
– अगले 2-3 माह में केवल 6-7 चयनित लैंड पार्सल की बिडिंग की तैयारी, भ्रामक प्रचार में कई ऐसी जमीनें भी शामिल जिनका योजना से कोई संबंध नहीं
पहाड़ का सच देहरादून। कांग्रेस के भूमि बचाओ आंदोलन के बाद प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने UIIDB से संबंधित विषयों पर एक बार फिर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि एसेट मॉनेटाइजेशन और पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के माध्यम से विभिन्न आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए बोर्ड द्वारा किए जा रहे प्रयासों को लेकर पूर्व में भी तथ्यों के साथ जानकारी दी जा चुकी है।
इसके बावजूद बार-बार इस विषय को उठाकर कई तरह की भ्रामक धारणाएं बनाई जा रही हैं। इसलिए आवश्यक है कि प्रदेश की जनता के सामने वास्तविक स्थिति स्पष्ट रूप से रखी जाए।उन्होंने कहा कि किसी भी आर्थिक गतिविधि को धरातल पर उतारने के लिए भूमि एक अत्यंत महत्वपूर्ण संसाधन होती है। उद्योग, पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी, व्यावसायिक गतिविधियों और अन्य निवेश परियोजनाओं के विकास के लिए उपयुक्त भूमि की उपलब्धता आवश्यक है।

इसी दृष्टिकोण से राज्य की अर्थव्यवस्था को अगले स्तर पर ले जाने और प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को दोगुना करने की संभावनाओं पर पूर्व में एक विस्तृत एक्सरसाइज कराई गई थी। इस प्रक्रिया में यह विचार प्रमुखता से सामने आया कि राज्य की उपलब्ध सरकारी भूमि का योजनाबद्ध और उत्पादक उपयोग किया जाए, ताकि नई आर्थिक गतिविधियां विकसित हों, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा हों और सरकार को भी राजस्व की प्राप्ति हो।
प्रमुख सचिव ने स्पष्ट किया कि इस उद्देश्य से कुछ चुनिंदा लैंड पार्सल चिह्नित किए गए हैं। वर्तमान में इनकी संख्या बहुत सीमित है। इसके विपरीत जिस प्रकार से बड़े पैमाने पर सरकारी जमीनों को इस प्रक्रिया में शामिल किए जाने का प्रचार किया जा रहा है, वह वास्तविक तथ्यों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने बताया कि आगामी दो से तीन माह के भीतर लगभग 6-7 चयनित लैंड पार्सल की बिडिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। यह प्रक्रिया राज्य में निवेश आकर्षित करने और आर्थिक संभावनाओं को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि विशेष रूप से हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निवेश की अपार संभावनाएं हैं। उत्तराखंड पर्यटन की दृष्टि से देश और दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। यहां धार्मिक पर्यटन, प्राकृतिक पर्यटन, एडवेंचर टूरिज्म, वेलनेस टूरिज्म और अन्य पर्यटन गतिविधियों के विस्तार की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। ऐसे में यदि इस क्षेत्र में योजनाबद्ध तरीके से निवेश आकर्षित किया जाता है तो इसका सीधा लाभ प्रदेश के युवाओं, स्थानीय कारोबारियों, छोटे उद्यमियों और सेवा क्षेत्र से जुड़े लोगों को मिलेगा।
प्रमुख सचिव के अनुसार, प्रस्तावित हॉस्पिटैलिटी निवेश से लगभग 7,000 से 8,000 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है, जबकि इससे जुड़ी सहायक आर्थिक गतिविधियों के माध्यम से लगभग 10,000 से 15,000 लोगों के लिए अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त इन गतिविधियों के परिणामस्वरूप जीएसटी एवं अन्य माध्यमों से राज्य को प्रतिमाह लगभग 300 करोड़ रुपये के राजस्व की प्राप्ति की संभावना भी व्यक्त की गई है। .इस प्रकार यह पहल केवल भूमि के उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजगार, निवेश, स्थानीय व्यापार और राज्य की राजस्व क्षमता को बढ़ाने की एक व्यापक आर्थिक रणनीति का हिस्सा है।
भ्रामक प्रचार में शामिल जमीनों का वास्तविक प्रस्तावों से नहीं है संबंध
प्रमुख सचिव सुंदरम ने विभिन्न स्थानों की भूमि को लेकर किए जा रहे प्रचार पर भी विस्तार से स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि कई ऐसी जमीनों का उल्लेख किया जा रहा है, जिन्हें वर्तमान योजना का हिस्सा बताकर भ्रम पैदा किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है।
उन्होंने चौबटिया के लैंड पार्सल का उदाहरण देते हुए बताया कि इस भूमि की व्यवहार्यता (Viability) का परीक्षण किया गया था, लेकिन उपयुक्त संभावनाएं नहीं मिलने के कारण इसे स्वयं ही प्रस्ताव से हटा दिया गया था। इसी प्रकार धनोल्टी की भूमि के संबंध में परीक्षण के दौरान यह सामने आया कि संबंधित भूमि वन भूमि है। इस कारण उसे भी प्रस्ताव से ड्रॉप कर दिया गया था। इसके बावजूद इन दोनों स्थानों का उल्लेख इस प्रकार किया जा रहा है, मानो इन्हें वर्तमान योजना के अंतर्गत निवेश के लिए प्रस्तावित किया गया हो।
उन्होंने HMT की भूमि के संबंध में स्पष्ट किया कि यह भूमि SIDCUL के पास है और SIDCUL अपनी योजनाओं के अनुसार इस पर कार्य कर रहा है। इसका UIIDB की वर्तमान प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं है। इसी प्रकार ऋषिकेश स्थित IDPL की भूमि के बारे में भी उन्होंने स्पष्ट किया कि यह वन भूमि है और अभी तक राज्य सरकार के किसी विभाग को हस्तांतरित भी नहीं हुई है। ऐसे में इस भूमि को UIIDB की प्रस्तावित प्रक्रिया से जोड़कर प्रस्तुत करना तथ्यों के विपरीत है।
प्रमुख सचिव ने विभिन्न PWD रेस्ट हाउसों को लेकर की जा रही चर्चाओं पर भी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि इनमें से कई परिसंपत्तियों के संबंध में न तो कभी मंत्रिमंडल की स्वीकृति प्राप्त हुई है और न ही UIIDB बोर्ड की ओर से कोई अनुमोदन दिया गया है। इसके बावजूद इन्हें प्रस्तावित योजनाओं का हिस्सा बताकर प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की काल्पनिक जानकारियों को वास्तविक प्रस्तावों के साथ जोड़ना उचित नहीं है। किसी भी भूमि अथवा परिसंपत्ति के संबंध में निर्णय निर्धारित प्रक्रिया और सक्षम स्तर पर अनुमोदन के बाद ही आगे बढ़ता है।


