
ज्योतिष इंद्रमोहन डंडरियाल
🚩 *~ सनातन पंचांग ~* 🚩
🌤️ *दिनांक – 10 जुलाई 2026*
🌤️ *दिन – शुक्रवार*
🌤️ *विक्रम संवत 2083 (गुजरात अनुसार 2082)*
🌤️ *शक संवत -1948*
🌤️ *अयन – उत्तरायण*
🌤️ *ऋतु – वर्षा ॠतु*
🌦️ *अमांत – 24 गते आषाढ़ मास प्रविष्टि*
🌦️ *राष्ट्रीय तिथि – 19 आषाढ़ मास*
🌤️ *मास – आषाढ मास(गुजरात-महाराष्ट्र ज्येष्ठ)*
🌤️ *पक्ष – कृष्ण*
🌤️ *तिथि – दशमी सुबह 08:16 तक तत्पश्चात एकादशी*
🌤️ *नक्षत्र – भरणी दोपहर 01:15 तक तत्पश्चात कृत्तिका*
🌤️ *योग – धृति सुबह 07:15 तक तत्पश्चात शूल*
🌤️*राहुकाल – सुबह 10:39 से दोपहर 12:22 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 05:23*
🌤️ *सूर्यास्त – 07:21*
👉 *दिशाशूल – पश्चिम दिशा मे*
🚩*व्रत पर्व विवरण- योगिनी एकादशी (स्मार्त),एकादशी क्षय तिथि*
💥*विशेष-
🚩~*सनातन पंचांग* ~🚩
👉🏻 *चूकना मत! योगिनी एकादशी पर पान के पत्ते का करें यह गुप्त उपाय, समृद्धिदायक शुभ संयोग बनेगा*⤵️
🌷 *योगिनी एकादशी* 🌷
➡️ *10 जुलाई 2026 शुक्रवार को सुबह 08:16 से 11 जुलाई, शनिवार को प्रातः 05:22 तक एकादशी है।*
*10 जुलाई 2026 शुक्रवार को योगिनी एकादशी (स्मार्त) एवं 11 जुलाई, शनिवार को योगिनी एकादशी (भागवत)*
💥 *विशेष – 11 जुलाई, शनिवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखे।*
🙏🏻 *निर्णयसिन्धु के प्रथम परिच्छेद में एकादशी के निर्णय में 18 भेद कहे गये हैंl*
🙏🏻 *कालहेमाद्रि में मार्कण्डेयजी ने कहा है – जब बहुत वाक्य के विरोध से यदि संदेह हो जाय तो एकादशी का उपवास द्वादशी को ग्रहण करे और त्रयोदशी में पारणा करे ।*
🙏🏻 *पद्म पुराण में आता है कि एकादशी व्रत के निर्णय में सब विवादों में द्वादशी को उपवास तथा त्रयोदशी में पारणा करे ।*
🙏🏻 *दशमी मिश्रित एकादशी परित्यज्य है । द्वादशी युक्त एकादशी उपवास योग्य है किन्तु दशमी युक्त एकादशी में कभी भी उपवास नहीं करना चाहिए । – सौरधर्मोत्तर*
🙏🏻 *द्वादशी मिश्रित एकादशी सर्वदा ही ग्रहण योग्य है । “द्वादशी मिश्रित ग्राह्या सर्वत्रैकादशी तिथिः” – पद्मपुराण*
🙏🏻 *नारद पुराण में वर्णित है कि जिस समय बहुवाक्य विरोध के कारण संदेह उपस्थित हो उस समय द्वादशी में उपवास करते हुए त्रयोदशी में पारण करना चाहिए।*
💥 *विशेष ~ अतः इस बार भी शास्त्र अनुसार 11 जुलाई, शनिवार को उपवास करें*।
🚩 *~ सनातन पंचाग ~* 🚩
🌷 *योगिनी एकादशी* 🌷
➡️ *11 जुलाई 2026 शनिवार को योगिनी एकादशी भागवत है।*
🙏🏻 *योगिनी एकादशी (महापापों को शांत कर महान पुण्य देनेवाला तथा 88000 ब्राह्मणों को भोजन कराने का फल देनेवाला व्रत)*
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