
– सोनिया आनंद के जमीन विवाद से जुड़ा पूर्व मंत्री डा.हरक सिंह रावत का नाम
– धर्मपत्नी दीप्ति रावत की सालों के बाद खामोशी टूटी, मोर्चा खोला
– अंकिता भंडारी हत्याकांड पर बैकफुट पर गई भाजपा हुई हमलावर
पहाड़ का सच ब्यूरो देहरादून। उत्तराखंड के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत की राजनीति पर सोनिया आनंद रावत (जसबीर कौर आनंद) से जुड़े जमीन विवाद और उनकी पत्नी दीप्ति रावत के बयानों/वीडियो के सामने आने के बाद बड़ा असर पड़ने की आशंका है। लगभग दो दिन पहले सामने आया यह मामला केवल एक कानूनी विवाद नहीं रह गया है, बल्कि इसने एक बड़े राजनीतिक और पारिवारिक संकट का रूप ले लिया है। 2003 में उपजे जेनी प्रकरण की तरह सोनिया आनंद प्रकरण से भी कहीं पूर्व मंत्री का दामन न झुलस जाए? चूंकि भाजपा ने “आग” को हवा देनी शुरू कर दी है।

देहरादून के एक दिव्यांग बुजुर्ग हरिओम सहगल ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2021 में हरक सिंह रावत की कथित पत्नी बताई जा रही सोनिया आनंद ने उनसे 56 लाख रुपये में एक भवन का सौदा किया था (जिसकी बाजार कीमत 2 करोड़ से अधिक थी), लेकिन चेक बाउंस होने के कारण उन्हें पूरी रकम का भुगतान नहीं किया गया। पीड़ित बुजुर्ग द्वारा न्याय की गुहार लगाने और उनके दिव्यांग होने के कारण यह मामला जनता के बीच काफी संवेदनशील बन गया है।
इस जमीन विवाद के बीच हरक सिंह रावत की पत्नी दीप्ति रावत का एक वीडियो और बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने सोनिया आनंद रावत को हरक सिंह रावत की पत्नी बताए जाने पर कड़े सवाल खड़े किए हैं और कोर्ट जाने तक की चेतावनी दी है।
राजनीतिक गलियारों में इस पारिवारिक कलह के सार्वजनिक होने से हरक सिंह रावत की व्यक्तिगत साख कमजोर हुई है। उत्तराखंड जैसे पारंपरिक समाज वाले राज्य में नेताओं के पारिवारिक विवादों को जनता बहुत सहजता से स्वीकार नहीं करती, जिससे उनकी राजनीतिक स्वीकार्यता पर असर पड़ सकता है।
उत्तराखंड में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं और पार्टी के भीतर टिकट वितरण को लेकर पहले से ही खींचतान चल रही है। हाल ही में हरक सिंह रावत ने कांग्रेस के पुराने चेहरों को लेकर “फ्यूज कारतूस” वाला बयान दिया था, जिस पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने तीखा पलटवार किया था.इस नए विवाद के बाद कांग्रेस आलाकमान और प्रादेशिक संगठन के भीतर हरक सिंह रावत बैकफुट पर आ गए हैं।
उन पर लगे इन आरोपों के कारण पार्टी उनके समर्थकों या उनके परिवार (जैसे अनुकृति गुसाईं) को भाजपा या कांग्रेस आगामी चुनावों में टिकट देने से कतरा सकती है. विवादित छवि के नेताओं को चुनाव में आगे करने से पार्टी को नुकसान होने का डर रहेगा।
इस घटनाक्रम के सामने आते ही विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। भाजपा नेताओं ने सार्वजनिक रूप से इस जमीन विवाद और पारिवारिक संकट पर हरक सिंह रावत से जवाब मांगा है। भाजपा इस मुद्दे को भुनाकर कांग्रेस को “भू-माफियाओं को संरक्षण देने वाली पार्टी” के रूप में चित्रित करने की कोशिश कर रही है, जिससे हरक सिंह रावत अपनी ही पार्टी में अलग-थलग पड़ सकते हैं।
