
लोकतांत्रिक इतिहास का सबसे बड़ा बदलाव, परिसीमन प्रक्रिया में व्यापक परिवर्तन

33 फीसद महिला आरक्षण के लिए आएंगे तीन विधेयक
पहाड़ का सच/एजेंसी
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने लोकसभा की सीटों की संख्या 543 में बढ़ाकर अधिकतम 850 करने का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए केंद्र सरकार संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 ला रही है। इसके जरिये लोकसभा की संरचना और परिसीमन प्रक्रिया में व्यापक बदलाव आएगा। यह विधेयक विधायिका में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के साथ पेश किया जाएगा। अब परिसीमन से जनगणना का पेच खत्म हो जाएगा।
सरकार ने इस विधेयक के साथ ही राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभाओं की सीटों के पुनर्निर्धारण के लिए । परिसीमन विधेयक 2026 लाने का भी प्रस्ताव रखा है। दिल्ली और जम्मू-कश्मीर में सरकार की संरचना में बदलाव के लिए अलग से संघशासित क्षेत्र कानून (संशोधन) विधेयक 2026 पेश किया है। इन तीनों विधेयकों पर 16 और 17 अप्रैल को होने वाले विशेष सत्र में चर्चा की जाएगी। अगर ये विधेयक पारित हुए तो देश में विधायिका का पूरा ढांचा बदल जाएगा।
16-17 को संसद के विशेष सत्र में चर्चा
नई सीटों का निर्धारण होते ही आरक्षण लागू .इस बदलाव के पीछे सरकार मुख्य वजह महिला आरक्षण को बता रही है। सरकार ने 106वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2023 के जरिये महिलाओं को 33 फीसद आरक्षण का वादा किया था। इसमें शर्त रखी गई थी कि यह आगामी जनगणना व परिसीमन के बाद लागू होगा। विपक्ष ने तब देरी पर सवाल उठाते हुए जल्द लागू करने के लिए कहा था। अब सरकार ने विपक्ष की मांग मानकर नए बिलों के जरिये मास्टरस्ट्रोक चला है।
यदि तीनों बिल पारित होते हैं, तो इसके बाद सरकार परिसीमन आयोग गठित करेगी और इन विधेयकों में यह प्रावधान किया गया है कि नई सीटों के निर्धारण के साथ 33 फीसद महिला आरक्षण लागू हो जाएगा।
लोकसभा में राज्यों की 815 व केंद्रशासित प्रदेशों की 35 सीटें
इन विधेयकों के जरिये राज्यों को लोकसभा सीटें बढ़कर 815 हो जाएंगी जबकि केंद्रशासित प्रदेशों में यह 35 रहेगी। अभी लोकसभा की 543 सीटों पर चुनाव होते हैं, जो 1971 की जनगणना के आधार पर तय की गई थीं। लंबे समय से मांग उठ रही थी कि बढ़ती जनसंख्या के हिसाब से सांसदों की संख्या बढ़ाई जाए। सरकार जो संविधान का 131वां संशोधन विधेयक ला रही है, उसके जरिये संविधान के अनुच्छेद 81, 82, 170 और 330 में संशोधन का प्रावधान है।
अनुच्छेद 81 में लोकसभा की संरचना की परिभाषा बदलेगी। अब जनसंख्या का मतलब केवल नवीनतम जनगणना नहीं होगा, बल्कि संसद की ओर से अधिसूचित जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया जाएगा। दूसरा बड़ा बदलाव अनुच्छेद 82 में होगा। अब तक को व्यवस्था यह थी कि हर जनगणना के बाद स्वतः ही परिसीमन की प्रक्रिया शुरू हो जाती थी। नए बिल ने इस स्वतः को हटा दिया है। अब परिसीमन कब और कैसे होगा, यह संसद के कानूनों व परिसीमन आयोग की शक्तियों के जरिये तय किया जाएगा।
तीसरा बड़ा बदलाव अनुच्छेद 170 में किया जाएगा। यह अनुच्छेद राज्यों की विधानसभाओं के लिए जनसंख्या की परिभाषा से संबंधित है। नए संशोधन के जरिये इनमें भी हर जनगणना के बाद सीटों की कुल संख्या के बदले अब सीटों की कुल संख्या का इस्तेमाल किया जाएगा।
अनुच्छेद 330 में संशोधन के जरिये सरकार सरकार अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षण का विस्तार महिलाओं के लिए तय सीटों तक करने जा रही है।
