
पहाड़ का सच अल्मोड़ा। विभिन्न संगठनों व राजनीतिक दलों ने विद्वान, इतिहासकार, शिक्षाविद् और जनांदोलनों के सक्रिय साथी डॉ. गिरिधर पंडित के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की है। वक्ताओं ने कहा कि उनका निधन उत्तराखंड के बौद्धिक, सामाजिक और राजनीतिक जीवन की अपूरणीय क्षति है।
उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के संयोजक पी.सी. तिवारी ने डॉ. पंडित के साथ अपने पुराने संबंधों को याद करते हुए कहा कि जब वे अल्मोड़ा कॉलेज में प्रवेश ले रहे थे, तब डॉ. पंडित यहां शोधार्थी और प्रखर छात्र नेता के रूप में सक्रिय थे। उन्होंने श्रीदेव सुमन, कामरेड नागेंद्र सकलानी और टिहरी रियासत के विरुद्ध जनसंघर्षों की कहानियों से युवाओं को परिचित कराया तथा उन्हें संघर्षों से जुड़े साहित्य को पढ़ने के लिए प्रेरित किया। यह उत्तराखंड संघर्ष वाहिनी के दौर की बात है, जब पहाड़ में सामाजिक-राजनीतिक बदलाव की चेतना मजबूत हो रही थी।
वन आंदोलन के दौरान नैनीताल जेल से पी.सी. तिवारी और बालम सिंह जनौटी की रिहाई के समय हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में दर्ज मुकदमे में डॉ. पंडित की गिरफ्तारी टिहरी से हुई थी। इस मुकदमे में शमशेर सिंह बिष्ट, जी. दीवान धपोला, नवीन बंजारा, जगदंबा प्रसाद जोशी, जगमोहन गुरुरानी और प्रकाश सहित कई आंदोलनकारी शामिल थे। बाद में स्वर्गीय हेमवती नंदन बहुगुणा की पहल पर राज्य सरकार ने मुकदमा वापस लिया। पी.सी. तिवारी ने कहा कि अल्मोड़ा से शुरू हुआ उनका आत्मीय संबंध जीवनभर बना रहा।
डॉ. पंडित ने टिहरी रियासत की निरंकुश राजशाही के विरुद्ध हुए ऐतिहासिक जनविद्रोह पर गहन और प्रामाणिक शोध किया, जिसका प्रकाशन वर्ष 2023 में हुआ। साम्यवादी विचारधारा से प्रेरित होकर वे 1969 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य बने और वन आंदोलन से लेकर उत्तराखंड राज्य आंदोलन तक सक्रिय रहे। शिक्षा के क्षेत्र में देवप्रयाग महाविद्यालय की स्थापना और उसके शुरुआती संचालन में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
पार्टी ने कहा कि डॉ. पंडित ने अपने शोध, लेखन और संघर्षशील जीवन से उत्तराखंड की जनपक्षधर वैचारिक परंपरा को समृद्ध किया। जीवन के अंतिम दिनों तक वे सांप्रदायिकता और सामाजिक अन्याय के विरुद्ध बेबाकी से लिखते रहे। उनका जाना एक विद्वान के साथ-साथ संघर्ष की उस परंपरा की बड़ी क्षति है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।
उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने शोकाकुल परिजनों और उनके सभी साथियों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।


