
ज्योतिष इंद्रमोहन डंडरियाल
*~ सनातन पंचांग ~* 🚩
🌤️ *दिनांक – 29 जुलाई 2026*
🌤️ *दिन – बुधवार*
🌤️ *विक्रम संवत 2083*
🌤️ *शक संवत -1948*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – वर्षा ॠतु*
🌦️ *अमांत – 14 गते श्रावण मास प्रविष्टि*
🌦️ *राष्ट्रीय तिथि – 7 श्रावण मास*
🌤️ *मास – आषाढ*
🌤️ *पक्ष – शुक्ल*
🌤️ *तिथि – पूर्णिमा रात्रि 08:05 तक तत्पश्चात प्रतिपदा*
🌤️ *नक्षत्र – उत्तराषाढ़ा शाम 03:37 तक तत्पश्चात श्रवण*
🌤️ *योग – प्रीति रात्रि 11:58 तक तत्पश्चात आयुष्मान*
🌤️*राहुकाल – दोपहर 12:23 से दोपहर 02:04 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 05:33*
🌤️ *सूर्यास्त – 07:13*
👉 *दिशाशूल – उत्तर दिशा मे*
🚩*व्रत पर्व विवरण- व्रत पूर्णिमा,आषाढ़ी पूर्णिमा,व्यास पूर्णिमा, गुरुपूर्णिमा, विद्यालाभ योग (प्रातः 04:30 से दोपहर 03:37 तक),संन्यासी चतुर्मास आरंभ*
💥*विशेष- पूर्णिमा एवं व्रत के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*
💥 *चतुर्मास के दिनों में ताँबे व काँसे के पात्रों का उपयोग न करके अन्य धातुओं के पात्रों का उपयोग करना चाहिए।(स्कन्द पुराण)*
💥 *चतुर्मास में पलाश के पत्तों की पत्तल पर भोजन करना पापनाशक है।*
🚩~*सनातन पंचांग* ~🚩
🌷 *गुरु पूजन* 🌷
🌷 *गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः |*
*गुरुर्साक्षात परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः ||*
*ध्यानमूलं गुरुर्मूर्ति पूजामूलं गुरोः पदम् |*
*मंत्रमूलं गुरोर्वाक्यं मोक्षमूलं गुरोः कृपा ||*
*अखंडमंडलाकारं व्याप्तं येन चराचरम् |*
*तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्री गुरवे नमः ||*
*त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बंधुश्च सखा त्वमेव |*
*त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव, त्वमेव सर्वं मम देव देव ||*
*ब्रह्मानंदं परम सुखदं केवलं ज्ञानमूर्तिं |*
*द्वन्द्वातीतं गगनसदृशं तत्त्वमस्यादिलक्षयम् ||*
*एकं नित्यं विमलं अचलं सर्वधीसाक्षीभूतम् |*
*भावातीतं त्रिगुणरहितं सदगुरुं तं नमामि ||*
🙏🏻 *ऐसे महिमावान श्री सदगुरुदेव के पावन चरणकमलों का षोड़शोपचार से पूजन करने से साधक-शिष्य का हृदय शीघ्र शुद्ध और उन्नत बन जाता है | मानसपूजा इस प्रकार कर सकते हैं |*
🙏🏻 *मन ही मन भावना करो कि हम गुरुदेव के श्री चरण धो रहे हैं … सर्वतीर्थों के जल से उनके पादारविन्द को स्नान करा रहे हैं | खूब आदर एवं कृतज्ञतापूर्वक उनके श्रीचरणों में दृष्टि रखकर … श्रीचरणों को प्यार करते हुए उनको नहला रहे हैं … उनके तेजोमय ललाट में शुद्ध चन्दन से तिलक कर रहे हैं … अक्षत चढ़ा रहे हैं … अपने हाथों से बनाई हुई गुलाब के सुन्दर फूलों की सुहावनी माला अर्पित करके अपने हाथ पवित्र कर रहे हैं … पाँच कर्मेन्द्रियों की, पाँच ज्ञानेन्द्रियों की एवं ग्यारहवें मन की चेष्टाएँ गुरुदेव के श्री चरणों में अर्पित कर रहे हैं …*
🌷 *कायेन वाचा मनसेन्द्रियैवा बुध्यात्मना वा प्रकृतेः स्वभावात् |*
*करोमि यद् यद् सकलं परस्मै नारायणायेति समर्पयामि ||*
🙏🏻 *शरीर से, वाणी से, मन से, इन्द्रियों से, बुद्धि से अथवा प्रकृति के स्वभाव से जो जो करते हैं वह सब समर्पित करते हैं | हमारे जो कुछ कर्म हैं, हे गुरुदेव, वे सब आपके श्री चरणों में समर्पित हैं … हमारा कर्त्तापन का भाव, हमारा भोक्तापन का भाव आपके श्रीचरणों में समर्पित है |*
🙏🏻 *इस प्रकार ब्रह्मवेत्ता सदगुरु की कृपा को, ज्ञान को, आत्मशान्ति को, हृदय में भरते हुए, उनके अमृत वचनों पर अडिग बनते हुए अन्तर्मुख हो जाओ … आनन्दमय बनते जाओ …*
*ॐ आनंद ! ॐ आनंद ! ॐ आनंद !*
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