
निगम के सभी 14 विद्युत वितरण मंडलों में प्रणाली सुदृढीकरण के कार्यों की गहन पड़ताल
अफसरों को निर्देश, गंगा कॉरिडोर के कार्य दिसंबर 2026 तक पूरे किए जाएं
पहाड़ का सच देहरादून। साप्ताहिक अवकाश के दिन भी ऊर्जा निगम के प्रबंध निदेशक पीसी ध्यानी ने बिजली सुधार के लिए आरडीएसएस योजना के तहत हो रहे कार्यों की गहन समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्यों को निर्धारित अवधि के भीतर पूरा करें और उसके लिए समय से सामग्री का आवंटन करें। एमडी ने चेतावनी दी कि निर्माण करने वाली कम्पनी को शिथिलता पर नोटिस जारी किए जाएंगे।

रविवार के दिन केंद्र पोषित आरडीएसएस योजना के अंतर्गत प्रबंध निदेशक ध्यानी द्वारा आईटी/ओ.टी, स्काडा, गंगा कॉरिडोर ऋषिकेश में विद्युत लाइनों के भूमिगतीकरण, भारत तिब्बत सीमा पुलिस के सीमा चौकियों का विद्युतीकरण, वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत सीमांत गांवों का विद्युतीकरण सहित यूपीसीएल के सभी 14 विद्युत वितरण मंडलों में प्रणाली सुदृढीकरण के कार्यों की मैराथन समीक्षा की गई।
आई.टी / ओ.टी. बिलिंग परियोजना की समीक्षा में ध्यानी द्वारा विशेष रूप से निर्देशित किया गया कि सॉफ्टवेयर मॉड्यूल को यूजर फ्रेंड्ली बनाया जाए एवं काम करने से पहले क्षेत्रीय कर्मचारियों एवं अधिकारियो का परामर्श लिया जाए। फील्ड यूजर्स की ट्रेनिंग प्राथमिकता एवं गंभीरता के साथ की जाये। .उन्होंने यूपीसीएल की अपनी टीम बनाने के निर्देश दिये जिससे आई.टी. कार्य करने वाले कर्मचारियों के विकल्प उपलब्ध हों व कार्यों में सबकी सहभागिता रहे। प्रबंध निदेशक द्वारा निर्देशित किया गया कि समय से परियोजना पूर्ण की जाए इसके लिए प्रत्येक स्तर पर समुचित प्रयास सुनिश्चित की जाएं।

गंगा कॉरिडोर क्षेत्र में ऋषिकेश के अंतर्गत विद्युत लाइनों के भूमिगत करने के सभी 7 पैकेजों की विस्तृत समीक्षा की गई। सभी सातों कार्यदायी संस्थाओं को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया की आगामी कुंभ के दृष्टिगत माह नवम्बर-2026 तक कार्य पूर्ण किये जाने के अनुसार एक निश्चित कार्ययोजना के अनुसार कार्य पूर्ण किया जाना है। सभी विभागीय अधिकारियों को भी कार्य समय से पूर्ण किए जाने हेतु जी.टी.पी अनुमोदन, सामग्री निरीक्षण, डी आई आदि की कार्यवाही ससमय समग्र रूप से मिशन मोड में किए जाने के निर्देश दिए गए।
गंगा कॉरिडोर क्षेत्र के ऋषिकेश / हरिद्वार तथा देहरादून में स्काडा परियोजना के कार्यों की प्रगति की समीक्षा के दौरान परियोजना के विभिन्न घटकों की वर्तमान स्थिति, लंबित कार्यों तथा निर्धारित समय सीमा में कार्य पूर्ण किए जाने के संबंध में दिशा निर्देश दिए गए। प्रबंध निदेशक यूपीसीएल ने कार्यों में शिथिलता पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कार्यदायी संस्था को कार्यों में तेजी लाने हेतु निर्देशित किया अन्यथा सम्बंधित फर्म को नोटिस जारी किया जाए। कार्यदायी संस्था को निर्देशित किया गया कि फैक्ट्री इंस्पेक्शन टेस्ट से संबंधित डॉक्युमेंट तथा फैक्टरी इंस्पेक्शन अगस्त माह में पूर्ण कर लिया जाए।
इसके साथ ही क्षेत्रीय अधिकारियों को भी निर्देशित किया गया कि स्काडा से संबंधित कार्यों को फील्ड स्तर पर दुरुस्त कर लिया जाए, जिससे कार्य समय सीमा के अंतर्गत पूर्ण किया जा सकें। प्रबंध निदेशक यूपीसीएल ने परियोजना के कार्यों को अक्टूबर, 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित करते हुए सभी अधिकारियों को कार्यों की निरंतर निगरानी एवं समीक्षा करने के निर्देश दिए। .कार्यदायी संस्था को निर्देशित किया गया कि कार्यों में गति प्रदान करें यदि कोई बॉटल नेक के कारण कार्य प्रभावित हो रहा है तो उसकी सूचना से तत्काल संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया जाए।
