
हरीश जोशी/पहाड़ का सच देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार द्वारा उठाए गए डेमोग्राफी संरक्षण से जुड़े फैसलों पर अमित शाह के विजन की गहरी छाप दिखाई दी है।अमित शाह के दौरे और उनके बयानों से यह स्पष्ट हो गया है कि भाजपा 2027 का आगामी विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ही नेतृत्व और उनके चेहरे पर लड़ने जा रही है। पार्टी ने नेतृत्व को लेकर किसी भी प्रकार की अटकलों पर विराम लगा दिया है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को अपने उत्तराखंड दौरे पर देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में धामी सरकार के कड़े फैसलों, जैसे कठोर नकल विरोधी कानून, धर्मांतरण विरोधी कानून, अतिक्रमण के खिलाफ अभियान और करीब 35,000 युवाओं को सरकारी नौकरी दिये जाने की जमकर तारीफ की। इससे धामी की छवि एक ‘टफ और डिसीजन-मेकर’ (निर्णायक) नेता के रूप में और मजबूत हुई है।
अमित शाह के दौरे और उनके बयानों से यह स्पष्ट हो गया है कि भाजपा 2027 का आगामी विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ही नेतृत्व और उनके चेहरे पर लड़ने जा रही है। पार्टी ने नेतृत्व को लेकर किसी भी प्रकार की अटकलों पर विराम लगा दिया है। अमित शाह ने पार्टी कार्यकर्ताओं का आह्वान करते हुए उत्तराखंड में इस बार 65 से अधिक सीटें जीतने का बड़ा लक्ष्य रखा है। भाजपा ने 2017 में 57 और 2022 के चुनाव में 47 सीटें जीती थीं। .यह बढ़ा हुआ लक्ष्य पार्टी के भीतर अति-आत्मविश्वास भरने और कार्यकर्ताओं को जमीन पर सक्रिय करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। चुनाव से पहले भाजपा द्वारा चलाए जा रहे अभियानों और शाह की सभा ने काडर में नया जोश भरा है।
शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि लंबे समय तक कांग्रेस की नीतियों ने उत्तराखंड को ‘मनी-ऑर्डर इकोनॉमी’ और पलायन पर निर्भर रखा। वहीं, मोदी और धामी सरकार ने पहाड़ी क्षेत्रों में पलायन रोकने के लिए बुनियादी ढांचे, पर्यटन और औद्योगिक विकास को बढ़ावा दिया है।वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (Vibrant Villages Programme) के तहत सीमावर्ती गांवों में विकास और चीन की सीमा तक मजबूत सड़कों के निर्माण का जिक्र कर देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को भी एक बड़ा चुनावी मुद्दा बना दिया गया है।
कांग्रेस द्वारा उठाए जा रहे स्थानीय मुद्दों और यात्राओं के जवाब में भाजपा ने राष्ट्रवाद, सख्त कानून-व्यवस्था, और ‘डबल इंजन’ सरकार के विकास कार्यों को आगे रखकर पिच को पूरी तरह से अपने अनुकूल करने की कोशिश की है। शाह ने कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर संपर्क साधने के निर्देश दिए हैं, जिससे यह साफ है कि भाजपा चुनाव से बहुत पहले ही चुनावी मोड में आ चुकी है और विपक्ष को किसी भी मुद्दे पर बढ़त नहीं देना चाहती।


