
काम के दम पर चुनाव में जनता के बीच जाने की तैयारी
मुफ्त की रेवड़ियां बांटने की छवि से बाहर निकली सरकार
धामी सरकार का यह अंतिम अनुपूरक बजट संतुलन और सुशासन का एक ऐसा कॉम्बिनेशन है, जिसमें सरकार ने मुफ्त की रेवड़ियां बांटने की छवि से बचते हुए पूंजीगत विकास और जमीनी स्तर पर सत्ता के विकेंद्रीकरण (पंचायतों को अधिक फंड) को अपना मुख्य चुनावी हथियार बनाया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी विभागों को दिसंबर तक 80 फीसद बजट खर्च करने का जो कड़ा निर्देश दिया है, वह यह साफ करता है कि सरकार आचार संहिता लागू होने से पहले इन सभी योजनाओं के शिलान्यास और काम को जमीन पर उतारकर चुनावों में काम के दम पर चुनाव में उतरेगी।
हरीश जोशी/पहाड़ का सच देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा गैरसैंण (भराड़ीसैंण) विधानसभा के विशेष सत्र में पेश किया गया ₹7,844.18 करोड़ का अनुपूरक बजट आगामी 2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनावों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण राजनीतिक और रणनीतिक कदम है. इस अनुपूरक बजट के बाद प्रदेश के कुल वार्षिक बजट का आकार बढ़कर रिकॉर्ड ₹1,19,547.39 करोड़ हो गया है।

धामी सरकार ने अनुपूरक बजट में पूंजीगत मद को प्राथमिकता दी है. कुल ₹7,844 करोड़ में से ₹4,164.32 करोड़ (लगभग 53.1फीसद) सिर्फ पूंजीगत मद के लिए रखे गए हैं.इसका सीधा संदेश है कि चुनावी साल में सरकार लोक-लुभावन मुफ्त घोषणाओं के बजाय यह दिखाना चाहती है कि वह राज्य के दीर्घकालिक विकास (सड़क, बिजली, पानी) को लेकर गंभीर है।
• इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए करीब ₹1,800 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो सीधे ग्रामीण और पहाड़ी वोटर्स को जोड़ने की कोशिश है. छठे राज्य वित्त आयोग की सिफारिशों को मानते हुए सरकार ने स्थानीय निकायों और त्रिस्तरीय पंचायतों की राज्य के कर राजस्व में हिस्सेदारी 10.5 फीसद से बढ़ाकर 12.5 फीसद कर दी है. इसके तहत ग्रामीण और शहरी निकायों को ₹721 करोड़ रुपये मिलेंगे.सीधा मतलब है कि चुनाव से ठीक पहले पंचायतों को विकास कार्यों के लिए पैसा मिलेगा।
• बजट में अन्नदाता योजना जैसी कृषि से जुड़ी पहलों और किसान कल्याण (जैसे कैशलेस इलाज की सुविधा) के लिए बड़ा बजटीय प्रावधान (अन्नदाता योजना व अन्य के लिए लगभग ₹1,590 करोड़ का हिस्सा) किया जाना भी मुख्यमंत्री की सुलझी राजनीति का हिस्सा माना जा रहा है. पहाड़ी और मैदानी (जैसे ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार) दोनों क्षेत्रों के किसानों की नाराजगी दूर करने के लिए यह एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकता है।
सरकार ने हरिद्वार में होने वाले आगामी दिव्य कुंभ के लिए ₹290 करोड़ और हरिद्वार-गंगा कॉरिडोर परियोजना के लिए अलग से ₹30 करोड़ आवंटित किए गए हैं. इसका असर सीधे तौर पर भाजपा की सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और धार्मिक पर्यटन की छवि पर पड़ेगा। इसके अलावा केदारनाथ, हेमकुंट साहिब रोपवे और चारधाम कनेक्टिविटी को मजबूत करना पर्यटन और आस्था दोनों मोर्चों पर सरकार को बढ़त दिलाता है।
•एकल महिलाओं के लिए सम्मान योजना, दिव्यांग छात्र-छात्राओं को न्यूनतम पासिंग मार्क्स में 5 अंकों की छूट और राष्ट्रीय/राज्य स्तर के खिलाड़ियों को रोडवेज बसों में मुफ्त यात्रा जैसे फैसलों से समाज के हर संवेदनशील वर्ग को छुआ गया है. सामाजिक कल्याण विभाग की मुफ्त कोचिंग योजना के लिए पारिवारिक आय सीमा को ₹2 लाख से बढ़ाकर ₹8 लाख करना अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के युवाओं को आकर्षित करने की बड़ी कोशिश है।
जोशीमठ और अन्य आपदाग्रस्त क्षेत्रों में राहत और इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा के लिए ₹48 करोड़ की व्यवस्था की गई है। चुनाव से पहले विपक्ष को आपदा प्रबंधन और विस्थापन के मुद्दों की तीव्रता को कम करने के लिए सरकार का यह फ़ैसला कारगर साबित हो सकता है।


