
पहाड़ का सच, देहरादून। बनियांवाला में चल रही रामलीला के प्रथम दिवस का आरंभ आज शक्ति स्वरूपा कीर्तन मंडली के सुंदर भजनों द्वारा हुआ। इसके पश्चात आज की मुख्य अतिथि क्षेत्र की पार्षद श्रीमती किरण द्वारा रिब्बन काटकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।

इस मौके पर रामलीला कमेटी के अध्यक्ष रामचरण गोदियाल द्वारा समाज सेवी हरीश जी का रामनाम का पटका पहनाकर सम्मान किया गया, और शक्ति स्वरूपा कीर्तन मंडली की अध्यक्ष राखी रावत द्वारा क्षेत्र पार्षद का रामनाम का पटका पहनाकर सम्मान किया गया। वहीं पार्षद किरण द्वारा समस्त मंडली की महिलाओं का सम्मान किया गया।

प्रथम दिवस की लीला आज राजा दशरथ के दरबार से शुरू हुई। राजा दशरथ अपने मंत्री से राज्य की कुशलता के बारे में पूछते हैं। तो मंत्री बोलते हैं कि महराज सारे राज्य में सारी प्रजा कुशल से है। तभी दरबार में श्रवणकुमार आते हैं और कहते हैं कि उनके अंध माता पिता तीर्थ दर्शन को आए हुए हैं। इसके पश्चात श्रवण अपने माता पिता के साथ जंगल में विश्राम कर रहे होते हैं, तो उनको प्यास लगती है, वे श्रवण कुमार को कहते हैं कि बेटा बहुत प्यास लगी हुई है अगर कहीं से जल मिल जाए तो ले आओ।

श्रवण कुमार नदी में जल भर रहे होते हैं, वहीं राजा दशरथ जंगल में शिकार खेलने गए होते हैं, तो पानी के भरने की आवाज सुनकर शब्दभेदी बाण चला देते हैं, जो कि श्रवण कुमार को लग जाता है, और श्रवण कुमार की मौत हो जाती है।

फिर राजा दशरथ जल लेकर श्रवण कुमार के मां पिता के पास पहुंचते हैं, और जल पीने का आग्रह करते हैं पर श्रवण कुमार के माता पिता जल नहीं पीते और पुत्र वियोग में प्राण त्याग देते हैं और राजा दशरथ को श्राप देते हैं कि राजा तेरी मृत्यु भी पुत्र वियोग में होगी।

इसके पश्चात रावण, कुम्भकरण और विभीषण, ब्रह्मा जी की घोर तपस्या करते हैं और वर मांगते हैं। ब्रह्म जी से वरदान प्राप्त करने के बाद रावण को घमंड आ जाता है। इसके बाद नारद रावण के दरबार में आते हैं, और रावण को कैलाश पर्वत लाने को कहते हैं।

रावण अपने अभिमान में चूर्ण होकर कैलाश पर्वत उठाने को चले जाता है। पर्वत को हिलता देख पार्वती भयभीत हो जाती है और शिवजी से कहती है कि ये कैलाश पर्वत क्यूं हिल रहा है तो शिव भगवान कहते हैं कि रावण को अपने बल पर ज्यादा घमंड हो गया है, और शिवजी अपने पैर के अंगूठे से कैलाश को दबा देते हैं वहां रावण का हाथ दब जाता है।

इसके बाद रावण भगवान शिव से क्षमा मांगता है, तो शिवजी पार्वती के कहने से रावण को क्षमा कर देते हैं।


