
ज्योतिष इंद्रमोहन डंडरियाल
🚩 *~ सनातन पंचांग ~* 🚩
🌤️ *दिनांक – 23 मई 2026*
🌤️ *दिन – शनिवार*
🌤️ *विक्रम संवत – 2083 (गुजरात अनुसार 2082)*
🌤️ *शक संवत – 1948*
🌤️ *अयन – उत्तरायण*
🌤️ *ऋतु – ग्रीष्म ऋतु*
🌤️ *अमांत – 9 गते ज्येष्ठ मास प्रविष्टि*
🌤️ *राष्ट्रीय तिथि – 2 ज्येष्ठ मास*
🌤️ *मास – अधिक ज्येष्ठ*
🌤️ *पक्ष – शुक्ल*
🌤️ *तिथि – अष्टमी 24 मई प्रातः 04:27 तक तत्पश्चात नवमी*
🌤️ *नक्षत्र – मघा 24 मई रात्रि 02:09 तक तत्पश्चात पूर्वाफाल्गुनी*
🌤️ *योग – ध्रुव सुबह 06:14 तक तत्पश्चात व्याघात*
🌤️*राहुकाल – सुबह 08:49 से सुबह 10:31 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 05:20*
🌤️ *सूर्यास्त – 07:08*
👉 *दिशाशूल – पूर्व दिशा में*
🚩 *व्रत पर्व विवरण -*
💥 *विशेष – अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है (ब्रह्मवैवर्त पुराण ब्रह्म खण्ड: 27,29,34)*
💥 *ब्रह्म पुराण’ के 118 वें अध्याय में शनिदेव कहते हैं- ‘मेरे दिन अर्थात् शनिवार को जो मनुष्य नियमित रूप से पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उनके सब कार्य सिद्ध होंगे तथा मुझसे उनको कोई पीड़ा नहीं होगी। जो शनिवार को प्रातःकाल उठकर पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उन्हें ग्रहजन्य पीड़ा नहीं होगी।’ (ब्रह्म पुराण’)*
💥 *शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय।’ का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है। (ब्रह्म पुराण’)*
💥 *हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है।(पद्म पुराण)*
🚩 *~ सनातन पंचांग ~* 🚩
🌷 *अनिद्रा से छुटकारा* 🌷
➡ *१० मिनट विधिवत शवासन करने से या जीभ के अग्रभाग को दाँतो से थोडा दबाकर १० मिनट तक ज्ञान मुद्रा लगा के बैठने से शारीरिक – मानसिक तनाव व अनिद्रा आदि की बीमारी दूर होती है |*
🚩 *~ सनातन पंचांग ~* 🚩
🌷 *तुलसी को क्या न करें* 🌷
🌿 *कोई तुलसी को लाल चुनरी उड़ा देते है | वो शास्त्र ना कहते है | तुलसी पर लाल कपड़ा कभी नहीं पहनना चाहिये | सूर्य उदय के पहले और सूर्यास्त के बाद तुलसी को छूना नहीं चाहिये |*
🚩 *~ सनातन पंचांग ~* 🚩
🌷 *इनका रखें ध्यान* 🌷
👉🏻 *दोनों हाथो से सिर नहीं खुजलाना चाहिए | जूठे हाथों से सिर को स्पर्श नहीं करना चाहिए | नहीं तो बुद्धि मंद होती है |*
👉🏻 *ए जो गलती छुपाता है उसका गिरना चालू रहता है और जो गिरने की बात को भगवान के आगे, गुरु के आगे, अपने नजदीकी सत्संगी, विश्वासपात्र मित्र के आगे बोल के, रोकर पश्चाताप करके रास्ता खोजता है उसको भगवान बचा भी लेते हैं |*
🚩 *~ सनातन पंचांग ~* 🚩
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