
पहाड़ का सच देहरादून। मानदेय बढ़ाने व पंचायती राज एक्ट के अनुसार 29 विभाग ग्राम पंचायतों को सौंपने की मांग को लेकर प्रदेश ग्राम पंचायत संगठन का पंचायती राज निदेशालय पर आ आंदोलन जारी है।दस सूत्री मांगों को लेकर आंदोलित ग्राम प्रधान संगठन का कहना है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाती तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

संगठन के प्रदेश अध्यक्ष योगिता रावत कैंतुरा व कार्यकारी अध्यक्ष प्रकाश महारा का हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन जिलाधिकारी पौड़ी के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा गया है। मांग पत्र में ग्राम प्रधान संगठन का कहना है कि संगठन ने पूर्व में आपको अपना 10 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा था। बड़े खेद और कष्ट के साथ अवगत कराना है कि प्रदेश प्रधान संगठन उत्तराखंड की दस सूत्रीय मांगों पर आज तिथि तक सरकार द्वारा कोई निर्णय नहीं लिया गया है जिससे प्रदेश के समस्त ग्राम प्रधानों में सरकार के प्रति रोष व्याप्त है।
संगठन ने अपनी मांगों का जिक्र करते हुए कहा है कि ग्राम प्रधानों को न्यूनतम 20 हजार रुपए प्रतिमाह मानदेय दिया जाय, तथा ग्राम पंचायत वार्ड सदस्यों को भी प्रति खुली बैठक में प्रतिभाग करने पर मानदेय का प्रावधान किया जाय।
मनरेगा/V-B-G RAM G योजना में श्रमिकों की उपस्थिति को पूर्ण रूप से ऑफलाइन किया जाय क्योंकि उत्तराखंड पर्वतीय राज्य है, यहां पर नेटवर्क केनेक्टविटी नहीं है. या अच्छी नहीं होने के कारण श्रमिकों की उपस्थिति आनलाइन लगाना संभव नहीं है। इसलिए श्रमिकों की उपस्थिति को ऑफलाइन किया जाय जिससे ग्रामीण रोजगार बढ़ेगा तथा पलायन भी रुकेगा
संगठन की मांग है कि अकुशल श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी प्रतिदिन 600 रुपए व कुशल मजदूरी प्रतिदिन 800 रुपए किया जाना न्यायोचित होगा। ग्राम पंचायतों के राज्यवित्त/केंद्रीय वित्त की धनराशि को जनसंख्या व भौगोलिक क्षेत्रफल के अनुसार बढ़ाया जाय जिससे ग्राम पंचायतों में तेजी से विकास कार्य हो सके।
जिला योजना मद में पास होने वाले विकास कार्यों के प्रस्ताव ग्राम पंचायतों की खुली बैठक में अनिवार्य रूप से पारित करवाया जाय एवम जिला योजना की बैठक में ग्राम प्रधान संगठन को भी नामित सदस्य के रूप में आमंत्रित किया जाय। इसके अलावा
पंचायतीराज एक्टर 29 विभागों को अतिशीघ्र ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित किया जाए।


