पहाड़ का सच/एजेंसी।
उज्जैन। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को उज्जैन में आयोजित युवा धर्म संसद में युवाओं को अहंकार से बचने की नसीहत दे दी। उन्होंने कहा कि उदय हुआ है तो अस्त भी होगा। किसी को भ्रम नहीं रखना चाहिए कि सब उसके अनुसार चलता है। मनुष्य अपने अहंकार में सोचता है कि सत्ता उसकी मर्जी से चलती है, मगर ऐसा नहीं है।
उन्होंने बिना किसी नेता के नाम लिए बगैर कहा कि, GenZ माने जाने वाले युवा भी धर्म पर चर्चा कर रहें हैं। उन्होंने कहा कि आजकल युवाओं के धर्म से जुड़ने की बात कम ही सुनने को मिलती है। अगर हम धर्म की बात करते हैं, तो लोग कहते हैं कि यह सब बुढ़ापे की बातें हैं। भगवद गीता, रामायण वगैरह रिटायरमेंट के बाद पढ़ने के लिए हैं। लेकिन ऐसा नहीं है। यह धर्म कम से कम अस्तित्व की शुरुआत से लेकर उसके अंत तक बना रहता है। चाहे आप इसमें विश्वास करें या न करें सब कुछ धर्म के अनुसार ही चलता है।
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि उदाहरण के लिए, सूरज का उगना और डूबना तय है। यह वैसा ही होगा, चाहे आप मानें या न मानें। धर्म हमारे आचरण और कर्तव्यों में बसता है, जैसे पुत्र धर्म , राज धर्म और मानव धर्म । यह हर चीज और जीव के स्वभाव के अनुसार उनके कर्तव्यों को तय करता है। उन्होंने युवाओं को धर्म की परिभाषा भी दी।
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि जो चीज सबको एकजुट रखती है। सबका उत्थान करती है। उन्हें एक-दूसरे से अलग होने से बचाती है और दुनिया के प्रति सभी जीवों और चीजों के कर्तव्यों को उनके स्वभाव के अनुसार तय करती है ताकि हर कोई भौतिक और आध्यात्मिक तरक्की का फायदा उठा सके, वही अनुशासन धर्म कहलाता है। धर्म आचरण में होता है। भाषणों या किताबों में नहीं। अगर किताबों में है भी, तो वह हमारी जानकारी और स्पष्टता के लिए है।

