वीपीडीओ परीक्षा धांधली: 32 लाख रुपये बेहिसाबी नकदी, 12 लग्जरी घड़ियां और 200 ग्राम से अधिक सोना जब्त
जांच प्रभावित न हो, हरीश रावत ने कांग्रेस के सभी पद छोड़े
पहाड़ का सच देहरादून। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) परीक्षा धांधली में पूर्व सीएम हरीश रावत के निजी सहायक (पीए) व पूर्व ओएसडी चंदन सिंह जीना के घर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बृहस्पतिवार को छापा मारा।ईडी ने घर से 32 लाख की बेहिसाब भारतीय मुद्रा, 200.5 ग्राम सोना (13 सोने के सिक्के व सात सोने की चेन), 12 लग्जरी कलाई घड़ियां बरामद हुई। इस घटनाक्रम के बाद पूर्व सीएम हरीश रावत ने यह कहकर कि जांच प्रभावित न हो, कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है।
छापे के दौरान जीना के घर से रोलेक्स, राडो, पियाजे, मोवाडो, टिसॉट और कैसियो एडिफाइस जैसे ब्रांड की घड़ियां बरामद हुई हैं। इसके अलावा 52.16 लाख रुपये जीना और उनके परिवार वालों के खातों में मिले, जिन्हें फ्रीज करा दिया गया है। इनकी कीमत 1.28 करोड़ आंकी गई है। जीना पूर्व सीएम हरीश रावत के 2014 से 217 तक ओएसडी भी रह चुके हैं। उनका मोबाइल फोरेंसिक जांच के लिए कब्जे में लिया है
यह है मामला
यूकेएसएसएसी की वीपीडीओ परीक्षा-2016 में थी। इसके बाद वर्ष 2023 में इस मामले को एसटीएफ को सौंप दिया गया। एसटीएफ ने पूर्व अध्यक्ष, सचिव और परीक्षा नियंत्रक को गिरफ्तार कर लिया था। इस प्राथमिकी और पुलिस जांच में आए तथ्यों के आधार पर ईडी ने भी मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की। इसके लिए ईडी ने बृहस्पतिवार को विशेष तलाशी अभियान चलाया। इसमें ईडी आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष आरबीएसस रावत, सचिव आरएस कन्याल, परीक्षा नियंत्रक आरएस पोखरिया व परीक्षा कराने वाली कंपनी के अफसरों के घर छापे मारे गए। यहां से मिली मनी ट्रेल के आधार पर ईडी की टीम पूर्व सीएम रावत के पीए चंदन सिंह जीना के रायपुर तपोवन रोड स्थित घर भी पहुंची। ईडी की जांच में आया, जीना ने भी परीक्षा धांधली में शामिल रहकर बड़ी रकम अपने प्रयोग में लगाई है।
ईडी के छापे के बाद हरीश रावत ने कांग्रेस के पद छोड़े
चूक हुई तो जनता से माफी, जांच एजेंसियां प्रमाण दें: हरीश रावत
दस साल बाद ईडी ने लिया एक्शन ! चुनावी साल में उठे सवाल
दस साल पुराने भर्ती घोटाले मामले में पूर्व सीएम हरीश रावत के तत्कालीन पीए के आवास से ईडी के छापे में नगदी व कीमती सोने व घड़ियां बरामद होने के बाद पूर्व सीएम हरीश रावत ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है।राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से घूम गया। इस मुद्दे पर पूर्व सीएम हरीश रावत ने 11 सितम्बर को सोशल मीडिया में बयान जारी किया।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने सहयोगी के पास भारी मात्रा में नकदी और ज्वैलरी मिलने की खबरों के बीच कांग्रेस के दो संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि उनकी वजह से पार्टी के भ्रष्टाचार विरोधी संघर्ष को कोई कमजोरी न पहुंचे, इसलिए यह निर्णय लिया है।
हरीश रावत ने कांग्रेस में अपने पदों से इस्तीफा दिया
सामने टीवी पर खबर आ रही है कि देहरादून में हरीश रावत के पीए के पास भारी मात्रा में कैश और ज्वैलरी आदि पकड़ी गई या पकड़ाई गई, इस तथ्य का खुलासा तो आने वाले समय में होगा और यह सत्य है कि श्री जीना मेरे ओएसडी रहे हैं और मैं जितने भी पदों पर रहा, चाहे पार्टी में रहा या सरकार में रहा, वह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालते रहे हैं। श्री जीना एक निहायती सज्जन, विनम्र और काम करने वाले व्यक्ति हैं। यदि ग्राम सेवकों की भर्ती में ओएमआर शीट के साथ छेड़छाड़ की और यदि इस तरीके की कोई भी गलती उन्होंने की है, उसके प्रमाण हैं तो उनके इस तथाकथित दुस्साहसिक कृत्य के लिए मैं लज्जित हूँ। परंतु मुझे इस आरोप पर बिल्कुल विश्वास नहीं है।
उत्तराखंड के चुनाव में भारी स्टेक्स हैं। मुझसे जब भी कोई व्यक्ति पूछता था कि चुनाव कब हो रहे हैं? तो मैं हंसी में उनसे कहता था कि भई चुनाव तब होंगे, जब सीबीआई मेरे दरवाजे पर दस्तक देने आएगी। यदि अभी नहीं आई है तो इसका अर्थ है कि चुनाव अगले वर्ष मार्च-अप्रैल में ही होंगे। लेकिन इस बार मेरे घर पर नहीं, मेरे एक सहयोगी के घर पर दस्तक देकर एक नरेटिव बनाने का प्रयास किया गया है। कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस कार्यकर्ता भ्रष्टाचार के खिलाफ लामबंद होकर लड़ रहे हैं। राहुल गांधी जी राष्ट्रीय स्तर पर ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षा प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं।
