
“मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन” का तात्पर्य
हरीश जोशी/पहाड़ का सच।
देहरादून में आयोजित ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी (विशेषकर Gen-Z) को सीधे तौर पर सरकार की नीतियों और राज्य के विकास से जोड़ना है। इस तरह के संवाद कार्यक्रमों को युवा मतदाताओं और नए वोटर्स को साधने की कोशिश के रूप में भी देखा जा सकता है। जो राजनीतिक दलों के लिए सर्वथा उचित प्रतीत होता है।

राज्य के लगभग तीन लाख से अधिक स्कूली छात्रों (कक्षा 11 और 12) और उनके परिवारों को सीधे जोड़कर, सरकार भविष्य के नए मतदाताओं के बीच अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिश कर रही है. सत्तारूढ़ दल को भरोसा है कि इससे युवाओं के मन में सरकार और नेतृत्व के प्रति सकारात्मक छवि बन सकती है।
हाल ही के दिनों ने युवाओं के मामले में उपजे हालात के बाद ‘माई ड्रीम उत्तराखंड: माय विजन फॉर ए डेवलप्ड स्टेट’ पर निबंध प्रतियोगिताओं और विचारों का आदान-प्रदान कर सरकार फिर से युवाओं के बीच भरोसा पैदा करने का भरसक प्रयास कर रही है।
सरकार 2026 और उसके बाद के चुनावों के लिए युवाओं को एक विकसित उत्तराखंड के एजेंडे में भागीदार बनाना चाहती है। मुख्यमंत्री धामी का यह कहना कि छात्रों के सुझावों को सरकारी नीतियों में शामिल किया जाएगा, सशक्तिकरण का संदेश देता है। उनका मकसद युवाओं में यह विश्वास जगाना है कि उनकी राय को महत्व दिया जा रहा है और वे सिर्फ लाभार्थी नहीं, बल्कि राज्य के विकास में नीति-निर्माता हैं।

अक्सर युवा बेरोजगारी और शिक्षा की गुणवत्ता जैसे मुद्दों पर मुखर होते हैं. ऐसे संवादों के माध्यम से सरकार युवाओं की समस्याओं को सुनकर असंतोष को कम करने का प्रयास कर यह संदेश देना चाहती है कि नेतृत्व उनकी चिंताओं के प्रति संवेदनशील है। अपनी संवाद बैठकों में सीएम धामी ने भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया है। यह भारतीय जनता पार्टी के वैचारिक एजेंडे का हिस्सा है, जिससे युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखने का राजनीतिक संदेश जाता है।
दसवीं और बारहवीं के टॉपर्स छात्रों को एक दिन के लिए डीएम और एसपी बनाने जैसी पहल की घोषणा करके सरकार मेधावी छात्रों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ सुशासन और नेतृत्व का मजबूत राजनीतिक नैरेटिव स्थापित करती दिखाई देती है।

