
– दिल्ली में पार्टी नेताओं से मिलने के बाद पूर्व सीएम हरीश रावत ने दोबारा वेणुगोपाल से मिलने की जताई इच्छा
– रावत ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, कुछ ” ग्रे एरियाज” हैं, जिन पर वेणुगोपाल से बात करनी है
– पूर्व सीएम के इस पोस्ट के संकेत ! अभी सब कुछ दुरुस्त नहीं हुआ, खुद की भूमिका को लेकर रावत को संशय
पहाड़ का सच देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री व वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत का यह बयान कि वे एआईसीसी (AICC) के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल से दोबारा मिलेंगे क्योंकि अभी कुछ ‘ग्रे एरियाज’ बाकी हैं, राज्य में कांग्रेस की अंदरूनी सियासत में बेहद महत्वपूर्ण और गहरे राजनीतिक संकेत देता है।
यह बयान उनकी व्यक्तिगत ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ को लेकर दिल्ली आलाकमान द्वारा दिए गए कड़े निर्देशों और राज्य प्रभारी कुमारी सैलजा की आपत्तियों के ठीक बाद आया है। राजनीतिक विश्लेषकों और मौजूदा परिस्थितियों के अनुसार हरीश रावत ने आलाकमान के मना करने के बावजूद राज्य में अपनी व्यक्तिगत ‘जनसंवाद यात्रा’ जारी रखी। इसके बाद के.सी. वेणुगोपाल ने स्पष्ट चेतावनी दी कि कांग्रेस में किसी भी तरह के व्यक्तिगत अभियान को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और पार्टी सामूहिक नेतृत्व (मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी) के बैनर तले ही चुनाव लड़ेगी।
हरीश रावत द्वारा ‘ग्रे एरिया’ शब्द का इस्तेमाल यह दर्शाता है कि वे सामूहिक नेतृत्व के फॉर्मूले से पूरी पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। वे इस बात को लेकर संशय में हैं कि राज्य में उनकी वरिष्ठता, जन-आधार और उनके समर्थकों की भूमिका इस संयुक्त अभियान में कहां और कैसे फिट होगी।
सवाल यह उठता है कि जब कोई बड़ा नेता आलाकमान के साथ बैठक के बाद भी कहता है कि “कुछ बातें स्पष्ट होना बाकी हैं”, तो इसका सीधा मतलब यह निकाला जा रहा है कि हरीश रावत यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि आगामी उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण से लेकर सांगठनिक फैसलों तक उनकी भूमिका स्पष्ट की जाए। यानि वे केवल एक सामान्य प्रचारक की भूमिका में सीमित नहीं रहना चाहते।
उत्तराखंड कांग्रेस के कई स्थानीय नेताओं और प्रदेश प्रभारी ने आलाकमान से शिकायत की थी कि हरीश रावत की यह यात्रा पार्टी के आधिकारिक कार्यक्रमों के समानांतर एक अलग शक्ति प्रदर्शन है। हरीश रावत ने यद्यपि यह कहा है कि वे पार्टी अनुशासन का पालन करेंगे, लेकिन ‘ग्रे एरिया‘ का हवाला देकर वे दिल्ली के नेताओं को यह समझाना चाहते हैं कि जनसंपर्क करने का उनका अपना तरीका है, जिसे गुटबाजी या समानांतर संगठन नहीं माना जाना चाहिए।
हरीश रावत राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी हैं। सोशल मीडिया (फेसबुक) पर सार्वजनिक रूप से यह लिखना कि “वेणुगोपाल से फिर मिलना है क्योंकि कुछ ग्रे एरियाज रह गए हैं”, एक सोची-समझी प्रेशर पॉलिटिक्स का हिस्सा है। इसके जरिए वे अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को यह संदेश दे रहे हैं कि वे दिल्ली के सामने पूरी तरह झुके नहीं हैं और अपने अधिकारों व वजूद के लिए बातचीत का रास्ता खुला रखा है।
हाल ही में हरीश रावत के पूर्व करीबियों/स्टाफ पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई हुई थी, जिसे लेकर उन्होंने तीखे बयान दिए थे।
मुमकिन है कि एक ‘ग्रे एरिया’ यह भी हो कि संकट के इस समय में केंद्रीय नेतृत्व हरीश रावत के साथ कितनी मजबूती से खड़ा है। वे आलाकमान से स्पष्ट और सार्वजनिक रक्षात्मक रुख की अपेक्षा कर रहे होंगे।