हरक सिंह रावत पर केवल यही एक मुसीबत नहीं है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पहले ही उनके परिवार और करीबियों द्वारा नियंत्रित एक ट्रस्ट की देहरादून स्थित लगभग 101 बीघा जमीन (जिसका वर्तमान बाजार मूल्य 70 करोड़ रुपये से अधिक है) को अटैच कर रखा है। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में अवैध पेड़ कटाई मामले में भी उनसे पूछताछ हो चुकी है। अब देहरादून पुलिस द्वारा इस नए जमीन विवाद की जांच एसपी सिटी को सौंपे जाने के बाद यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो कानूनी कार्रवाई तय है। कानूनी रूप से घिरने के बाद किसी भी नेता के लिए सक्रिय राजनीति कर पाना बेहद मुश्किल हो जाता है।
डॉ. हरक सिंह रावत इस समय चौतरफा राजनीतिक और कानूनी संकट में घिरे हैं। एक तरफ जहां पुलिस और ED जैसी एजेंसियां उन पर शिकंजा कस रही हैं, वहीं दूसरी तरफ पारिवारिक विवाद के सार्वजनिक होने और कांग्रेस के भीतर विरोधी गुटों के सक्रिय होने से आगामी 2027 के चुनावों में उनका राजनीतिक वजूद और प्रभाव काफी हद तक कमजोर हो सकता है। यदि पुलिस जांच में सोनिया आनंद के खिलाफ आरोप सिद्ध होते हैं, तो हरक सिंह रावत के लिए अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बचाए रखना एक बेहद कठिन चुनौती होगी।

दीप्ति रावत की कानूनी चेतावनी का आधार
हरक सिंह रावत की पहली पत्नी और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष दीप्ति रावत ने इस मामले में खुलकर मोर्चा संभाला है. भारतीय कानून (विशेषकर हिंदू विवाह अधिनियम, 1955) के तहत उनके पास निम्नलिखित मुख्य विधिक आधार हैं:
• द्विविवाह (Bigamy) के खिलाफ अधिकार: हिंदू कानून के तहत, पहली पत्नी के जीवित रहते और बिना कानूनी तलाक (Divorce) के दूसरा विवाह पूरी तरह अवैध है। यदि कोई अन्य महिला किसी आधिकारिक या कानूनी दस्तावेज में हरक सिंह रावत की पत्नी (w/o) होने का दावा करती है, तो दीप्ति रावत इसे अपने वैवाहिक अधिकारों का हनन मानकर अदालत में चुनौती दे सकती हैं।
•. मानहानि (Defamation) और पहचान की चोरी: दीप्ति रावत का तर्क है कि उनके सम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई जा रही है. यदि किसी ने फर्जी दस्तावेज या पहचान का उपयोग कर खुद को डॉ. रावत की पत्नी दर्शाया है, तो वह अदालत से उस महिला के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और दस्तावेजों को निरस्त करने की मांग कर सकती हैं।
• पारिवारिक संपत्ति पर अधिकार: उत्तराखंड की राजनीति और कानून के जानकारों के अनुसार, यदि कोई अन्य महिला आधिकारिक रूप से पत्नी का दर्जा हासिल करने का प्रयास करती है, तो भविष्य में संपत्ति के उत्तराधिकार को लेकर कानूनी विवाद खड़ा हो सकता है।
विवादित जमीन का मूल्य: सर्किल रेट बनाम मार्केट रेट
• प्राइम लोकेशन का प्रभाव: कंडोली देहरादून के सबसे महंगे और पॉश रिहायशी इलाकों में से एक माना जाता है. यह क्षेत्र राजपुर रोड की मुख्य बेल्ट के नजदीक होने के कारण संपत्ति निवेशकों की पहली पसंद है.इस क्षेत्र में सरकारी सर्किल रेट वर्तमान में लगभग ₹35,000 से ₹45,000 प्रति वर्ग मीटर (संपत्ति की श्रेणी के आधार पर) के बीच है. वर्ष 2021 में जब यह सौदा ₹56 लाख में तय हुआ था, तब सरकारी मूल्यांकन के आधार पर यह राशि तय की गई थी.
