
पहाड़ का सच देहरादून। कोटा से राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत करने के बाद शुक्रवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने देहरादून में आयोजित “छात्रों की गूंज” महारैली को संबोधित किया। उन्होंने युवाओं को संवाद के माध्यम से पेपर लीक माफिया के खिलाफ लड़ाई को और मजबूती से लड़ने का आह्वान किया।

राहुल गांधी ने कहा कि पेपर लीक का संकट अब एक राष्ट्रीय महामारी का रूप ले चुका है। अब तक 150 से अधिक पेपर लीक की घटनाओं ने 7.5 करोड़ छात्रों और उनके परिवारों को सीधे प्रभावित किया है, लेकिन अब तक एक भी दोषी को सज़ा नहीं मिली है। लाखों अभ्यर्थी भारी दबाव के बीच औसतन पांच वर्षों तक प्रतिदिन 10 घंटे पढ़ाई कर परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। इस तैयारी में न केवल अभ्यर्थियों, बल्कि उनके परिवारों को भी भारी आर्थिक बोझ और त्याग का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि अन्य अवसरों के दरवाजे उनके लिए बंद होते जा रहे हैं, इसलिए हर साल लगभग 9 करोड़ अभ्यर्थियों को केवल 6 लाख सरकारी नौकरियों के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
जब छात्र कड़ी मेहनत कर रहे होते हैं, उसी समय एक भ्रष्ट नेटवर्क “सिस्टम का मेन्यू कार्ड” चलाता है, जहां परीक्षाएं सबसे अधिक कीमत चुकाने वालों को भारी रकम लेकर बेची जाती हैं।

राहुल गांधी के साथ मंच पर वे छात्र भी मौजूद थे जिनकी परीक्षाएं पेपर लीक या रद्द होने के कारण प्रभावित हुईं और जिनकी वर्षों की मेहनत एक झटके में बर्बाद हो गई। रैली के सबसे भावुक क्षण में आत्महत्या करने वाली एक छात्रा रिया थापा के पिता ने अपना
दर्द साझा किया। उनकी पीड़ा ने याद दिलाया कि यह संकट केवल आंकड़ों का नहीं, बल्कि उन परिवारों का है जिनकी दुनिया हमेशा के लिए बिखर गई है।

राहुल गांधी ने युवाओं के सामने 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था के लिए अपना विजन रखा। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को इस तरह पुनर्गठित किया जाना चाहिए कि विद्यार्थियों के हित सर्वोपरि हों, आधुनिक और पारदर्शी व्यवस्था कायम हो।

