देहरादून। यूपीईएस, एक एआई-फर्स्ट यूनिवर्सिटी, इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन एडवांसमेंट इन साइबर सिक्योरिटी एंड डिजिटल फॉरेंसिक्स यानी आईसीएसीएसडीएफ 2026 के लिए देशभर से प्रमुख शोधकर्ताओं, साइबरसिक्योरिटी प्रोफेशनल्स, इंडस्ट्री प्रैक्टिशनर्स और छात्रों को एक साथ ला रही है। यूनिवर्सिटी का उद्देश्य उभरते साइबर खतरों, डिजिटल अपराधों और अधिक मजबूत व सुरक्षित डिजिटल इकोसिस्टम की आवश्यकता के आसपास संवाद को मजबूत करना है।

स्कूल ऑफ कंप्यूटर साइंस, यूपीईएस यानी एसओसीएस द्वारा आयोजित इस कॉन्फ्रेंस को द इंस्टिट्यूट ऑफ इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर्स, उत्तर प्रदेश सेक्शन यानी आईईईई द्वारा स्पॉन्सर किया गया। इसने ओरिजिनल रिसर्च प्रस्तुत करने, टेक्निकल नॉलेज साझा करने और एकेडेमिया व इंडस्ट्री के बीच मजबूत सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक इंटरडिसिप्लिनरी प्लेटफॉर्म प्रदान किया।
इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण रिसर्च रुचि को दर्शाते हुए, आईसीएसीएसडीएफ 2026 को 892 रिसर्च पेपर सबमिशन्स प्राप्त हुए, जिनमें से 469 रिव्यूअर्स द्वारा दुनियाभर से किए गए पीयर रिव्यू के बाद 186 पेपर्स स्वीकार किए गए।
चर्चाओं और रिसर्च प्रस्तुतियों में साइबरसिक्योरिटी में एआई और मशीन लर्निंग, साइबर-थ्रेट इंटेलिजेंस, डिजिटल फॉरेंसिक्स, पोस्ट-क्वांटम और क्वांटम क्रिप्टोग्राफी, आईओटी सिक्योरिटी, ब्लॉकचेन और डिस्ट्रीब्यूटेड सिस्टम्स, सॉफ्टवेयर और वेब सिक्योरिटी, इन्सिडेंट रिस्पॉन्स, और गवर्नेंस, रिस्क एंड कम्प्लायंस जैसे क्षेत्र शामिल रहे।
इन क्षेत्रों की जरूरत तेजी से बढ़ रही है। मार्च 2026 में गृह मंत्रालय द्वारा उद्धृत सीईआरटी-इन के डेटा के अनुसार, भारत में 2025 में 29.44 लाख साइबरसिक्योरिटी घटनाएं दर्ज की गईं, जो 2024 में 20.41 लाख थीं — यानी लगभग 44 प्रतिशत की वृद्धि। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के ग्लोबल साइबरसिक्योरिटी आउटलुक 2026 में यह भी पाया गया कि 87 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने एआई-से जुड़ी कमजोरियों को सबसे तेजी से बढ़ता साइबर जोखिम बताया। जैसे-जैसे साइबर खतरे अधिक बार और अधिक जटिल होते जा रहे हैं, वे बिजनेसेज़ को बाधित कर सकते हैं, संवेदनशील डेटा को खतरे में डाल सकते हैं और डिजिटल सेवाओं में भरोसे को कमजोर कर सकते हैं।
आईसीएसीएसडीएफ 2026 की प्रासंगिकता और महत्व पर जोर देते हुए, मुख्य अतिथि, माननीय उत्तराखंड राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह, पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम, वीएसएम (सेवानिवृत्त) ने कहा, “मुझे ‘एडवांसमेंट्स इन साइबर सिक्योरिटी एंड डिजिटल फॉरेंसिक्स कॉन्फ्रेंस’ के उद्घाटन समारोह में उपस्थित होकर बहुत खुशी हो रही है। इस महत्वपूर्ण कॉन्फ्रेंस का हिस्सा बनना मेरे लिए अत्यंत प्रसन्नता की बात है। मैं इस सम्मेलन के आयोजकों को हार्दिक बधाई देता हूँ कि उन्होंने ऐसे विषयों को चर्चा के केंद्र में रखा है, जो आज हमारे देश के विकास, तकनीकी प्रगति और राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधे जुड़े हुए हैं।”
डॉ. सुनील राय, वाइस चांसलर, यूपीईएस, ने कहा, “जैसे-जैसे समाज और अर्थव्यवस्थाएं अधिक डिजिटल होती जा रही हैं, साइबर रेज़िलिएंस हमारे कनेक्टेड भविष्य में भरोसा बनाने के लिए बुनियादी है। यूनिवर्सिटीज़ की महत्वपूर्ण भूमिका है कि वे रिसर्च, टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्री एक्सपर्टीज़ को साथ लाकर उभरते खतरों का पूर्वानुमान लगाएं और जिम्मेदार, व्यावहारिक समाधान विकसित करें। आईसीएसीएसडीएफ 2026 ने शोधकर्ताओं, प्रैक्टिशनर्स और छात्रों के लिए नॉलेज एक्सचेंज करने, कोलैबोरेशन को गहरा करने और एआई-एनेबल्ड साइबरसिक्योरिटी, डिजिटल फॉरेंसिक्स और नेक्स्ट-जेनरेशन सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में समाधानों को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म तैयार किया।”
इस कॉन्फ्रेंस में यूनिवर्सिटी ऑफ ऑकलैंड, बॉयसी स्टेट यूनिवर्सिटी, आईआईटी खड़गपुर, आईआईईएसटी शिबपुर, इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टिट्यूट कोलकाता और आईआईटी रुड़की जैसे प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हुए। कीनोट स्पीकर्स में प्रो. स्टीवन गैलब्रेथ, प्रो. एडोआर्डो सेरा, प्रो. राजा दत्ता, प्रो. सिप्रा दास बिट, प्रो. गौतम पॉल और प्रो. संजीव कुमार शामिल थे।
इंडस्ट्री और आमंत्रित विशेषज्ञों, जिनमें पालो आल्टो नेटवर्क्स, बैमको, सुपीरियर ग्रुप ऑफ कंपनीज़ और आलिया यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधि शामिल थे, ने उभरती सुरक्षा चुनौतियों और साइबरसिक्योरिटी टेक्नोलॉजीज़ के वास्तविक उपयोगों पर अपने दृष्टिकोण साझा किए।
आईसीएसीएसडीएफ 2026 ने अंतरराष्ट्रीय रिसर्च कोलैबोरेशन, थ्रेट-इंटेलिजेंस एक्सचेंज, स्किल्स डेवलपमेंट, सिक्योरिटी स्टैंडर्ड्स, रेगुलेटरी चुनौतियों और इंडस्ट्री बेस्ट प्रैक्टिसेज़ पर बातचीत को भी बढ़ावा दिया, जिससे शोधकर्ताओं और साइबरसिक्योरिटी प्रैक्टिशनर्स के बीच करीबी जुड़ाव की जरूरत और मजबूत हुई।
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आईसीएसीएसडीएफ 2026 के माध्यम से, यूपीईएस ने बदलती साइबरसिक्योरिटी चुनौतियों को संबोधित करने और एक अधिक सुरक्षित व मजबूत डिजिटल भविष्य में योगदान देने के उद्देश्य से रिसर्च, कोलैबोरेशन और नॉलेज एक्सचेंज को सक्षम बनाने के अपने प्रयासों को और मजबूत किया।

