
– नार्को टेस्ट से ठीक 24 घंटे पहले उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी से सीबीआई कार्यवाही में पड़ सकती है अड़चन
– पुलिस की कार्रवाई में ऑडियो और वीडियो के सुरक्षित रहने पर भी उठ रहे सवाल, जिनमें उर्मिला दावा कर रही है वीआईपी का
पहाड़ का सच देहरादून। अभिनेत्री उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी को हालांकि पुलिस तकनीकी रूप से एक अलग आपराधिक शिकायत (रंगदारी व धमकी) के तहत की गई वैधानिक कार्रवाई बता रही है परंतु, सीबीआई की नार्को टेस्ट प्रक्रिया और अदालत में अंतिम सहमति दर्ज होने से ठीक पहले इस कार्रवाई का होना, इस बात का संकेत है कि अंकिता भंडारी मामले का यह वीआईपी ऑडियो कांड कानूनी कार्यवाही से ज्यादा एक बड़ा राजनीतिक बवंडर बन चुका है।

बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में सीबीआई (CBI) कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाई और नार्को टेस्ट की अगली प्रक्रिया (26 अक्टूबर 2026) से ठीक पहले, 25 अक्टूबर 2026 को उत्तराखंड पुलिस द्वारा अभिनेत्री उर्मिला सनावर की अचानक गिरफ्तारी ने राज्य की सियासत और कानूनी गलियारों में भारी हलचल पैदा कर दी है।

उर्मिला सनावर को पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर की बेटी की शिकायत पर मानहानि, रंगदारी (5 करोड़ रुपये की मांग) और जान से मारने की धमकी के आरोप में उसके सहारनपुर स्थित आवास से गिरफ्तार किया गया है।सीबीआई कार्यवाही में अड़चन उर्मिला सनावर ने 23 अक्टूबर को देहरादून की सीबीआई अदालत में नार्को व पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए अपनी लिखित सहमति दे दी थी।

कोर्ट ने उर्मिला को 26 अक्टूबर को दोबारा अपनी शर्तों और सहमति पर अंतिम विचार के लिए बुलाया था। इस सुनवाई से ठीक 24 घंटे पहले हरिद्वार पुलिस द्वारा उसे हिरासत में लिए जाने से अब सीबीआई कोर्ट की प्रक्रिया सीधे तौर पर प्रभावित हो सकती है। हालांकि पुलिस की यह कार्रवाई अंकिता भंडारी केस से अलग एक रंगदारी और ब्लैकमेलिंग के मुकदमे (जो पूर्व विधायक की बेटी ने दर्ज कराया) के तहत हुई है, लेकिन इसकी ‘टाइमिंग’ को लेकर कानूनी विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं।

मुकदमा दर्ज होने के महज 12 घंटे के भीतर हुई त्वरित गिरफ्तारी होना असाधारण माना जा रहा है। गिरफ्तारी के वक्त पुलिस द्वारा उर्मिला के घर से सीसीटीवी (CBI) का डीवीआर (DVR) और उनका मोबाइल जब्त किए जाने की खबरें आई हैं। उर्मिला पहले ही दावा कर चुकी थीं कि उसके पास वीआईपी (VIP) नामों को उजागर करने वाले कई अहम ऑडियो और साक्ष्य मौजूद हैं। इस जब्ती से उन डिजिटल साक्ष्यों की सुरक्षा और गोपनीयता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
उर्मिला ने मांग की थी कि उसका नार्को टेस्ट ‘लाइव कैमरों’ के सामने मीडिया की मौजूदगी में हो, ताकि वो कई बड़े राज उगल सकें। अदालत के औपचारिक आदेश और टेस्ट से ऐन पहले पुलिस कस्टडी में जाने से उनके मनोबल और स्वेच्छा से बयान देने की कानूनी प्रक्रिया पर मनोवैज्ञानिक दबाव बन सकता है।
अंकिता भंडारी केस में शुरू से ही एक ‘वीआईपी’ (VIP) के शामिल होने के आरोप लगते रहे हैं। उर्मिला सनावर ने पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर के साथ बातचीत के वायरल ऑडियो और बयानों में भाजपा के एक बड़े राष्ट्रीय नेता का नाम उछाला था। इस गिरफ्तारी के बाद विपक्षी दल (जैसे कांग्रेस) सरकार पर सीधे आरोप लगा रहे हैं कि राज्य पुलिस का इस्तेमाल सत्ताधारी दल से जुड़े बड़े चेहरों को बचाने और सच्चाई को दबाने के लिए किया जा रहा है।
जनता और सामाजिक संगठनों में अंकिता भंडारी के लिए न्याय (Justice for Ankita) की मांग को लेकर पहले से ही भारी जनाक्रोश रहा है। इस हाई-प्रोफाइल मोड़ पर मुख्य गवाह/कड़ी मानी जा रही महिला की अचानक गिरफ्तारी से इस मामले में नया मोड आ गया है।
उर्मिला सनावर ने हाल ही में बयान दिया था कि “सरकार को गिराने की सियासत चल रही है, जिसमें कुछ अंदर के ही लोग शामिल हैं”। इस मामले में भाजपा से निष्कासित पूर्व विधायक सुरेश राठौर और उर्मिला के बीच का आपसी विवाद अब पूरी तरह से राजनीतिक रूप ले चुका है, जो उत्तराखंड भाजपा के भीतर आंतरिक खींचतान और गुटबाजी को भी हवा दे रहा है।


