– पीसीओएस (वर्तमान में पीएमओएस) को लेकर विशेषज्ञों ने किया जागरूक
– 500 मेडिकल एवं विश्वविद्यालय छात्र-छात्राओं ने लिया हिस्सा
पहाड़ का सच देहरादून। पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी एक महत्वपूर्ण समस्या है, जिसका प्रभाव केवल प्रजनन स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। बदलती जीवनशैली, खान-पान, मोटापा, हार्मोनल असंतुलन, ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर जैसी स्थितियों से भी इसका गहरा संबंध है।
इस विषय को लेकर श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय, श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल, श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल एण्ड हैल्थ साइंसेज एवं पीसीओएस सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में पीसीओएस जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में करीब 500 मेडिकल एवं विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। पीसीओएस का नाम बदलकर अब वर्तमान में पीएमओएस हो गया है।

श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एण्ड हेल्थ साइंसेज के ऑडिटोरियम में आयोजित पीसीओएस पर जागरूकता कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि सविता कपूर, माननीय विधायक, कैंट विधानसभा, विशिष्ट अतिथि डॉ. रेखा श्रीवास्तव, अध्यक्ष, देहरादून ऑब्सटेट्रिक एवं गायनी सोसाइटी, गेस्ट ऑफ ऑनर डॉ. उत्कर्ष शर्मा, प्राचार्य, श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एण्ड हेल्थ साइंसेज तथा कार्यक्रम की कोऑर्डिनेटर एवं स्थानीय कन्वीनर डॉ. आकृति गुप्ता, वरिष्ठ आईवीएफ विशेषज्ञ ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
मुख्य अतिथि सविता कपूर, विधायक कैंट विधानसभा ने कहा कि मेडिकल छात्र-छात्राओं के लिए पीसीओएस जैसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य विषय की वैज्ञानिक जानकारी हासिल करना बेहद जरूरी है। भविष्य में यही छात्र स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से समाज का मार्गदर्शन करेंगे। पीसीओएस के प्रति जागरूकता बढ़ाकर महिलाओं को समय रहते उचित सलाह, उपचार और जीवनशैली में आवश्यक बदलाव के लिए प्रेरित किया जा सकता है।
विशिष्ट अतिथि डॉ. रेखा श्रीवास्तव ने पीसीओएस के वैज्ञानिक एवं चिकित्सकीय पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। .उन्होंने कहा कि पीसीओएस को केवल महिलाओं की प्रजनन संबंधी समस्या के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह एक जटिल हार्मोनल एवं मेटाबॉलिक स्थिति है, जिसके प्रभाव को समझना और समय रहते इसका प्रबंधन करना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को पीसीओएस की पहचान, इसके कारणों तथा आधुनिक चिकित्सा दृष्टिकोण की जानकारी दी।
गेस्ट ऑफ ऑनर एवं प्राचार्य डॉ. उत्कर्ष शर्मा ने कहा कि पीसीओएस एक ऐसा विषय है, जिस पर मेडिकल शिक्षा के साथ-साथ समाज में व्यापक जागरूकता की आवश्यकता है। .विद्यार्थियों को बीमारी के उपचार के साथ-साथ इसके सामाजिक, मानसिक एवं मेटाबॉलिक प्रभावों को भी समझना चाहिए। ऐसे जागरूकता कार्यक्रम चिकित्सा विद्यार्थियों के ज्ञान को व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम की कोऑर्डिनेटर एवं लोकल कन्वीनर डॉ. आकृति गुप्ता, वरिष्ठ आईवीएफ विशेषज्ञ ने कहा कि पीसीओएस को केवल महिलाओं के अंडाशय से जुड़ी समस्या मानना उचित नहीं है।
इसका संबंध लाइफस्टाइल, न्यूट्रिशन, मोटापा, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर तथा हृदय संबंधी स्वास्थ्य से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि सही जीवनशैली, संतुलित पोषण, चिकित्सकीय सलाह, आवश्यक दवाओं, नियमित व्यायाम एवं योग के माध्यम से इसके प्रभावों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि पीसीओएस की रोकथाम और प्रबंधन पर बचपन से ही ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि बालिकाओं के किशोरावस्था से युवावस्था तक पहुंचने के दौरान स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को समय रहते पहचाना और नियंत्रित किया जा सके।
पैनल डिस्कशन में डाॅ साहिल महाजन, डाॅ विनीता गुप्ता, डाॅ आरती शर्मा, डाॅ राधिका रतूड़ी, डाॅ अर्चना टण्डन, डाॅ कचंन जोशी, डाॅ संदीपनी, डाॅ नीति कुमारी, डाॅ सुरभी थपलियाल, डाॅ राजीव आजाद, डाॅ निहित खर्कवाल ने महत्वपूर्णं जानकारियां सांझा कीं। कार्यक्रम में इन सभी चिकित्सा विधाओं के विशेषज्ञों ने पीसीओएस के अलग-अलग पहलुओं पर अपने विचार रखे। एंडोक्राइनोलॉजी, पल्मोनरी मेडिसिन, रेडियोलॉजी, डायटीशियन एवं न्यूट्रिशन विशेषज्ञों ने पीसीओएस से जुड़े हार्मोनल, मेटाबॉलिक, पोषण एवं जीवनशैली संबंधी पहलुओं पर विद्यार्थियों को महत्वपूर्ण जानकारी दी।
कार्यक्रम का उद्देश्य मेडिकल एवं विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को पीसीओएस के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रदान करना तथा उन्हें इस स्वास्थ्य समस्या की पहचान, रोकथाम और प्रबंधन के प्रति जागरूक करना रहा। कार्यक्रम के अंत में डॉ. आकृति गुप्ता ने सभी अतिथियों, विशेषज्ञों, चिकित्सकों, फैकल्टी सदस्यों एवं प्रतिभागी छात्र-छात्राओं का आभार व्यक्त करते हुए वोट ऑफ थैंक्स दिया।