लॉस रिडक्शन के कार्यों की प्रगति समीक्षा में समस्त कार्यदायी संस्थाओं को आवश्यकतानुसार पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराते हुए कार्य में तेजी लाने हेतु निर्देशित किया गया। वर्तमान में लगभग 63 प्रतिशत भौतिक प्रगति के सापेक्ष 100 प्रतिशत की प्रगति माह सितंबर, 2026 तक का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। .समस्त अधिशासी अभियंताओं को भी कार्यदायी संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित कर निर्धारित समयावधि में कार्य पूर्ण कराने हेतु निर्देशित किया गया। सभी अधीक्षण अभियंताओं को निर्देशित किया गया की समय-समय पर कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए कार्यदायी संस्थाओं को यथावश्यक सहयोग सुनिश्चित की जाए।
सभी अधिकारियों एवं कार्यदायी संस्थाओं को निदेशित किया गया कि इस बात का प्रत्येक दशा में खयाल रखा जाए की कारपोरेशन को किसी भी प्रकार से अनुदान की धनराशि का नुकसान न हो।
समाचार लिखे जाने तक समीक्षा बैठक जारी है तथा भारत तिब्बत सीमा पुलिस के सीमा चौकियों का विद्युतीकरण, वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत सीमांत गांवों का विद्युतीकरण के कार्यों की समीक्षा जारी है।
केंद्र सरकार की आरडीएसएस (RDSS) योजना के तहत उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPCL) द्वारा राज्य में बिजली बुनियादी ढांचे को आधुनिक और मजबूत बनाने के लिए लगभग ₹3,000 करोड़ से अधिक के विकास कार्य तेजी से किए जा रहे हैं।उत्तराखंड में इस योजना के अंतर्गत मुख्य रूप से निम्नलिखित कार्य हो रहे हैं।
स्मार्ट प्रीपेड मीटरिंग का काम15 लाख से अधिक मीटर: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार राज्य में लगभग 15.84 लाख घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं को मोबाइल ऐप पर रियल-टाइम बिजली खपत की जानकारी मिल रही है, जिससे वे अपनी खपत को नियंत्रित कर सकते हैं और बिजली चोरी पर रोक लग रही है।
बिजली लाइनों को अंडरग्राउंड (भूमिगत) करना: ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर: ऋषिकेश जैसे आध्यात्मिक और पर्यटन क्षेत्र में बिजली व्यवस्था को सुरक्षित और सुंदर बनाने के लिए ₹547.73 करोड़ की लागत से हाई टेंशन (HT) और लो टेंशन (LT) लाइनों को भूमिगत (Underground) किया जा रहा है।देहरादून व अन्य शहर: पूर्व में स्वीकृत बजट के तहत देहरादून और राज्य के अन्य मुख्य शहरों में नई लाइनों को अंडरग्राउंड करने और पुराने तारों को बदलने का काम किया जा रहा है।
सीमावर्ती क्षेत्रों और सेना की चौकियों का विद्युतीकरणनेलांग घाटी परियोजना: भारत-चीन सीमा पर स्थित उत्तरकाशी की नेलांग घाटी में सेना और ITBP की अग्रिम चौकियों (जादूंग, नीलापानी, सुमला आदि) को मुख्य ग्रिड बिजली से जोड़ा जा रहा है। इसके लिए कोपांग में नया विद्युत सब-स्टेशन और 33 केवी की नई लाइन बिछाई जा रही है, जिससे डीजल जनरेटरों पर निर्भरता खत्म होगी।
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम: सीमांत गांवों और जनजातीय (Tribal) परिवारों के घरों व सार्वजनिक संस्थानों में शत-प्रतिशत बिजली पहुंचाने का काम भी इसके तहत किया जा रहा है। अल्मोड़ा में ₹76.49 करोड़ की लागत से 11 केवी लाइनों को आधुनिक ट्रिपल एसी (AAAC) तारों से बदला जा रहा है, एलटी लाइनों पर एबी (AB) केबल बिछाई जा रही है और ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई जा रही है। इस काम को सितंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
हल्द्वानी में ₹107.01 करोड़ और रानीखेत में ₹69.55 करोड़ की लागत से बिजली के तकनीकी नुकसान (Loss Reduction) को कम करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत किया जा रहा है। ऑटोमेशन और नई तकनीक (SCADA)बिजली कटौती को ट्रैक करने और तुरंत फाल्ट सुधारने के लिए SCADA (सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन) ऑटोमेशन प्रणाली लागू की जा रही है। इससे सब-स्टेशनों की रिमोट मॉनिटरिंग (दूर बैठे निगरानी) संभव हो पा रही है।

