांग्रेस और विपक्ष पुराने मामलों को लेकर राजनीति कर रहे हैं और कांग्रेस को अपने पुराने कार्यकालों के दौरान हुए ‘जेनी’ जैसे विवादित मामलों की याद क्यों नहीं आती।
जेनी की एंट्री से उत्तराखंड की सियासत में आई तपिश को भाजपा चुनाव तक बरकरार रखेगी। भाजपा खुश है, उसे लगता है अंकिता भंडारी के मुद्दे पर जिस तरह से कांग्रेस आक्रामक होकर आगे बढ़ रही थी तो उसका भाजपा के पास कोई जवाब नहीं था। अब स्पष्ट हो गया है कि चुनाव में अंकिता भंडारी कांग्रेस का प्रमुख मुद्दा होगा तो भाजपा जेनी के मुद्दे को लेकर आगे बढ़ेगी। भाजपा अब कांग्रेस को कह सकती है कि “तुम्हारे पास अंकिता है तो हमारे पास भी जेनी है”


