
पहाड़ का सच नैनीताल। उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप ने राज्य सरकार से मांग की है कि 2 अक्टूबर 1994 को घटित लोमहर्षक मुजफ्फरनगर कांड के जल्द फैसले के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन करें ।

पत्रकारों से हाईकोर्ट बार कॉन्फ्रेंस हॉल में बातचीत करते हुए धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि इस कांड को 32 साल हो गए हैं लेकिन आज तक भी अपराधियों को सजा नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि अब स्मार्ट कोर्ट का जमाना है और तारीख पर तारीख यदि लगती रही तो 100 साल में भी इसका फैसला नहीं आ सकेगा। उत्तराखंड की मातृशक्ति की आंखों में आंसू हैं। 2 अक्टूबर 1994 को मुजफ्फरनगर में हुए घिनौना कांड में हमारी मां बहनों की आबरू पर डाका डाला था, आधा दर्जन से ज्यादा हमारे बेटे शहीद हुए थे लेकिन आज तक भी अपराधी खुले घूम रहे हैं और सरकार भी इस पर मौन साधे हुए है। .धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि न्याय का देर से मिलना न्याय के न मिलने के बराबर है। राज्य के हजारों राज्य आंदोलनकारी चिन्हिकरण से वंचित हैं।
उन्होंने दो महीने पहले अपने हजारों साथियों के साथ देहरादून में विधानसभा का घेराव किया था और गृह सचिव शैलेश बगौली के साथ दो घंटा अधिकारियों के साथ वार्ता हुई थी। गृह सचिव ने कहा था कि अगले 15 दिन में कैबिनेट बैठक बुला कर आंदोलनकारियों के क्षैतिज आरक्षण और चिन्हिकरण में आ रही कमियों का निराकरण किया जाएगा और राज्य आंदोलनकारी को चिन्हिकरण से जो वंचित है उन्हें इसका लाभ दिलवाया जाएगा ।
उन्होंने कहा इस घटना को भी दो महीना गुजर गए और आंदोलनकारी बेहाल हैं। उन्होंने महिला सशक्तिकरण के नाम पर नारी वंदन को आधार बनाकर संसद के सत्र में महिलाओं को शक्ति दिए जाने को ढकोसला बताया और कहा सरकार की मंशा महिलाओं को आरक्षण देने की नहीं थी बल्कि वह डीलिमिटेशन के नाम पर सीटों का पुनर्गठन कर अपना आधार बढ़ाना चाहते थे।
उन्होंने अंकिता भंडारी कांड में पिछले हफ्ते दिल्ली पुलिस द्वारा उन्हें घंटों गिरफ्तार करके उनके टेलीफोन छीन लिए जाने को मानव अधिकार पर हमला बताया। .उन्होंने कहा कि देश को आजादी मिले वर्षों हो गए लेकिन आज भी तानाशाही का कानून चल रहा है । टेलीफोन की गतिविधियां चेक की जा रही हैं और उनका व्हाट्सएप भेजने का अधिकार सीमित कर दिया गया है।
इस मौके पर धीरेंद्र प्रताप के साथ नैनीताल के पूर्व सांसद और जाने-माने वकील महेंद्र सिंह पाल और रमन शाह भी मौजूद थे जो उत्तराखंड आंदोलन के नैनीताल में चल रहे उत्तराखंड आंदोलन के मामलों के वकील हैं और सक्रियता से राज्य आंदोलनकारी की पैरवी करते हैं।

