पहाड़ का सच देहरादून। बनियावाला में चल रही रामलीला के सप्तम दिवस की रामलीला का शुभारंभ आज के मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व केबिनेट मंत्री, वर्तमान में कांग्रेस इलेक्शन प्रबंध समिति के अध्यक्ष डॉ हरक सिंह रावत, के कर कमलों द्वारा किया गया।
डॉ सतेंद्र सिंह, राजेश चमोली, सीमा चमोली एवं रामचरण गोदियाल जी
आज के विशेष आमंत्रित अतिथि कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष ताजबर नेगी, उत्कर्ष योग मिशन के संस्थापक डॉ सतेंद्र सिंह, प्रदेश प्रभक्ता उत्तराखण्ड कांग्रेस राजेश चमोली, जिला पंचायत सदस्य सीमा चमोली, आचार्य गिरिश धस्माना, आचार्य हरीश पंत रहे।
दुर्गा शक्ति कीर्तन मंडली वैष्णवी कीर्तन मंडली, पीताम्बर पुर,मां भगवती कीर्तन मंडली, शक्ति कॉलोनी
आज की लीला का आरंभ दुर्गा शक्ति कीर्तन मंडली, सोसायटी रोड, वैष्णवी कीर्तन मंडली, पीताम्बर पुर, मां भगवती कीर्तन मंडली, शक्ति कॉलोनी के सुंदर भजनों द्वारा किया गया। इन मंडलियों के सुंदर भजनों ने सभी दर्शकों का मन मोह लिया।
इस अवसर पर उत्कर्ष योग मिशन के संस्थापक डॉ सतेंद्र सिंह ने उपस्थित जनसमूह को योग के फायदे के बारे में अवगत कराया उन्होंने कहा कि किस तरह से योग हमारे जीवन में नई आशा और उमंग का संचार करता है। योग कई रोगों को दूर करता है।
मां नंदा देवी राज जात डोली
आज का विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम गढ़वाली, कुमाऊंनी लोक गायिका लीला देवी पयाल, और उनकी सहयोगियों द्वारा नंदा देवी के गीत का सुंदर प्रस्तुतीकरण किया गया। इसमें ओडर देवाल चमोली की नंदा देवी जात की झलक दिखाई गई। इनकी संस्था देव भूमि लोक कला मंच ने अपनी देवभूमि की संस्कृति को देश के कई राज्यों में पहुंचाया। इनको लोकगायकी में उत्तराखण्ड वीनर का खिताब मिला हुआ है।
आज की लीला का मंचन रावण के दरबार से शुरू होता है, उसी समय सुपर्णखा रोती हुई आती है और कहती है कि भ्राता मैं पंचवटी में गई थी तो वहां राम, लक्ष्मण और सीता आई हुए हैं वहां उन्होंने मेरी नाक काट ली। इसके बाद रावण क्रोधित हो जाता है और कहता है कि में पंचवटी जाता है उनको मजा चखाता हूँ।
फिर रावण मामा मारीच के पास पहुंचते हैं और कहते हैं तुम भेष बदलकर पंचवटी जाओ और राम लक्ष्मण को जंगल में ले आओ, में पीछे से सीता का हरण कर लाऊँगा। मारीच सोने के हिरण का रूप धरकर पंचवटी में जाता है और सीता उसपर मोहित हो जाती है और राम से जिद करती है कि सोने का मृग लेकर आओ, फिर राम, लक्ष्मण को कहते हैं कि तुम सीता का ख्याल रखना। राम जंगल में मारीच के पीछे जाते हैं, इतने मारीच हाय लक्ष्मण की ध्वनि पुकारता है और सीता, लक्ष्मण को भी जंगल में भेज देती है, इसके बाद रावण साधु का भेष बदलकर सीता का हरण कर ले जाता है।