
ज्योतिष इंद्रमोहन डंडरियाल

🚩 *~ सनातन पंचांग ~* 🚩
🌤️ *दिनांक – 13 अप्रैल 2026*
🌤️ *दिन – सोमवार*
🌤️ *विक्रम संवत 2083 (गुजरात अनुसार 2082)*
🌤️ *शक संवत -1948*
🌤️ *अयन – उत्तरायण*
🌤️ *ऋतु – वसंत ॠतु*
⛅ *अमांत – 30 गते चैत्र मास प्रविष्टि*
⛅ *राष्ट्रीय तिथि – 23 चैत्र मास*
🌤️ *मास – वैशाख (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार चैत्र)*
🌤️ *पक्ष – कृष्ण*
🌤️ *तिथि – एकादशी 14 अप्रैल रात्रि 01:08 तक तत्पश्चात द्वादशी*
🌤️ *नक्षत्र – धनिष्ठा शाम 04:03 तक तत्पश्चात शतभिषा*
🌤️ *योग – शुभ शाम 05:17 तक तत्पश्चात शुक्ल*
🌤️*राहुकाल – सुबह 07:32 से सुबह 09:07 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 05:55*
🌤️ *सूर्यास्त – 06:42*
👉 *दिशाशूल – पूर्व दिशा मे*
🚩 *व्रत पर्व विवरण- वरूथिनी एकादशी,पंचक (आरंभ: प्रातः 03:44)*
💥 *विशेष – *हर एकादशी को श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख शांति बनी रहती है l राम रामेति रामेति । रमे रामे मनोरमे ।। सहस्त्र नाम त तुल्यं । राम नाम वरानने ।।*
💥 *आज एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से विष्णु सहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l*
💥 *एकादशी के दिन बाल नहीं कटवाने चाहिए।*
💥 *एकादशी को चावल व साबूदाना खाना वर्जित है | एकादशी को शिम्बी (सेम) ना खाएं अन्यथा पुत्र का नाश होता है।*
💥 *जो दोनों पक्षों की एकादशियों को आँवले के रस का प्रयोग कर स्नान करते हैं, उनके पाप नष्ट हो जाते हैं।*
🚩~*सनातन पंचांग*~🚩
🌷 *वरूथिनी एकादशी* 🌷
➡️ *13 अप्रैल 2026 सोमवार को वरूथिनी एकादशी है ।*
*वरूथिनी एकादशी (सौभाग्य, भोग, मोक्ष प्रदायक व्रत; १०,००० वर्षों की तपस्या के समान फल | माहात्म्य पढ़ने-सुनने से १००० गोदान का फल )*
🚩*~ सनातन पंचांग ~*🚩
🌷 *मेष-संक्रांति* 🌷
➡ *14 अप्रैल 2026 मंगलवार को मेष-संक्रांति (पुण्यकाल : सूर्योदय से दोपहर 01:52 तक)*
🙏🏻 *इसमें किया गया जप, ध्यान, दान व पुण्यकर्म अक्षय होता है ।*
🚩*~ सनातन पंचांग ~*🚩
🌷 *आईना टूटे ना रखे* 🌷
👉🏻 *इसे टूटे हुये कंचों में चेहरा देखना अपशकुन माना जाता है | घर में आईना टूट गया हो तो उसको निकाल देना चाहिये दूसरा लगा देना चाहिए |*
🚩*~ सनातन पंचाग ~*🚩
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