
पहाड़ का सच देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के जीवन और राजनीतिक संघर्ष पर आधारित डॉक्यूमेंट्री का शीर्षक ‘उत्तराखंडियत की ओर’ है, जिसका लोकार्पण देहरादून में किया गया है।

उत्तराखंडियत’ का संदेश: यह डॉक्यूमेंट्री केवल हरीश रावत की राजनीतिक जीवनी नहीं है, बल्कि उनकी विचारधारा ‘उत्तराखंडियत’ पर केंद्रित है। हरीश रावत लंबे समय से इस शब्द का इस्तेमाल पहाड़ की संस्कृति, लोकभाषा, खेती, पलायन, परंपरा और संवेदनाओं को दर्शाने के लिए करते रहे हैं।
संघर्ष और जन-सरोकार: डॉक्यूमेंट्री में उनके शुरुआती राजनीतिक सफर, जन-आंदोलनों और उनके जीवन के अहम पड़ावों को संरक्षित किया गया है। यह फिल्म पहाड़ की आस्था (गंगा), ग्रामीण अर्थव्यवस्था (गाय) और किसानों (गन्ना) को एक साथ जोड़कर देखने की उनकी सोच को उजागर करती है।
राजनीतिक यात्रा: हरीश रावत उत्तराखंड में कांग्रेस के सबसे पुराने और प्रमुख चेहरों में से एक हैं। डॉक्यूमेंट्री में 1971 में ब्लॉक प्रमुख बनने से लेकर पांच बार सांसद, केंद्रीय मंत्री (जल संसाधन, कृषि व श्रम मंत्रालय) और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बनने तक के उनके सफर को दर्शाया गया है।

*सियासी संघर्ष व उत्तराखंडियत की कहानी*
तमाम उतार चढ़ाव के बावजूद हरीश रावत सदैव रहे कर्मठ व जनप्रिय नेता
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के संघर्षपूर्ण राजनीतिक जीवन और उत्तराखंडियत को केंद्र में रखकर बनाई गई डॉक्यूमेंट्री का भव्य विमोचन स्थानीय होटल में आयोजित कार्यक्रम में किया गया।
कार्यक्रम में पूर्व राज्यपाल एवं पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, उत्तराखंड क्रांति दल के पूर्व अध्यक्ष काशी सिंह ऐरी, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल तथा संत हरिबोल चैतन्य महाराज ने संयुक्त रूप से डॉक्यूमेंट्री का विमोचन किया।
इस दौरान राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र की अनेक प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।डॉक्यूमेंट्री में हरीश रावत की ग्राम सभा स्तर की राजनीति से लेकर मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री बनने तक की पूरी राजनीतिक यात्रा को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया है।इसमें उनके शुरुआती संघर्ष, बेहद सीमित संसाधनों में ब्लॉक प्रमुख का चुनाव लड़ना, 1980 के दशक में भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी के खिलाफ चुनाव जीतकर संसद पहुंचना, तथा युवा कांग्रेस, सेवा दल और ट्रेड यूनियन आंदोलनों में उनकी सक्रिय भूमिका को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया है।
फिल्म में यह भी दिखाया गया है कि किस प्रकार इंदिरा गांधी और राजीव गांधी का स्नेह और विश्वास उन्हें मिला। 2013 की केदारनाथ आपदा के बाद चारधाम यात्रा को पुनः सुचारु कराने में उनकी भूमिका को भी विस्तार से दर्शाया गया है। डॉक्यूमेंट्री में यह प्रसंग भी शामिल है कि किस तरह उन्होंने राहुल गांधी के साथ पैदल केदारनाथ यात्रा की और आपदा के बाद प्रदेश में विश्वास बहाली का प्रयास किया।
साल 2016 के राजनीतिक घटनाक्रम और मुख्यमंत्री रहते हुए बगावत का सामना करने के बाद न्यायालय के आदेशों से पुनः सत्ता में वापसी की कहानी को भी डॉक्यूमेंट्री में प्रमुखता से स्थान दिया गया है। हवाई दुर्घटना में घायल होने के बाद एम्स में उपचार के दौरान भी उनके राजनीतिक दायित्वों के निर्वहन को भावनात्मक रूप से प्रस्तुत किया गया है।
कार्यक्रम में भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि वैचारिक मतभेदों के बावजूद हरीश रावत सदैव संघर्षशील, सक्रिय और जनभावनाओं से जुड़े नेता रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवा सांसद के रूप में हरीश रावत संसद में ‘जीरो आवर के हीरो’ के रूप में पहचाने जाते थे। कोश्यारी ने दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बावजूद बनी आत्मीयता और सद्भाव के कई संस्मरण साझा कर रावत की तारीफ की।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि हरीश रावत की जीवन यात्रा नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि उनके अनुभव, संघर्ष और उत्तराखंड के प्रति समर्पण का लाभ राज्य को मिलना चाहिए। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में हरीश रावत से हमेशा कुछ नया सीखा है जिससे आगे बढ़ने और चुनौतियों का सामना करने की प्रेरणा मिलती है।
इस अवसर पर विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल, पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा,विधायक मनोज तिवारी, ममता राकेश, पूर्व मंत्री सुरेंद्र नेगी, शूरवीर सजवाण, पूर्व मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र कुमार, अभिषेक भंडारी सहित सैकड़ों सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक क्षेत्र की हस्तियां और कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