वर्तमान समय में इस क्षेत्र का वास्तविक बाजार मूल्य (मार्केट रेट) सर्किल रेट से लगभग 2 से 3 गुना अधिक है। जानकार बताते हैं कि आज की तारीख में उस विवादित प्राइम प्रॉपर्टी की कीमत करोड़ों रुपये में आंकी जा रही है। यही कारण है कि इस भूमि विवाद ने इतना बड़ा वित्तीय और राजनीतिक मोड़ ले लिया है। .सोनिया आनंद ने सहगल द्वारा उसके ऊपर लगाए गए आरोप को ब्लैकमेलिंग का हथकंडा बताया है. उसका दावा है कि उसने ₹56 लाख की पूरी रकम का भुगतान सहगल और उनकी पत्नी को कानूनी रूप से किया है, जिसके पुख्ता दस्तावेज और पेमेंट स्लिप उसके पास मौजूद हैं। इसके अलावा उसने सहगल पर बकाया करीब ₹7 लाख के पुराने बिजली/पानी व अन्य देयों को भी अपनी तरफ से चुकता करने का दावा किया है।
इस प्रकार, यह मामला अब पूरी तरह कागजी सबूतों की फॉरेंसिक और प्रशासनिक जांच पर टिक गया है, जिसमें पुलिस यह साफ करेगी कि क्या वाकई इन सरकारी व वित्तीय दस्तावेजों में सोनिया आनंद को हरक सिंह रावत की पत्नी के रूप में प्रमाणित किया गया है या नहीं।
हरिओम सहगल द्वारा देहरादून पुलिस के समक्ष सौंपे गए शिकायती पत्र और साक्ष्यों में जसबीर कौर आनंद उर्फ सोनिया आनंद रावत को पूर्व मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत की पत्नी (w/o) के रूप में दर्शाने के लिए मुख्य रूप से तीन प्रमुख कागजी प्रमाणों और दस्तावेजों का विवरण दिया गया है।
सहगल का दावा है कि वर्ष 2021 में जब भवन का सौदा ₹56 लाख में तय हुआ, तो उस दौरान तैयार किए गए आधिकारिक दस्तावेजों और रजिस्ट्री डीड में बाकायदा इस नाम (सोनिया आनंद रावत) और डॉ. हरक सिंह रावत की पत्नी (w/o) होने के उल्लेख या संदर्भों का सहारा लिया गया था. पीड़ित के अनुसार, इसी आधार पर उन्होंने रसूखदार परिवार समझ कर भरोसा करके सौदा किया था।
पीड़ित हरिओम सहगल का सबसे बड़ा तकनीकी दावा एक मेडिकल सर्टिफिकेट को लेकर है। उसका आरोप है कि कानूनी और अदालती झंझटों/सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होने से बचने के लिए पूर्व में एक चिकित्सा प्रमाणपत्र तैयार करवाया गया था. इस सरकारी/आधिकारिक मेडिकल दस्तावेज पर बकायदा नाम ‘जसबीर रावत’ और रिश्ते में डॉ. हरक सिंह रावत की पत्नी (w/o) दर्ज था।
सहगल के अनुसार, बाद में माननीय अदालत ने इस प्रमाणपत्र को निरस्त कर दिया था, लेकिन यह ऑन-रिकॉर्ड एक बड़ा प्रमाण है. शिकायतकर्ता ने पुलिस को तीन विशिष्ट बैंक खातों की जानकारी सौंपी है, जिनके माध्यम से कथित तौर पर वित्तीय लेनदेन किया जा रहा था. सहगल का आरोप है कि ये खाते अलग-अलग उपनामों (आनंद और रावत) के संयोजन से संचालित किए जा रहे हैं।
सहगल ने पुलिस से इन खातों के केवाईसी दस्तावेजों (जैसे पैन कार्ड, आधार कार्ड या बैंक ओपनिंग फॉर्म) की जांच करने की मांग की है, क्योंकि उनका दावा है कि इनमें वैवाहिक स्थिति और पते के रूप में पूर्व मंत्री का नाम व आवास जुड़ा हुआ है।
देहरादून के एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल ने पीड़ित हरिओम सहगल की दिव्यांगता (दोनों हाथ न होना) और मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रकरण की जांच एसपी सिटी को ट्रांसफर की है। एसएसपी ने सार्वजनिक रूप से मीडिया को बताया है कि तथ्यों और दस्तावेजों की जांच एक सप्ताह के भीतर कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


