
14 मुख्य सत्रों में स्वदेशी के वैचारिक अधिष्ठान और सांगठनिक सुदृढ़ता पर हुआ गहन मंथन
देहरादून। स्वदेशी जागरण मंच, उत्तराखंड प्रांत का 2 दिवसीय ‘प्रांत विचार वर्ग’ (प्रशिक्षण शिविर) आज राजपुर रोड स्थित स्वामी रामतीर्थ आश्रम के पवित्र वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ
इस गरिमामयी वैचारिक शिविर में उत्तराखंड के विभिन्न जिलों से आए प्रबुद्ध कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने प्रतिभाग किया। दो दिनों के इस वर्ग में कुल 14 महत्वपूर्ण सांगठनिक एवं वैचारिक सत्रों पर गंभीर चिंतन-मनन किया गया।

वर्ग के विभिन्न सत्रों में चर्चा के मुख्य बिंदु निम्नलिखित रहे:
वैचारिक अधिष्ठान एवं विकास यात्रा : शिविर की शुरुआत ‘स्वदेशी का वैचारिक अधिष्ठान’ सत्र से हुई, कश्मीरी लाला अखिल भारतीय संघटक स्वदेशी जागरण मंच ने कहा स्वदेशी एवं स्वावलंबन के वैचारिक पक्ष को रेखांकित किया गया। इसके साथ ही ‘स्वदेशी की विकास यात्रा’ तथा बदलते दौर में ‘युगानुकूल स्वदेशी’ की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला गया। स्वावलंबन और उद्यमिता विकास: युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ‘उद्यमिता विकास-प्रशिक्षण प्रक्रिया एवं स्वावलंबन केन्द्र’ के क्रियान्वयन पर विशेष कार्ययोजना बनी। साथ ही स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए ‘स्वदेशी मेले – प्रक्रिया, प्रकार एवं प्रशिक्षण’ विषय पर कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन किया गया।
सांगठनिक सुदृढ़ता और कार्यपद्धति: संगठन विस्तार हेतु ‘पूर्णकालिक कार्यकर्ता – हमारी संकल्पना एवं विकास प्रक्रिया’ तथा ‘स्वदेशी कार्यकर्ता- गुण, व्यवहार एवं टीम वर्क’ पर सत्र आयोजित हुए। मंच की अनूठी ‘हमारी कार्यपद्धति’ के तहत आर्थिक, सामाजिक और सरकारी संगठनों के साथ समन्वय स्थापित करने के लिए ‘प्लगइन सिस्टम’ को समझाकर सांगठनिक कौशल को निखारा गया।

गौरव कुमार प्रांत सह संयोजक स्वदेशी जागरण मंच ने कहा कि समाज के विभिन्न आयाम: संगठन में समाज के हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ‘महिला कार्य, युवा कार्य एवं वरिष्ठ नागरिक आयाम’ पर विशेष रणनीतिक चर्चा की गई।
प्रेरणा पुंज एवं वैचारिक अधिष्ठान: कार्यकर्ताओं में राष्ट्र प्रथम की भावना भरने के लिए संगठन के ‘प्रेरणा पुंज’ श्रद्धेय दत्तोपंत ठेंगड़ी जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी, बाबू गेनू जी एवं अन्य स्वदेशी पुरोधाओं के जीवन और उनके विचारों का स्मरण किया गया।
प्रचार तन्त्र एवं डिजिटल माध्यम: स्वदेशी के विचार को जन-जन तक पहुँचाने के लिए ‘प्रचार तन्त्र एवं स्वदेशी विचार प्रसार’ सत्र में सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और डिजिटल कैंपेन के प्रभावी उपयोग की बारीकियों को साझा किया गया।
कार्यालय, वित्तीय अनुशासन एवं पर्यावरण: सांगठनिक अनुशासन के अंतर्गत ‘हमारे कार्यालय, स्वावलंबन केन्द्र – आर्थिक संरचना तन्त्र’ के तहत बैंक खाते, निधि संग्रह की पारदर्शी प्रक्रिया और विधि निषेध (नियमों) पर कड़ाई से पालन करने का संकल्प लिया गया। इसके साथ ही, वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता ‘पर्यावरण’ संरक्षण को लेकर भी मंच की भूमिका तय की गई।
आगामी कार्ययोजना:
शिविर के अंतिम सत्र में ‘आगामी कार्ययोजना’ की घोषणा की गई, जिसके अंतर्गत प्रांत के प्रत्येक जिले, तहसील और ग्राम स्तर तक स्वदेशी के इस वैचारिक अधिष्ठान को पहुँचाया जाएगा और ‘स्वावलम्बी भारत अभियान’ को और अधिक तीव्र किया जाएगा।
शिविर के सफल आयोजन के लिए प्रांत के सभी प्रमुख पदाधिकारियों, देवतुल्य कार्यकर्ताओं और स्वामी रामतीर्थ आश्रम प्रबंधन का हृदय से आभार व्यक्त किया गया। वर्ग का समापन राष्ट्रगीत के साथ अत्यंत अनुशासित एवं ऊर्जावान वातावरण में हुआ।
वर्ग में नितिन जोशी, पदम् शर्मा, सुनील सुशील कुमार , अजय , सुषमा, अलका जी, शुभाशीष अमित शर्मा और बड़ी संख्या में प्रांत स्तर के अधिकारी कार्यकर्ता शामिल हुए

