
एक अनुशासित फौजी, ईमानदार प्रशासक का सफर हुआ पूरा
हरीश जोशी/पहाड़ का सच।
मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूड़ी का जीवन एक अनुशासित फौजी और दूरदर्शी राजनेता का बेहतरीन मिश्रण रहा है। भारतीय सेना में 36 वर्षों तक अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा के साथ राष्ट्र की सेवा करने के बाद, उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता के रूप में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री का पदभार संभाला। जनरल खंडूड़ी परलोक सिधार गए लेकिन देश व प्रदेश की राजनीति में अमिट छाप छोड़ गए जो हमेशा लोगों के जेहन में जिंदा रहेगी।
सराहनीय सैन्य कैरियर (1954 – 1990)सैनिक पृष्ठभूमि: 1 अक्टूबर 1934 को देहरादून में जन्मे खंडूड़ी ने 1954 में भारतीय सेना (कोर ऑफ इंजीनियर्स) में कमीशन प्राप्त किया।1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान उन्होंने 113 इंजीनियर रेजीमेंट का नेतृत्व किया था। सेना में उनके उत्कृष्ट योगदान और बेहतरीन प्रबंधन के लिए 1982 में उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति द्वारा ‘अति विशिष्ट सेवा मेडल’ (AVSM) से सम्मानित किया गया था।
1990 में सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के आग्रह पर भारतीय राजनीति में प्रवेश किया और पार्टी की सदस्यता ली। पहली बार 1991 में वे पौड़ी गढ़वाल से लोकसभा सांसद चुने गए।वाजपेयी सरकार (2000-2004) में उन्होंने केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभारी) के रूप में कार्य किया। इस दौरान उन्होंने ‘स्वर्णिम चतुर्भुज’ जैसी महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं को लागू करने में प्रमुख भूमिका निभाई।
उत्तराखंड में पहली बार 2007 में उन्हें मुख्यमंत्री बनाया गया। उन्होंने अपने सख्त, अनुशासित और पारदर्शी प्रशासनिक फैसलों से राज्य में विकास की नई नींव रखी। राज्य में भ्रष्टाचार की चुनौतियों के बीच पार्टी ने उन्हें वापस देहरादून बुलाकर 2011 में फिर से मुख्यमंत्री की कमान सौंपी। उनके दूसरे कार्यकाल को कड़े भ्रष्टाचार-रोधी और लोकायुक्त बिल लाने के लिए विशेष रूप से याद किया जाता है।
2014 के लोकसभा चुनाव में वे फिर से पौड़ी गढ़वाल से जीतकर संसद पहुंचे और उन्हें महत्वपूर्ण ‘रक्षा मामलों की संसदीय स्थायी समिति’ का अध्यक्ष बनाया गया। उन्होंने सेना के आधुनिकीकरण और संसाधनों की कमी पर संसद में बेबाकी से रिपोर्टें पेश कीं।उनकी बेटी ऋतु खंडूड़ी भूषण उत्तराखंड विधानसभा की पहली महिला स्पीकर बनीं, और उनके पुत्र मनीष खंडूरी ने भी राजनीति में प्रवेश किया। अपनी साफगोई, भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस और फौजी शैली की कार्यप्रणाली के कारण बी.सी. खंडूड़ी देश व प्रदेश की राजनीति में एक अमिट छाप छोड़ गए हैं।

