
पहाड़ का सच, देहरादून। फर्जी प्रमाण पत्र मामले में सरकारी जनाधार केंद्र भी कार्रवाई की जद में आ गया है। स्थिति यह है कि सरकारी केंद्र में तैनात कर्मचारियों को हटाने के आदेश भी हो चुके हैं और इस सरकारी केंद्र को बंद करने के भी आदेश जारी कर दिए गए हैं। कलेक्ट्रेट स्थित जन आधार केंद्र से भी फर्जी प्रमाण पत्र बनाए जाने की बात सामने आई थी, जिसके बाद इस केंद्र को फिलहाल बंद रखने का निर्णय लिया गया है।
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पुलिस की जांच के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रित होने के नाम पर फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कराए जाने का खुलासा हुआ था। इन प्रमाण पत्रों के आधार पर एमबीबीएस सीटों के आवंटन में लाभ लेने की बात सामने आई। जांच में देहरादून के जनाधार केंद्र से भी ऐसे प्रमाण पत्र जारी होने की जानकारी मिली, जिसके बाद केंद्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे थे।
एसआईटी इस पूरे प्रकरण की जांच कर रही है। एमबीबीएस पाठ्यक्रमों में कथित फर्जी दाखिलों से जुड़े मामलों की पड़ताल के साथ प्रमाण पत्रों की सत्यता भी जांच की जा रही है। फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर मेडिकल सीट हासिल करने का मामला सामने आने के बाद यह सवाल भी अहम हो गया है कि दस्तावेजों के सत्यापन और प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में चूक कहां हुई? यदि प्रमाण पत्र जारी करने के स्तर पर अनियमितता हुई है, तो उसकी जिम्मेदारी तय करना भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। वहीं, देहरादून डीएम ने जनाधार केंद्र बंद किए जाने की पुष्टि की है।


