
छात्रों ने हेमंत सरकार को झुकाया… जेपीएससी के तीन सदस्यों का इस्तीफा
हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुई थी परीक्षा
पहाड़ का सच/एजेंसी
रांची। झारखंड सरकार ने जेपीएससी की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा समेत तीन परीक्षाएं रद्द कर दी हैं। इसके अलावा आंदोलनकारी छात्रों की कई और मांगें मान लीं, लेकिन जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने और इसकी सीबीआई जांच की मांग पर गतिरोध बरकरार है। छात्रों ने साफ कर दिया है कि ये दोनों मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। इस बीच झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के तीन सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया है।
परीक्षाओं में गड़बड़ी पर आंदोलन कर रहे छात्रों के प्रतिनिधिमंडल और सरकार के चार मंत्रियों के बीच रविवार को छठे दौर की वार्ता करीब चार घंटे तक चली। बैठक के बाद उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने बताया, 14वीं पीएससी-प्रारंभिक परीक्षा-2025 के साथ ही 2023 और 2025 की बैकलॉग भर्ती परीक्षा रद्द करने पर सहमति बन गई है। आंदोलनकारियों की 98 फीसद मांगें मान ली गई हैं। वहीं, छात्र नेता रवींद्र पासवान ने दावा किया कि सीबीआई जांच जांच की मांग पूरी होने और सरकार की ओर से लिखित आश्वासन मिले बिना आंदोलन खत्म नहीं करेंगे।
तीन मांगें मानीं, दो पर बात अटकी, सीजीएल की सीबीआई जांच पर छात्र अड़े
सरकार: सीजीएल परीक्षा कोर्ट की निगरानी में हुई
उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा, जेएसएससी सीजीएल परीक्षा की सीबीआई जांच की मांग पूरी करना संभव नहीं है, क्योंकि यह परीक्षा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुई थी। इसकी जांच के लिए हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में पैनल बनाया जाएगा।
गड़बड़ी पकड़ ली, युवाओं को मिलेगा न्याय
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि हमने गड़बड़ी पकड़ ली है। युवाओं को न्याय मिलेगा। जिन्होंने गड़बड़ी की है, उन्हें कठोर से कठोर दंड दिया जाएगा। हम इसी मिट्टी में जन्मे हैं और इसी मिट्टी में मिलेंगे। इसे राजनीतिक चश्मे से न देखें। सरकार ने कहा कि वित्तीय अनियमितता की ईडी जांच की सिफारिश की जाएगी। 90 दिन चार्जशीट दाखिल करने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा।
छात्रों का दावा है कि सरकार झूठ बोल रही है। सरकार ने 13 में से तीन परीक्षाएं रद्द की हैं।
अभ्यर्थियों का भविष्य तय करने वाले आयोग में नेताओं-नातेदारों का कब्जा
जेपीएससी के तीन सदस्यों डॉ. अजिता भट्टाचार्य, जमाल अहमद व अनिमा हांसदा ने रविवार को इस्तीफा दे दिया। तीनों को पूछताछ के लिए सीआईडी ने तलब किया है। चेयरमैन एल. खियांग्ते पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं।
अजिता : सत्तारूढ़ झामुमो के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य की पत्नी हैं। सोमवार को पूछताछ होगी।
जमाल : कांग्रेस से नाता। पूछताछ 11 को होगी।
अनिमा हांसदा : 2009 में आजसू से विधानसभा चुनाव लड़ चुकी हैं। 14 अगस्त को पूछताछ होगी।
खियांग्ते : 1988 बैच के आईएएस अधिकारी और झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव थे। फरवरी, 2025 में हेमंत सोरेन सरकार की सिफारिश पर आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया था। शिबू-हेमंत के करीबी खियांग्ते ने जांच शुरू होते ही बीती 22 जुलाई को इस्तीफा दे दिया था।
परीक्षा में भारी धांधली के लगे आरोप
जेपीएससी-2025 प्री परीक्षा 103 पदों के लिए हुई थी। नतीजे जारी होने के बाद कट-ऑफ मार्क्स, चयन सूची और मूल्यांकन में धांधली के आरोप लगे। यूपी में ब्लैक लिस्टेड टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग के परीक्षा कराने से भी छात्र नाराज थे। छात्रों ने 24 जुलाई से आंदोलन शुरू किया। दो अगस्त से छह छात्र भूख हड़ताल पर बैठ गए थे।
विभिन्न परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच लंबी बातचीत के बाद लिए गए प्रमुख निर्णय और वर्तमान स्थिति इस प्रकार है:रद्द की गई और विवादित परीक्षा: 14वीं जेपीएससी (JPSC) प्रारंभिक परीक्षा और 2023 व 2025 की जेपीएससी बैकलॉग परीक्षा।
जेएसएससी-सीजीएल (JSSC-CGL) परीक्षा को रद्द करने और पूरे मामले की सीबीआई (CBI) जांच कराने की छात्रों की मांग को सरकार ने खारिज कर दिया है। सरकार का तर्क है कि जेएसएससी-सीजीएल की प्रक्रिया न्यायालय के निर्देश पर पूरी हुई थी और सफल उम्मीदवारों की नियुक्तियां हो चुकी हैं, इसलिए इसे एकतरफा रद्द नहीं किया जा सकता।
परीक्षाओं में वित्तीय अनियमितताओं की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) से और आपराधिक पहलुओं की जांच राज्य सीआईडी (CID) से कराने पर सहमति बनी है। इन मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट का गठन होगा। इसके अलावा, परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार के लिए आईआईटी (IIT) आईएसएम धनबाद, आईआईएम (IIM) रांची और एक्सएलआरआई (XLRI) के विशेषज्ञों की एक समिति बनाई जाएगी,जेएसएससी-सीजीएल को रद्द करने और सीबीआई जांच की मांग को लेकर छात्रों का आंदोलन अभी भी जारी है।

