
पौड़ी। जनपद मुख्यालय स्थित उत्तरा केयर अस्पताल में एक प्रसूता और नवजात की मौत के बाद स्थानीय लोगों और युवाओं में भारी आक्रोश देखा गया। आक्रोशित युवाओं ने अस्पताल का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने रैली निकालकर अस्पताल प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।
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स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की, जिसमें दोषी चिकित्सकों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की गई। उन्होंने निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली को अधिक जवाबदेह बनाने, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था लागू करने की भी मांग उठाई। युवाओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
वहीं मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) पौड़ी, डॉ. मेघा असवाल ने घटना पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि मामले की जांच के लिए एक समिति गठित कर दी गई है। जांच पूरी होने तक अस्पताल में सर्जरी संबंधी सेवाओं पर रोक लगा दी गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर उचित कार्रवाई की जायेगी।
अस्पताल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, डॉ. अनु भारती ने बताया कि बीती 27 जुलाई की शाम को प्रसव से पीड़ित एक महिला आई थी। जब उसकी जांच की गई कि तो बच्चादानी बाहर की तरफ निकला हुआ था। उस समय तक बच्चे की धड़कन कम होने लगी थी. ऐसे में तत्काल सीजेरियन प्रक्रिया अपनाई गई। जिसके तहत पेट को खोला तो पता चला कि बच्चेदानी को नुकसान पहुंच चुका था। ऐसे में हमने बच्चेदानी की अच्छे तरीके से रिपेयरिंग की और बच्चे को बाहर निकाला, लेकिन बच्चा सर्वाइव नहीं कर पाया।
हमने बल्ड चढ़ाने के बाद प्रसूता को आईसीयू से लैस वाहन से हायर सेंटर रेफर कर दिया था। इसके बाद वो जौलीग्रांट स्थित अस्पताल पहुंचे। जहां पर उनका उपचार हुआ, लेकिन महिला की जान चली गई। हमने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की कि दोनों को बचाया जा सके, लेकिन ऑस्ट्रिक कॉम्प्लिकेशन की वजह ऐसा नहीं हो पाया।

