
– पावर हाउस और ग्रिड पर रहेगा व्यापक नियंत्रण
पहाड़ का सच देहरादून। उत्तराखंड जल विद्युत निगम (UJVNL) में सूचना एवं साइबर सुरक्षा नीति के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है।
इससे यूजेवीएन के कई बड़े जलविद्युत बांधों, पावर हाउस और ग्रिड को नियंत्रित करने में व्यापक मदद मिलेगी। ये सभी सिस्टम डिजिटल नेटवर्क (SCADA और औद्योगिक नियंत्रण प्रणाली) से जुड़े होते हैं।

यह नीति इन संवेदनशील प्रणालियों को हैक होने से बचाती है ताकि बिजली उत्पादन ठप न हो। यदि कोई साइबर हमलावर निगम के बिजली वितरण नेटवर्क या नियंत्रण कक्ष को निशाना बनाता है, तो पूरे राज्य या क्षेत्र की बिजली गुल हो सकती है। साइबर सुरक्षा नीति ऐसे खतरों को समय रहते रोकने के लिए एक मजबूत सुरक्षा प्रोटोकॉल तैयार करती है।
निगम के प्रबन्ध निदेशक अजय कुमार सिंह का कहना है कि उत्तराखंड की ऊर्जा सुरक्षा, बिजली उत्पादन की क्षमता, आगामी परियोजनाओं (जैसे इच्छाड़ी पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट), और कर्मचारियों का बेहद गोपनीय प्रशासनिक व वित्तीय डेटा होता है। यह नीति डेटा लीक या चोरी को रोकती है।
यह नीति सिस्टम के नियमित बैकअप और एडवांस फायरवॉल को अनिवार्य बनाती है ताकि काम कभी प्रभावित न हो। सरकार की साइबर सुरक्षा एजेंसी (जैसे CERT-In) और राष्ट्रीय सुरक्षा दिशा निर्देशों के तहत हर बड़े बुनियादी ढांचा प्रदाता के लिए एक मानक सुरक्षा नीति होना अनिवार्य है। यह कदम निगम को कानूनी और तकनीकी रूप से अप-टू-डेट रखता है।
निगम में इस नीति के लागू होने के बाद व्यावहारिक बदलाव और सुरक्षा उपाय काम करेंगे जिनमें निगम के नेटवर्क या सिस्टम को हर कोई एक्सेस नहीं कर पाएगा। केवल अधिकृत (Authorized) कर्मचारियों को ही उनके काम के अनुसार डिजिटल एक्सेस मिलेगा।
• निगम के सभी कंप्यूटरों और ऑनलाइन सर्वरों की लगातार निगरानी की जाएगी ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि का पता तुरंत लगाया जा सके।निगम के कर्मचारियों को फिशिंग ईमेल (फर्जी ईमेल लिंक) और पासवर्ड सुरक्षा को लेकर प्रशिक्षित किया जाएगा, क्योंकि अधिकांश साइबर हमले मानवीय चूक के कारण सफल होते हैं।
यदि कभी कोई साइबर हमला हो भी जाता है, तो उससे तुरंत कैसे निपटना है और सेवाओं को बिना रुकावट कैसे बहाल करना है, इसकी पूरी कार्ययोजना इस नीति में शामिल होती है।


