हरीश जोशी/पहाड़ का सच देहरादून।
भाजपा का दो दिवसीय हल्द्वानी का महामंथन केवल एक संगठनात्मक बैठक नहीं थी, बल्कि यह सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल स्थापितकरने, आंतरिक गुटबाजी को समाप्त करने और कांग्रेस को घेरने के लिए भाजपा का एक सुनियोजित चुनावी रोडमैप दिखाई देता है।

हल्द्वानी में आयोजित भाजपा की दो-दिवसीय विस्तारित राज्य कार्यसमिति बैठक का मुख्य मकसद 2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के लिए मजबूत जमीन तैयार करना रहा है। इस उच्च-स्तरीय बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट सहित करीब 597 प्रमुख पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया।
दो दिनों तक चले महामंथन में भाजपा का मुख्य फोकस 2027 के विधानसभा चुनावों में लगातार तीसरी बार राज्य में सरकार बनाना है। राष्ट्रीय नेतृत्व ने पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों में पार्टी की जीत सुनिश्चित कर “ट्रिपल-इंजन” सरकार (केंद्र, राज्य और स्थानीय निकाय) का लाभ उठाने की रणनीति बनाई है। इससे पहले भाजपा ने गढ़वाल मंडल में बड़ी संगठनात्मक बैठक की थी।

हल्द्वानी (कुमाऊं का प्रवेश द्वार) में इस महामंथन को आयोजित करने का सीधा राजनीतिक उद्देश्य कुमाऊं क्षेत्र के मतदाताओं, विशेषकर कांग्रेस के मजबूत गढ़ों में सेंध लगाना और क्षेत्रीय समीकरणों को साधना है। बैठक में पार्टी के जमीनी नेटवर्क को अभेद्य बनाने पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के अनुसार, हर एक विंग और टीम को सक्रिय कर बूथ स्तर की प्रबंधन प्रणाली को पूरी तरह से दुरुस्त करने का खाका तैयार किया गया है।
बैठक के दौरान एक विशेष ‘युवा संवाद कार्यक्रम’ आयोजित किया गया। भाजपा भविष्य के चुनावों को ध्यान में रखते हुए पहली बार वोट देने वाले युवाओं और ‘जेन-जी’ (Gen Z) को अपनी विकास नीतियों और राष्ट्रवादी विचारधारा से जोड़कर एक स्थायी वोट बैंक तैयार कर रही है। बैठक के समानांतर हल्द्वानी में पूर्व सैनिक सम्मेलन और उधमसिंह नगर/रुद्रपुर बेल्ट के लिए ‘पंजाबी गौरव सम्मेलन’ की रूपरेखा बनाई गई, ताकि सिख और सैन्य परिवारों के पारंपरिक मतों को एकजुट रखा जा सके।
भाजपा ने कांग्रेस पर ‘तुष्टिकरण’ और राज्य की डेमोग्राफी (जनसांख्यिकी) बदलने की कोशिशों को शह देने का आरोप लगाते हुए ‘वंदे मातरम’ और ‘विकसित उत्तराखंड’ को मुख्य राजनीतिक एजेंडा बनाया। हालिया हल्द्वानी शुद्धीकरण विवाद के बाद, जहां कांग्रेस दलित कार्ड खेल रही है, भाजपा ने इस बैठक के जरिए अपनी गरीब-कल्याणकारी योजनाओं को सीधे अनुसूचित जाति (SC) और पिछड़े वर्गों तक तेजी से पहुंचाने का निर्देश दिया है।

