कहा, आजादी के मूल मंत्र का अपने व्यवहारिक जीवन में भी पालन करें

कार्मिकों की मेहनत से चार धाम यात्रा व कांवड़ मेला सकुशल सम्पन्न हुआ, सभी को निर्बाध बिजली मिली
एमडी ने कार्मिकों के भरोसे लिया भगीरथ संकल्प, दस हजार करोड़ की कंपनी को एक साल में पचास हज़ार करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य
पहाड़ का सच देहरादून। विक्टोरिया क्रास विजेता गबर सिंह ऊर्जा भवन के प्रांगण में 80वें स्वतंत्रता दिवस उत्साह पूर्वक मनाया गया। प्रबन्ध निदेशक पीसी ध्यानी ने ध्वजारोहण किया और सभी अधिकारियों / कर्मचारियों को शुभकामना एवं बधाई दी।

इस अवसर पर कार्मिकों को यूपीसीएल की विशिष्ट उपलब्धियों के बारे में अवगत कराते हुए उसका श्रेय यूपीसीएल के समी कार्मिकों को दिया। .उन्होंने चार धाम यात्रा मार्गों में विभिन्न जगहों में विषम परिस्थितिया खराब मौसम, अत्यधिक वर्षा तथा तेज आंधी तूफान से निर्बाध विद्युत आपूर्ति हेतु दिन-रात कार्य करते हुए अपना विशेष योगदान देने वाले अधिकारियो / कर्मचारियों का भी धन्यवाद किया।
प्रबन्ध निदेशक, यूपीसीएल द्वारा विद्युत दुर्घटना को रोकने हेतु फील्ड के अधिकारियों / कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिये तथा एडीबी परियोजना के अन्तर्गत भूमिगतिकरण के कार्यों को समस्त फील्ड अधिकारियों / कर्मचारियों को 15 नवम्बर, 2026 तक पूर्ण करने हेतु भी निर्देश दिये जिससे कि ए०डी०बी० से अनुदान प्राप्त हो सके। इसके अतिरिक्त स्मार्ट मीटर को लेकर सम्मानित उपभोक्ताओं को जागरूक करना और उसमें आ रही समस्याओं को त्वरित गति से निस्तारण करने के निर्देश दिये।
एमडी ने ही यूपीसीएल को अगले वित्तीय वर्ष तक 50,000 करोड़ की कम्पनी बनाने में सभी अधिकारियों / कर्मचारियों को मेहनत से कार्य करने हेतु प्रेरित किया गया।स्वतंत्रता दिवस के सुअवसर पर मुख्यालय में तैनात अधिकारियों / कर्मचारियों को उनकी विशिष्ट उपलब्धियों एवं उत्कृष्ट सेवा के लिये चयनित कार्मिकों को भी पुरूस्कार देकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर प्रबन्ध निदेशक एवं अन्य निदेशक (वितरण एवं परियोजना) एमआर आर्य, निदेशक (वित्त) कमल शर्मा, अधिशासी निदेशक (मासं) आर जे मलिक, अधिशासी निदेशक (तकनीकी) संजय कुमार टम्टा, मुख्य अभियन्ता / अधीक्षण अभियन्ताओं द्वारा भी अपना सहयोग प्रदान किया गया।
अन्त में कार्यक्रम का संचालन कर रहे प्रणय कपरवाण द्वारा सभी अतिथियों एवं उपस्थित अधिकारियो / कर्मचारियों का धन्यवाद ज्ञापित कर समारोह का समापान किया गया।
