
खेती व काश्तकारों की बेहतरी के किए इकोसिस्टम विकसित करें: मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन
जिलाधिकारियों को निर्देश, समस्यायों का निराकरण कर लक्ष्य निर्धारित करें
पहाड़ का सच देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने जिलाधिकारियों के मार्फत जिलों में सेब, कीवी व ड्रेगन फ्रूट की पैदावार के बारे में जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिए कि फलों की खेती व काश्तकारों के फायदे के लिए इको सिस्टम तैयार किया जाए। साथ ही समस्याओं का निराकरण कर पैदावार के लक्ष्य निर्धारित किए जाएं।

मंगलवार को सचिवालय में सेब, कीवी, ड्रैगन फ्रूट आदि से उत्पादन सम्बन्धित योजनाओं को लेकर जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम मुख्य सचिव ने फल उत्पादन की जानकारी हासिल की। मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को किसानों से फीडबैक लेते हुए उन्हें आ रही समस्याओं और सुझावों को साझा किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि यदि योजना में कहीं पर सुधार की आवश्यकता है तो जिलाधिकारी लिखित में अवगत करा सकते हैं, ताकि योजना को बेहतर तरीके से लागू किया जा सके।
उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी मिशन के निर्धारित पीरियड के लिए उत्पादन क्षेत्र एवं उत्पादकता बढ़ाये जाने के लक्ष्य निर्धारित कर सकते हैं, ताकि मिशन को फोकस्ड वे लागू किया जा सके। उन्होंने इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्रों के उपयोग को भी बढ़ाए जाने की बात कही।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के भीतर फलोत्पादन को बढ़ावा देने के लिए इकोसिस्टम विकसित करना होगा। उन्होंने कोल्ड स्टोरेज चेन, ट्रांसपोर्टेशन, रोपवे सुविधा एवं मार्केटिंग के साथ ही प्रोसेसिंग यूनिट्स के विकास पर फोकस किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने जिलाधिकारियों को ट्रांसपोर्टेशन, कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग यूनिट्स के प्रोजेक्ट्स भी शामिल किए जाने की बात कही।
मुख्य सचिव ने कहा कि सेब, कीवी, ड्रैगन फ्रूट के उत्पादन में क्लस्टर आधारित खेती पर फोकस किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सेब एवं कीवी की सघन खेती को बढ़ावा देने के लिए इनकी नई एवं गुणवत्तापूर्ण किस्मों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि किसानों से फीडबैक भी लिया जाए एवं उनके सुझावों को गंभीरता से लेते हुए शामिल करने के प्रयास किए जाएं। उन्होंने जनपद विशेष योजनाओं पर फोकस किए जाने की बात कही। कहा कि नए क्षेत्रों को जोड़ते हुए क्षेत्र विस्तार किया जाए। इसके लिए हाई डेंसिटी वैरायटी की अत्याधुनिक नर्सरियों को विकसित किया जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि पॉलीहाउस स्थापना के लिए प्रत्येक जनपद के लिए 3-3 वेंडर्स एंपैनल्ड किए गए हैं। किसानों को योजना का अधिक से अधिक लाभ देने के लिए उनको हैंड होल्डिंग करायी जाए। साथ ही कम उत्पादकता वाले पुराने क्षेत्रों को हाई डेंसिटी की नई फसलों से रिप्लेस किए जाए। नए विकसित क्षेत्रों को फलोत्पादन शुरू होने तक इंटरक्रॉप को भी शामिल किया जा सकता है ताकि किसानों को इससे नुकसान ना हो।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव शैलेश बगौली, एस. एन. पांडेय, राजेंद्र कुमार, आयुक्त गढ़वाल आनंद स्वरूप, आयुक्त कुमाऊं दीपक रावत एवं जनपदों से जिलाधिकारी सहित संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
जानिए: उत्तराखंड में सेब का कुल उत्पादन लगभग 57,753 मीट्रिक टन प्रति वर्ष है, जबकि ड्रैगन फ्रूट का सालाना उत्पादन लगभग 70 मीट्रिक टन है। पारंपरिक सेब के मुकाबले ड्रैगन फ्रूट यहा एक नई लेकिन तेजी से उभरती हुई फसल है, जिसकी खेती के लिए उधम सिंह नगर (विशेषकर तराई क्षेत्र), देहरादून और नैनीताल सबसे प्रमुख जिले हैं।
सेब उत्पादन:उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों ( उत्तरकाशी, नैनीताल, और देहरादून) में सेब की खेती की जाती है। राज्य में हर साल लगभग 57,753 मीट्रिक टन सेब का उत्पादन होता है। उत्तरकाशी ज़िला राज्य में सबसे बड़ा सेब उत्पादक केंद्र है। .राज्य में आधुनिक और उच्च-घनत्व (High-Density) वाले सेब के बगीचों को बढ़ावा देने के लिए ‘UTPADAC’ (उत्तराखंड प्रोग्राम फॉर एडवांस्ड डेवलपमेंट ऑफ एप्पल कल्टीवेशन) लागू की गई है। ड्रैगन फ्रूट की खेती अभी राज्य में अपने शुरुआती चरण में है, लेकिन इसकी गुणवत्ता और पौष्टिकता (अन्य राज्यों की तुलना में) बहुत अच्छी मानी जाती है।
राज्य में ड्रैगन फ्रूट का वार्षिक उत्पादन लगभग 70 मीट्रिक टन है। मुख्य रूप से तराई बेल्ट जैसे बाजपुर (उधम सिंह नगर) में बड़े पैमाने (लगभग 25 हेक्टेयर) पर इसकी खेती हो रही है। इसके अलावा देहरादून, नैनीताल और पौड़ी में भी इसके सफल परिणाम सामने आए हैं। ड्रैगन फ्रूट की खेती को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखंड सरकार ड्रैगन फ्रूट मिशन के तहत किसानों को 80 प्रतिशत तक की भारी सब्सिडी दे रही है। इसके अंतर्गत प्रति एकड़ ₹8 लाख की लागत पर ₹6.4 लाख की आर्थिक सहायता सरकार द्वारा सीधे प्रदान की जाती है।
राज्य के पहाड़ी और समशीतोष्ण जलवायु वाले लगभग सभी जिलों में कीवी का उत्पादन हो रहा है। कीवी की खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने 11 जिलों में ‘कीवी मिशन’ (Kiwi Mission) भी चलाया हुआ है। बागेश्वर की उत्तराखंड में कीवी उत्पादन का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहाँ के शामा, लीटी और पानियाली जैसे गांवों में बड़े पैमाने पर कीवी की खेती हो रही है। चमोली के नैल-नौली, मंडल और बैरागना जैसे क्षेत्रों में किसान बड़े स्तर पर कीवी का उत्पादन कर रहे हैं।
पिथौरागढ़ जिले के विभिन्न हिस्सों (विशेषकर मुनस्यारी और आसपास के क्षेत्रों) में किसान कीवी की खेती से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।उत्तरकाशी और टिहरी के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी कीवी की व्यावसायिक खेती तेजी से बढ़ रही है। .इसके अलावा रुद्रप्रयाग, अल्मोड़ा, पौड़ी गढ़वाल, नैनीताल, देहरादून, और चंपावत के पहाड़ी इलाकों में भी किसान कीवी का अच्छा उत्पादन कर रहे हैं।