ऐसे समय में हरीश रावत के किसी भी कृत्य से यदि पार्टी के संघर्ष में कोई कमजोरी आती है, तो मैं ऐसा बिल्कुल नहीं चाहूँगा। इसलिए मैंने अभी अपने ईष्ट देवता का स्मरण करके एक बड़ा निर्णय लिया है कि मैं किसी सरकारी पद पर तो हूं नहीं, की उससे त्यागपत्र दूं! *हां मैं, उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी का सदस्य हूं और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस कार्यसमिति का स्थाई आमंत्रित सदस्य हूं और मैं बहुत विनम्रता पूर्वक इन दोनों पदों से हटना चाहूंगा,* क्योंकि पार्टी के संघर्ष में कोई कमजोरी मेरी वजह से नहीं आनी चाहिए।
रहा प्रश्न अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का? उसका गठन हमने राज्य के नौजवानों के भविष्य को दृष्टिगत रखते हुए किया। हमने पब्लिक सर्विस कमीशन को समय पर परीक्षाएँ लेने के लिए बाध्य किया, यहाँ तक कि दो बार शीर्ष पदों की भर्तियाँ हुईं, हमारे छोटे से कार्यकाल में। हमने भर्ती बोर्ड्स बनाए, मेडिकल भर्ती बोर्ड बनाया, शिक्षा भर्ती बोर्ड बनाया। यदि उस प्रक्रिया के दौरान नियुक्तियों में हमसे कोई एरर ऑफ़ जजमेंट हो गया है, तो मैं उसके लिए उत्तराखंड के लोगों से क्षमा प्रार्थी हूँ। मगर मैं विनम्रता पूर्वक अपना यह दावा दोहराना चाहता हूं कि हमारे 3 वर्ष के कार्यकाल में 42000 से ज्यादा सरकारी पदों पर भर्तियां हुई हैं।
हमने अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के चेयरमैन के पद पर जिस व्यक्ति को नियुक्त किया था, जिन्हें मैंने ही शिकायत मिलने के बाद हटाया या उनसे इस्तीफा माँगा, जो भी जिस रूप में भी कह लिया जाए।
उनकी नियुक्ति पिछले सेवा रिकॉर्ड के आधार पर की गई थी। वो जिस वर्ग से आते थे, मैं चाहता था कि सत्ता में उस वर्ग की भी हिस्सेदारी हो और उनकी नियुक्ति के विषय में मुझे सबसे प्रभावी सलाह तत्कालीन पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी ने दी थी। वो दो बार मेरे पास उनकी नियुक्ति के संदर्भ में मिलने आए थे। मेरी आज भी धारणा है कि खंडूरी जी भ्रष्टाचार के दमन के लिए हमेशा काम करते रहे। मैं इतना और बताते चलूँ कि कौन व्यक्ति कहाँ पर गलती कर दे, कोई नहीं जान सकता है।
क्या आरएसएस ने जाना होगा कि जिस व्यक्ति को उत्तराखंड के अपने पर्यावरण मंच का अध्यक्ष बना रहे हैं, वो व्यक्ति इस तरीके के भ्रष्ट कृत्य करेगा? और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष के रूप में कलंकित होगा!नियुक्तियों व परीक्षाओं में गड़बड़ी हमारी आने वाली पीढ़ी के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं और यदि मुझसे जाने-अंजाने में भी कोई ऐसा कृत्य हुआ है, जिससे हमारे राज्य के नौजवानों के भविष्य पर दुष्प्रभाव पड़ा है, तो उसके लिए मैं अपने को प्रताड़ना का पात्र मानता हूं और मैं राज्य के लोगों से इस चूक के लिए क्षमा चाहता हूं और मैं सार्वजनिक रूप से एक अपील भी करना चाहता हूं कि यदि किसी व्यक्ति को इस तरह की नियुक्तियों के मामले में हस्तक्षेप करने की मेरी संलिप्तता के कोई प्रमाण उनके पास हों तो वो उन प्रमाणों को सीबीआई, ईडी या राज्य पुलिस को जरूर उपलब्ध करवाएं।
क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति को जिसे बड़े दायित्व को संभालने का अवसर मिलता है तो उन्हें हमेशा इस तरीके के घृणित प्रलोभनों से बचना चाहिए और यदि मुझसे कोई ऐसी चूक हुई है तो पुनः दोहरा रहा हूं कि मैं अपने को दंड का पात्र समझता हूं और कानून को मुझे दंडित करना चाहिए।
चुनावी साल, दस साल बाद एक्शन पर भी उठे सवाल
इधऱ, दस साल बाद हुई ईडी की कार्रवाई को 2027 के विधानसभा चुनाव से जोड़कर भी देखा जा रहा है। यह भी सवाल उठ रहे हैं कि UKSSSC के तत्कालीन चेयरमैन व अन्य की गिरफ्तारी के बाद हरीश रावत के पीए चंदन सिंह जीना कैसे एसटीएफ और केंद्रीय जांच एजेंसियों की दृष्टि से बच गए। गिरफ्तार अहम लोगों ने जीना के बारे में तो बताया होगा।
यह भी सवाल उठ रहा है कि दस साल से भर्ती घोटाले से जुड़ी नगदी (32 लाख) क्या अभी तक सुरक्षित रखी गयी थी। इससे जांच एजेंसियों की सक्रियता पर भी सवाल उठता है।
बहरहाल, हरीश रावत ने ईडी की कार्रवाई के बाद स्वंय को कांग्रेस के दोनों पदों से हटने का फैसला कर गेंद ईडी व विपक्ष के पाले में डाल दी है। कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को भी मामले से जोड़कर देखा जा रहा है

