एआई फॉर स्मार्ट पुलिसिंग पर आयोजित कार्यशाला में आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों और उत्तराखण्ड पुलिस का उच्चस्तरीय मंथन
पहाड़ का सच देहरादून। वर्तमान तकनीकी परिदृश्य में Artificial Intelligence की बढ़ती उपयोगिता एवं संभावनाओं को देखते हुए पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने कहा कि तकनीक व एआई के कोऑर्डिनेशन से स्मार्ट पुलिसिंग को नई दिशा मिलेगी। .डीजीपी दीपम सेठ की अध्यक्षता में स्मार्ट पुलिसिंग को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से बुधवार को सरदार पटेल भवन स्थित सभागार में *“AI for Smart Policing: From everyday Police Operations to Intelligent Surveillance and Cybersecurity”* विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। स्मार्ट पुलिसिंग में AI की संभावनाओं पर केंद्रित यह कार्यशाला पुलिस महानिरीक्षक, प्रशिक्षण अनंत शंकर ताकवाले के संयोजन में कराई गई।

*कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में IIT रुड़की के विशेषज्ञ प्रो. सौमित्र सतपथी, प्रो. सुदीप रॉय, प्रो. राघवेंद्र सिंह रोहित तथा अपर पुलिस अधीक्षक, अभिसूचना एवं सुरक्षा अंकुश मिश्रा द्वारा पुलिसिंग में तकनीक एवं AI के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डालते हुए “AI in Everyday Policing”, “From Crime Prevention to Smarter Decision Making”, “AI for Smart Policing” तथा “Emerging Cyber Security Challenges for Police” जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत प्रस्तुतिकरण देते हुए सार्थक चर्चा की गई।* .इस अवसर पर पुलिस अधिकारियों एवं IIT रुड़की के तकनीकी विशेषज्ञों के मध्य *साइबर सुरक्षा, इंटेलिजेंट सर्विलांस, अपराध विश्लेषण, डेटा आधारित पुलिसिंग, रिकॉर्ड प्रबंधन दैनिक पुलिस कार्यों में AI के संभावित उपयोग* आदि पर गहन विचार-विमर्श एवं मंथन हुआ।
चर्चा सत्र के दौरान *पुलिस अधिकारियों द्वारा पुलिसिंग के क्षेत्र में तकनीक के व्यावहारिक उपयोग से जुड़े अपने अनुभव, कार्यक्षेत्र की चुनौतियों, संभावनाओं एवं तकनीकी समाधानों को साझा किया गया। साथ ही, तकनीक के उपयोग के दौरान डेटा सुरक्षा, गोपनीयता, विश्वसनीयता एवं मानवीय विवेक जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।*

इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक ने कहा कि तकनीक और Artificial Intelligence आज पुलिसिंग को अधिक प्रभावी, त्वरित एवं डेटा आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि AI का उपयोग मानव विवेक का विकल्प नहीं, बल्कि पुलिस अधिकारियों की निर्णय क्षमता को और अधिक सशक्त बनाने वाले एक प्रभावी तकनीकी माध्यम के रूप में किया जाना चाहिए। साथ ही, डेटा सुरक्षा, गोपनीयता, विश्वसनीयता एवं जिम्मेदार AI के सिद्धांतों का विशेष ध्यान रखते हुए उत्तराखण्ड पुलिस को तकनीक-सक्षम एवं भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार पुलिस बल के रूप में विकसित किया जाएगा।
कार्यशाला में अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध एवं कानून व्यवस्था- वी. मुरूगेशन, अपर पुलिस महानिदेशक, प्रशासन- ए. पी. अंशुमान, पुलिस महानिरीक्षक/निदेशक यातायात- कृष्ण कुमार वी.के, पुलिस महानिरीक्षक, प्रशिक्षण- अनन्त शंकर ताकवाले, पुलिस महानिरीक्षक, कार्मिक- सुनील कुमार मीणा, पुलिस महानिरीक्षक, मुख्यालय/पी एंड एम- बरिन्दरजीत सिंह, पुलिस उप महानिरीक्षक सतर्कता- प्रह्लाद मीणा सहित पुलिस मुख्यालय एवं जनपद देहरादून स्थित विभिन्न इकाइयों के अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारीगण एवं अनुभाग अधिकारी/प्रभारी उपस्थित रहे।

