
– ज्वलंत मुद्दों पर कार्य स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा की मांग कर रहा था विपक्ष
– स्पीकर ने अनुमति नहीं दी, विरोध में वेल आए कांग्रेसी सदस्य, नारेबाजी की
– विरोध में फोटो सेशन का भी विपक्ष ने किया बहिष्कार
पहाड़ का सच भराड़ीसैंण। उत्तराखंड विधानसभा का गैरसैंण (भराड़ीसैंण) सत्र विपक्ष के भारी हंगामे के बीच अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है। दो दिवसीय विशेष सत्र केवल डेढ़ दिन ही चल सका, जिसमें हंगामे के कारण बिना चर्चा के ₹7,844.18 करोड़ का अनुपूरक बजट और 10 महत्वपूर्ण विधेयक ध्वनिमत से पारित कर दिए गए।

हंगामे के बीच सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अनुपूरक बजट को मंजूरी दी। इससे इस वित्तीय वर्ष के कुल बजट का आकार बढ़कर ₹1,19,547.38 करोड़ हो गया है।
विनियोग विधेयक समेत कुल 10 विधेयकों को सदन के पटल पर रखकर पारित किया गया। इनमें उत्तराखंड निवेश एवं अवसंरचना (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, उत्तराखंड माल एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक, निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक, और अग्निशमन सेवा विधेयक जैसे महत्वपूर्ण विधायी कार्य शामिल रहे।

सत्र के दूसरे दिन कांग्रेस विधायकों ने भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था, आपदा राहत और एमबीबीएस सीटों में कथित घोटाले जैसे ज्वलंत मुद्दों पर नियम 311 के तहत कार्यस्थगन प्रस्ताव लाने की मांग की। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण द्वारा इसे स्वीकार न किए जाने पर विपक्षी दल भड़क उठे। विरोध में कांग्रेस विद्यायकों ने वेल में आकर काले झंडे व काले कपड़े लहराए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
विपक्ष का आरोप था कि सरकार आपदा, भ्रष्टाचार और जनहित के मुद्दों पर बहस से भाग रही है, जिसके कारण चार दिन के प्रस्तावित कार्यक्रम को महज दो दिन (प्रभावी रूप से डेढ़ दिन) में समेट दिया गया। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह ने विरोध स्वरूप कार्यमंत्रणा समिति से अपना इस्तीफा भी दे दिया।

सत्र के समापन पर विधायकों के लिए आयोजित पारंपरिक सामूहिक फोटोशूट में भी कांग्रेस विधायकों ने हिस्सा नहीं लिया और इससे पूरी तरह दूरी बनाए रखी। भारी हंगामे और शोर-शराबे को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने प्रश्नकाल के दौरान एक तारांकित प्रश्न का उत्तर दिलवाने के तुरंत बाद बजटीय व विधायी औपचारिकताएं पूरी कराईं और सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी।


