
देहरादून। आर्केडिया ग्रांट के बड़ोवाला में जय बद्री विशाल समिति द्वारा आयोजित श्रीमद भागवत कथा के पांचवे दिवस की कथा में आचार्य पंडित मोहन सेमवाल द्वारा राजा बलि की कथा का बड़ा ही सुंदर वर्णन किया गया।

राजा बलि भक्त प्रह्लाद के पौत्र और विरोचन के पुत्र थे। वे एक बहुत ही दानवीर, न्यायप्रिय और पराक्रमी असुर राजा थे। उन्होंने अपने बल से तीनों लोकों (पृथ्वी, स्वर्ग और पाताल) पर अधिकार कर लिया था। उनके राज में प्रजा बहुत खुश थी, लेकिन देवताओं का राज्य छिन गया था।
देवताओं ने भगवान विष्णु से मदद मांगी। तब भगवान विष्णु ने अदिति के गर्भ से वामन (एक छोटे ब्राह्मण बालक) रूप में अवतार लिया। राजा बलि नर्मदा नदी के तट पर अश्वमेध यज्ञ कर रहे थे। वहां वामन देव पहुंचे और उनसे दान में केवल तीन पग (कदम) भूमि मांगी। बलि के गुरु शुक्राचार्य ने पहचान लिया कि वह वामन रूप में भगवान विष्णु हैं और उन्होंने बलि को दान देने से मना किया। बलि ने कहा कि यदि भगवान स्वयं मांगने आए हैं, तो पीछे कैसे हटें। उन्होंने तीन पग जमीन देने का वचन दे दिया। वामन देव ने अपना आकार बहुत बड़ा कर लिया। पहले पग में उन्होंने पृथ्वी और पाताल लोक नाप लिया। दूसरे पग में उन्होंने स्वर्ग लोक भी नाप लिया। जब तीसरा पग रखने के लिए कोई जगह नहीं बची, तो राजा बलि ने अपना अहंकार छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि प्रभु, तीसरा पग मेरे सिर पर रख दीजिए। बलि की इस महान दानशीलता और भक्ति को देखकर भगवान विष्णु बहुत खुश हुए। उन्होंने बलि को पाताल लोक का राजा बना दिया।

क्षेत्र के विधायक सहदेव पुंडीर ने धार्मिक आयोजन के लिए समिति का जताया आभार
वहीं कथा श्रवण करने पहुंचे क्षेत्र विधायक सहदेव पुंडीर का समिति के आयोजकों द्वारा राम नाम का पटका पहनाकर स्वागत किया गया। विधायक ने कहा कि क्षेत्र में इस तरह के आयोजन समय – समय पर होने चाहिए। इन आयोजनों से हमारी आने वाली पीढ़ी को अच्छे संस्कार मिल सकते हैं। उन्होंने इस आयोजन के लिए समिति को बधाई दी और आचार्य का आभार व्यक्त किया।
समिति की अध्यक्ष बीना रतूड़ी ने किया श्रोताओं का किया आभार व्यक्त
समिति की अध्यक्ष बीना रतूड़ी ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन से उनको आत्मिक सुख, शांति और शक्ति मिलती है। इस अवसर पर उन्होंने समिति के सभी सदस्यों और बड़ी मात्रा में कथा सुनने आये भक्तजनों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर समिति के संरक्षक भुवन चंद्र ध्यानी, श्रीमती शशि डंडरियाल, उपाध्यक्ष रमेश चमोली, कोषाध्यक्ष बबीता मधवाल, सचिव संगीता मिश्रा, मीडिया प्रभारी आचार्य कृष्णा पंत, सांस्कृतिक सचिव अनीता पोखरियाल, कार्यकारी सदस्य प्रेमा राणा, बिशना नेगी, शशि पंत, सुषमा डंडरियाल, लीला रावत इत्यादि शामिल रहे।

