
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने यूपीसीएल, पिटकुल व जल विद्युत निगम के मेगा प्रोजेक्ट्स की जानकारी ली
यूपीसीएल के लिए काम कर रही लॉस रिडक्शन वर्क्स के वित्तीय व भौतिक कार्यों की होगी जांच
करोड़ों की लागत से बन रहे शारदा घाट कॉरिडोर प्रोजेस्ट की कछुआ चाल से मुख्य सचिव नाराज
उत्तराखंड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड है शारदा घाट प्रोजेक्ट की कार्यदायी संस्था
पहाड़ का सच देहरादून। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने शुक्रवार को सचिवालय में प्रदेश के मेगा प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने प्रदेश के भीतर सभी बड़े प्रोजेक्ट्स का निर्माण कार्य नियमित समय पर पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने मासिक एवं त्रैमासिक लक्ष्य निर्धारित करते हुए सभी कार्यों की नियमित निगरानी किए जाने पर जोर दिया।
मुख्य सचिव ने ऊर्जा विभाग के अंतर्गत उत्तराखण्ड जल विद्युत निगम, पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन एवं यूपीसीएल के बड़े प्रोजेक्ट्स की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने लॉस रिडक्शन वर्क्स के वित्तीय एवं भौतिक लक्ष्य निर्धारित करते हुए लगातार मॉनिटरिंग की जाए एवं निर्धारित समय सीमा के अंतर्गत कार्य पूर्ण किया जाए।

उन्होंने वाइब्रेंट विलेज का विद्युतीकरण कार्य भी निर्धारित समय पर पूर्ण किए जाने हेतु मासिक लक्ष्य निर्धारित किए जाएं। मुख्य सचिव ने प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों के शीघ्र संचालित किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि रुद्रपुर एवं पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेजों को निर्माण कर शीघ्र से शीघ्र पूर्ण करते हुए कक्षाएं शुरू की जाएं। उन्होंने हरिद्वार मेडिकल कॉलेज के निर्माण कार्य में तेजी लायी जाए।
मुख्य सचिव ने शारदा घाट कार्य में हो रही देरी पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कार्यदायी संस्था यूपीडीसीसी को मजबूत किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर का कार्य भी आगामी कुंभ – 2027 को ध्यान में रखते हुए, उतना की कार्य शुरू किए जाने के निर्देश दिए, जितना विभाग दिसंबर 2026 तक पूर्ण कर सकें। उन्होंने महिला एवं बाल कल्याण विभाग के तहत् निर्माणाधीन कामकाजी महिला छात्रावास के संचालन के लिए मैकेनिज्म तैयार किए जाने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, विशेष प्रमुख सचिव अमित कुमार सिन्हा, सचिव नितेश कुमार झा, दिलीप जावलकर, चंद्रेश कुमार यादव, सी. रविशंकर एवं विनोद कुमार सुमन सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। .उत्तराखंड के प्रमुख मेगा प्रोजेक्ट्स में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन, चार धाम ऑल-वेदर रोड, जमरानी बांध और देहरादून का सॉन्ग डैम पेयजल प्रोजेक्ट शामिल हैं। ये आधारभूत संरचना (Infrastructure), आवागमन और जल आपूर्ति को मजबूत कर रहे हैं।
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन लगभग ₹37,000 करोड़ की लागत से बन रही यह परियोजना गढ़वाल क्षेत्र को शेष भारत से जोड़ेगी। इसमें कई लंबी सुरंगें शामिल हैं, जो पहाड़ों में सफर को आसान बनाएंगी। .चार धाम ऑल-वेदर रोड (सड़क परियोजना)चार धाम (बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री) तक साल भर सुरक्षित और सुगम यात्रा के लिए सड़कों का चौड़ीकरण और सुरक्षा (All-Weather Connectivity) सुनिश्चित की जा रही है। .जमरानी बांध बहुउद्देशीय परियोजना (Jamrani Dam)नैनीताल जिले की गोला नदी पर स्थित इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों में पेयजल और सिंचाई की सुविधा प्रदान करना है।
देहरादून का सौग बांध (Song Dam Drinking Water Project)देहरादून के लिए लगभग 2000 करोड़ से अधिक की लागत से यह बांध बनाया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य देहरादून शहर को गुरुत्वाकर्षण आधारित (Gravity-based) साफ पेयजल उपलब्ध कराना है।
