आने वाले दिनों में उत्तराखंड की सियासत में भाजपा को टक्कर देने का मुख्य एजेंडा गणेश गोदियाल के इर्द-गिर्द ही बुना जाएगा
हरीश जोशी/पहाड़ का सच देहरादून।
उत्तराखंड में ‘छात्रों की गूंज’ और ‘हल्ला बोल’ सीएम आवास कूच कार्यक्रम की कामयाबी ने राज्य की राजनीति में प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष गणेश गोदियाल के राजनीतिक कद व क्षमता को एक नए और बेहद मजबूत चेहरे के रूप में स्थापित किया है।

हल्द्वानी में हुई हालिया ‘शुद्धिकरण’ घटना और राहुल गांधी पर दर्ज हुई FIR के विरोध में हुए इस बड़े शक्ति प्रदर्शन को कांग्रेस की आंतरिक और राज्य की बाहरी राजनीति के दृष्टिकोण से देखा जाए तो पीसीसी अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने खुद जमीन पर उतरकर, बैरिकेडिंग पर चढ़कर पुलिस से सीधी टक्कर ली और अपनी गिरफ्तारी भी दी। इस प्रदर्शन ने यह साबित किया है कि गोदियाल केवल बंद कमरों या प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित नेता नहीं हैं, बल्कि वे सड़क पर उतरकर जनता और कार्यकर्ताओं के मुद्दों पर सीधे लड़ने वाले आक्रामक नेता भी हैं।
छात्रों की गूंज’ के माध्यम से बड़ी संख्या में युवाओं और छात्रों का इस आंदोलन से जुड़ना दिखाता है कि गोदियाल उत्तराखंड के युवा वर्ग में अपनी पैठ मजबूत करने में सफल रहे हैं। कांग्रेस लंबे समय से आंतरिक गुटबाजी और बड़े नेताओं की आपसी खींचतान से जूझती रही है। सीएम आवास कूच की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि गणेश गोदियाल के नेतृत्व में पार्टी के सभी दिग्गज नेता (नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, प्रीतम सिंह, हरक सिंह रावत, करन माहरा) एक साथ सड़कों पर उतरे।
पार्टी आलाकमान द्वारा गोदियाल को दोबारा कमान सौंपी गई और इस सफल आंदोलन से उन्होंने साबित कर दिया है कि वे उत्तराखंड में कांग्रेस के सभी गुटों को एक धागे में पिरोने और उन्हें संचालित करने की संगठन क्षमता रखते हैं। बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, महिला सुरक्षा और हल्द्वानी शुद्धिकरण विवाद जैसे मुद्दों को एक साथ उठाकर गोदियाल ने सत्ताधारी भाजपा को कटघरे में खड़ा किया है। हाल में हुए दोनों प्रदर्शन के बाद कांग्रेस के भीतर और बाहर गणेश गोदियाल की छवि 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए स्वाभाविक और मजबूत चेहरे के रूप में उभरी है।
हल्ला बोल आंदोलन का मुख्य केंद्र बिंदु राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज FIR का विरोध और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद हुए घटनाक्रम का प्रतिकार करना था। राष्ट्रीय नेताओं के सम्मान में प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा की उपस्थिति में इतना बड़ा आंदोलन खड़ा करके गोदियाल ने नई दिल्ली (हाईकमान) को यह संदेश दिया है कि वे केंद्रीय नेतृत्व के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं और उनके हितों की रक्षा के लिए राज्य में बड़ी से बड़ी राजनीतिक लड़ाई लड़ सकते हैं।
गणेश गोदियाल की इस राजनीतिक क्षमता को कांग्रेस की राजनीति में “एक आक्रामक, संगठनकर्ता और राज्य के निर्विवाद जननायक” के रूप में देखा जाना चाहिए। ‘हल्ला बोल’ कार्यक्रम की सफलता ने उनके आलोचकों को शांत कर दिया है और यह स्पष्ट कर दिया है कि आगामी समय में उत्तराखंड की सियासत में भाजपा को टक्कर देने का मुख्य एजेंडा गणेश गोदियाल के इर्द-गिर्द ही बुना जाएगा।

