
पौड़ी। जनपद के कोट विकासखंड की सितोनस्यूं पट्टी के ऐराड़ी गांव में 112 नाली (करीब 5.5 एकड़) भूमि खरीद के विवाद ने अब प्रशासनिक जांच का रूप ले लिया है।
जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने पूरे प्रकरण की जांच के लिए एडीएम पौड़ी की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति गठित कर दी है। समिति भूमि खरीद, उसके प्रस्तावित उपयोग, विभिन्न विभागों से ली गई अनुमतियों और सोशल मीडिया पर हाउसिंग सोसायटी के प्रचार सहित सभी पहलुओं की जांच करेगी। जांच पूरी होने तक संबंधित भूमि पर किसी भी प्रकार के निर्माण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।
सामाजिक कार्यकर्ता रोहित भट्ट ने आरोप लगाया था कि कृषि भूमि खरीदकर हाउसिंग सोसायटी विकसित करने की तैयारी पहाड़ में भू-माफियाओं के नए तरीके का उदाहरण है। उनका कहना है कि नए भू-कानून में बाहरी व्यक्ति के लिए 250 वर्गमीटर से अधिक भूमि खरीद पर प्रतिबंध है, लेकिन स्थानीय व्यक्ति को माध्यम बनाकर इस व्यवस्था का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि यहां बड़े स्तर पर आवासीय परियोजना बनी तो क्षेत्र में बाहरी लोगों की बसावट बढ़ेगी और स्थानीय डेमोग्राफी प्रभावित हो सकती है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान की मांग की।
वहीं दून हैचरीज लिमिटेड के निदेशक नरेंद्र सिंह ने सभी आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि कंपनी किसी प्रकार की हाउसिंग सोसायटी विकसित नहीं कर रही है। भूमि पर सेब का बगीचा तैयार किया जाएगा और भविष्य में होम-स्टे विकसित करने की योजना है। उनके अनुसार भूमि पूरी तरह कृषि उद्देश्य से खरीदी गई है और इसका कोई व्यावसायिक उपयोग नहीं किया जाएगा।
पता चला कि ऐराडी गाँव तक 163 मीटर लंबे और 20 फुट चौड़े मार्ग की अनुमति ग्रामीण राजिंद्र सिंह के नाम से ली गई थी, जिसमें 74 नाली भूमि दर्शाई गई थी और अन्य खातेदारों से सहमति भी ली गई थी। अब खनन विभाग भी इस बात की जांच करेगा कि मौके पर अनुमति के अनुरूप कटिंग का निर्माण हुआ या नहीं।
डीएफओ गढ़वाल महातिम यादव ने भी मौके का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि स्थल पर किसी भी पेड़ का अवैध पातन नहीं मिला है। विभाग के पास पेड़ों के पातन की अनुमति के लिए कोई आवेदन भी प्राप्त नहीं हुआ है। यदि भविष्य में वन अधिनियम का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