हवाई अड्डों का आधुनिकीकरण (Airport Modernization) उधम सिंह नगर स्थित पंतनगर एयरपोर्ट के रनवे और टर्मिनल का विस्तार, और देहरादून के जॉली ग्रांट हवाई अड्डे पर बुनियादी ढांचे में बड़े सुधार किए जा रहे हैं ताकि राज्य में पर्यटकों की आवाजाही को बढ़ावा मिले।
रोपवे परियोजनाएं (Ropeway Projects)पर्यटन और सुगम यातायात के लिए केदारनाथ (गौरीकुंड से केदारनाथ) और हेमकुंड साहिब में बड़े रोपवे का निर्माण किया जा रहा है।
उत्तराखंड के ब्राइवेंट (वाइब्रेंट) विलेज और अन्य सीमांत गांवों में विद्युतीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है। पारंपरिक ग्रिड से वंचित इन क्षेत्रों को केंद्र के वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (VVP) और उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) की विशेष योजनाओं के तहत पहली बार राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़ा जा रहा है।सीमावर्ती क्षेत्रों के विद्युतीकरण की वर्तमान स्थिति मुख्य रूप से राष्ट्रीय ग्रिड से जुड़ाव। पहली बार राज्य के सुदूर और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीमावर्ती गांवों को मुख्य ग्रिड से जोड़ने का काम प्रगति पर है। सर्वे और टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
चमोली, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ (जैसे- नावी, कुट्टी, गूंजी, गर्भ्यांग, शीला आदि) के सैकड़ों घरों और ITBP की चौकियों को सीधे बिजली ग्रिड से जोड़ा जा रहा है।वैकल्पिक ऊर्जा (सौर और माइक्रो-हाइड्रो): ग्रिड कनेक्टिविटी पूरी होने तक इन क्षेत्रों में ऊर्जा की आवश्यकता उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (UREDA) द्वारा स्थापित सौर पैनलों और छोटे पनबिजली प्रोजेक्ट्स (माइक्रो-हाइडल) से पूरी की जाती रही है।
वाइब्रेंट विलेज 2.0: नेपाल सीमा से सटे लगभग 40 और गांवों में बिजली, सड़क व संचार जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए नई कार्य योजनाएं लागू की गई हैं।
उत्तराखंड के चंपावत जिले के टनकपुर में शारदा कॉरिडोर परियोजना के तहत ‘शारदा घाट’ का पुनर्विकास कार्य चल रहा है। इसके तहत घाटों के निर्माण के साथ-साथ एक भव्य आधुनिक आरती स्थल और नदी तट का सौंदर्यीकरण किया जाना है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा इस महत्वाकांक्षी परियोजना की आधारशिला रखी गई है, जिसमें ₹3300 करोड़ के समग्र शारदा रिवरफ्रंट (नदी तट) विकास का लक्ष्य है ।
उत्तराखंड में ‘लॉस रिडक्शन वर्क्स’ (Loss Reduction Works), केंद्र सरकार की पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (RDSS) का प्रमुख हिस्सा हैं। इसका मुख्य उद्देश्य बिजली वितरण नेटवर्क (UPCL) में तकनीकी और व्यावसायिक नुकसान (AT&C Loss) को कम करना व निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है। वित्तीय कार्य (Financial Works)कुल परिव्यय: राज्य के लिए लॉस रिडक्शन वर्क्स हेतु लगभग ₹1,447 करोड़ की लागत स्वीकृत की गई है।अनुदान (GBS): इसमें केंद्र सरकार द्वारा लगभग ₹1,302 करोड़ की वित्तीय सहायता (ग्रांट) शामिल है। भौतिक कार्य (Physical Works)ढांचागत मजबूती: सब-स्टेशनों का निर्माण/उन्नयन, नई विद्युत लाइनों (HT/LT) को बिछाना, पुराने तारों को बदलना और ट्रांसफार्मरों की क्षमता में वृद्धि करना।स्मार्ट मीटरिंग: बिजली के नुकसान को वास्तविक समय में ट्रैक करने और बिलिंग में सुधार के लिए स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं।3. कार्यों की स्थिति (Current Status)टेंडर व कार्य आवंटन: यूपीसीएल (UPCL) द्वारा देहरादून, हरिद्वार, हल्द्वानी (Package-H), रानीखेत (Package-J), काशीपुर (Package-I), रुड़की और पिथौरागढ़ जैसे विभिन्न पैकेजों में टेंडर प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। यह कार्य टर्नकी (Turnkey) आधार पर 24 महीनों में पूरे किए जाने हैं।

